कम्प्यूटर क्या है?
: कंप्यूटर एक ऐसा इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है जिसकी
सहायता से आप बड़ी से बड़ी कैलकुलेशन आसानी से कर सकते हैं एवं इसकी
सहायता से आप अपने डाटा को सुरक्षित रख सकते हैं एवं अपने
डाक्यूमेंट्स को सिक्योर कर सकते हैं। कंप्यूटर आपको पीडीएफ फाइल
बनाने की भी सहायता देता है और इसके अलावा आप अपना फोल्डर एवं
कंप्यूटर की सहायता से आप म्यूजिक भ सुन सकते हैं और इंटरनेट की
सुविधा भी आपको इस पर उपलब्ध की जाती है।
कंप्यूटर इनपुट द्वारा दिए गए निर्देशों को प्रोसेस करके आउटपुट
आपको स्क्रीन पर रिजल्ट दर्शाता है।
computer एक ऐसा उपकरण है जिसकी सहायता से अर्थमैटिक एवं तार्किक
कैलकुलेशन करना आसान हो जाता है और यही नहीं कंप्यूटर के अनेक कई
फायदे हैं जो आप रोजमर्रा की जिंदगी में भी देख सकते हैं। Computer
सिर्फ बिजनेस पर्सन के लिए ही नहीं है बल्कि यह छात्रों के लिए भी
अति आवश्यक बन चुका है। आजकल अधीकांश पढ़ाई क्योंकि ऑनलाइन हो गई
इसलिए इसमें कंप्यूटर छात्रों को पढ़ाई में काफी सहायक साबित होता
है।
computer kya hai इसे जानने के लिए सबसे पहले हमें जानना होगा कि
कंप्यूटर के तीन मुख्य घटक क्या है– सबसे पहले हम इनपुट की बात
करेंगे इनपुट के अंतर्गत कीबोर्ड एवं माउस आता है और इसके बाद हम
प्रोसेसर की बात करते हैं जिसे सीपीयू के द्वारा समझा जा सकता है
सीपीयू यानी (CPU – Central Processing Unit) एवं आउटपुट जिसको हम
डिस्प्ले या कंप्यूटर स्क्रीन के माध्यम से समझ सकते हैं।
कंप्यूटर की परिभाषा (Definition Of Computer)
यह (कंप्यूटर) एक ऐसा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है जो यूजर की कमांड पर
इनपुट को प्रोसेस करके आउटपुट में बदलता है एवं गणना को आसान बनाता
है।
Computer आंकड़ों की गणना करना आसान बनाता है और साथ ही साथ सारे
डाटा व आंकड़ों को सुरक्षित स्टोर करता है। आप जब चाहे तब आंकड़ों को
या अपनी फाइल्स को फोल्डर में जाकर चेक कर सकते हैं और वहां से भी कर
सकते हैं एवं मॉडिफाई भी कर सकते हैं।
कंप्यूटर के गुण व विशेषताएं (Characteristics Or
Features Of Computer)
कंप्यूटर हिंदी में जानने के बाद चलिए अब हम जानते हैं कंप्यूटर की
कुछ विशेषताएं कृपया इस आर्टिकल को ध्यान पूर्वक अंत तक पढ़े –
1. Speed
जैसा कि हम सब जानते हैं कंप्यूटर को तीव्र गति से परफॉर्म करने के
लिए डिजाइन किया गया है और कंप्यूटर इस में माहिर है कि वह कोई भी
फंक्शन बड़े आसानी से काफी तीव्र गति से कर सकता है क्योंकि इसी तरह
प्रोग्रामिंग हुई है जिस कारण यह रिजल्ट काफी फास्ट शो कराता है वह
डाटा को काफी जल्दी प्रोसेस करता है।
2. Accuracy
अगर सटीकता की तुलना की जाए तो कंप्यूटर का डाटा और उसकी परफॉर्मेंस
काफी सटीक व एक्यूरेट पाई जाती है मैन्युअल मेथड की तुलना में।
कंप्यूटर का कार्य हमेशा सटीक ही होता है इसमें सिर्फ यूजर के कारण
उसकी डाटा एंट्री या उसके कमांड करने में गलती के कारण ही हो सकता है
क्योंकि कंप्यूटर में जो डाटा फीड किया जाता है वह उसी के हिसाब से
आपको रिजल्ट शो करता है।
3. Reliability
कंप्यूटर एक काफी विश्वसनीय सोर्स है और इसके द्वारा किया हुआ काम
विश्वसनीय है क्योंकि जो भी एरर आता है वह मैनुअल मेथड में ज्यादा
देखा जाता है बजाए कंप्यूटर के किए हुए रिजल्ट के। कंप्यूटर में फीड
किया हुआ डाटा वर्षों बाद भी एक्यूरेट रहता है अगर कोई चीज की
आवश्यकता है तो वह उसको चेंज करने की सुविधा भी उपलब्ध कराता है।
5. Super Memory
कंप्यूटर की मेमोरी काफी साफ होती है जिससे सालों पुरानी फाइल भी
आपको मिनटों में निकाल कर प्रेजेंट कर सकता है। आपकी चाय सालों
पुरानी फाइल किसी भी फोल्डर में पड़ी होगी आपको सिर्फ सर्च करना है
और आपको वह फाइल तुरंत मिल सकती है आप जो डाटा मेमोरी में फिट करेंगे
वह आपको जब चाहे तब कंप्यूटर के द्वारा उपलब्ध कराया जा सकता है।
कंप्यूटर के मुख्य अंश (Parts Of Computer In Hindi)
जैसा कि हम जानते हैं कि कंप्यूटर कुछ पार्ट से मिलकर बना हुआ होता
है तो हम आगे इस लेख में जानेंगे कि वह कौन से पार्ट हैं जिनको मिलाकर
एक कंप्यूटर बनता है। इस लेख में आगे आपको कंप्यूटर के कुछ मुख्य अंश
के बारे में जानने को मिलेगा एवं उनकी विशेषताएं एवं वक्त क्या काम
करते हैं अभी आप आसानी से जान पाएंगे–
Motherboard
मदरबोर्ड कंप्यूटर का मुख्य सर्किट बोर्ड है। मदरबोर्ड एक पतली
प्लेट होती है जिसके द्वारा कंप्यूटर का सारे सिस्टम कनेक्ट होते
हैं और यह सारे कॉम्पोनेंट्स जैसे कि optical drive, CPU,hard drive,etc
इससे जुड़े हुए होते हैं। मदरबोर्ड कंप्यूटर का एक अहम हिस्सा है
जिसके द्वारा कंप्यूटर आसानी से फंक्शन कर पाता है तथा सारी कमांड व
एक्शन आसानी से ले पाता है। इसकी सहायता से आप हार्ड ड्राइव में अपना
डाटा स्टोर करके रख सकते हैं और जब चाहे तब आप अपने डेटा का एक्सेस ले
सकते हैं।
CPU
CPU जिसे हम Central Processing Unit के नाम से भी जानते हैं।
सीपीयू को कंप्यूटर का ब्रेन कहा जाता है और यह मदरबोर्ड के अंदर
पाया जाता है। जितना फास्ट सीपीयू का प्रोसेसर होगा उतनी जल्दी
हमारा कंप्यूटर तेजी से फंक्शन कर पाएगा और तेजी से डाटा
को load करने मे कारगर होगा एवं इंटरनेट सर्फिंग आसानी से कर पाएगा।
सीपीयू ज्यादातर डाटा का विश्लेषण करने में मदद करता है और कंप्यूटर
से जुड़ी हुई सारी प्रोसेसिंग को फास्ट बनाता है।
RAM
Random Access Memory यानी RAM यह कंप्यूटर में एक temporary
memory का काम करती है। RAM जिसे हम GB(giga bytes), MB(mega
bytes) की unit से समझ सकते हैं। जितने जीबी या एमबी का रैम होगा आपके
कंप्यूटर में उतनी ही अच्छी तरह से प्रोसेस करेगा एवं उसकी स्पीड
उतनी ही अच्छी होगी। पर अगर आप अपनी कोई फाइल को सेव करना चाहते हैं
तो उसको आप सेव ऑप्शन पर जाकर अपने हार्ड ड्राइव में सेव कर सकते हैं
क्योंकि वे एक टेंपरेरी मेमोरी सिस्टम है तो इसके कारण कंप्यूटर ऑफ
होने पर आपका डाटा डिलीट हो सकता है।
Hard Drive
हार्ड ड्राइव कंप्यूटर में एक परमानेंट मेमोरी रखने का सिस्टम है जो
कई लेयर से बना होता है जिसमें सारा डाटा रखा जाता है और इसमें साथ ही
साथ एक ऑप्शन दिया जाता है जिसकी मदद से आप डाटा को रीड एवं राइट कर
सकते हैं। आपका सारा डाटा हार्ड ड्राइव में सुरक्षित होता है और आप
जब चाहे तब अपने डाटा को एक्सेस कर सकते हैं हार्ड ड्राइव की मदद से।
Computer System In Hindi
कंप्यूटर सिस्टम में कंप्यूटर की प्रणाली को दो भागों में विभाजित
किया गया है–
Computer Hardware
कंप्यूटर हार्डवेयर यह कंप्यूटर का वह सिस्टम है जिसे हम देख व छू
सकते है। इसे हम एक उदाहरण के तौर पर समझ सकते हैं जैसे कि कंप्यूटर
का मॉनिटर या स्क्रीन है जिसे हम साफ तौर पर देख या छू सकते हैं या
फिर जैसे की mouse जिसे हम नेविगेशन के लिए इस्तेमाल करते हैं।और
देखा जाए तो टेक्नोलॉजी के अपडेट होते ही कंप्यूटर हार्डवेयर में भी
नए बदलाव देखने को मिले हैं जैसे कि इनकी शेप साइज आदि में काफी
बदलाव आए हैं इनके शुरुआती दौर से।
Computer Software
computer software यह कंप्यूटर की ऐसी प्रणाली है जिसे हम देख या छू
नहीं सकते परंतु हम इसके फंक्शन को रिजल्ट के रूप में जरूर देख सकते
हैं एवं इसके द्वारा किए जाने वाले कार्यों को चेक कर सकते
हैं। Computer software computer के operating system एवं उसके
विकास पर निर्धारित होता है जितना अच्छा उसका ऑपरेटिंग सिस्टम होगा
कंप्यूटर भी उतना अच्छा फंक्शन करेगा। कंप्यूटर सॉफ्टवेयर के ही
द्वारा कमांड व घटनाओं को समझ पाता है जिससे उसका फंक्शन करना काफी
आसान बन जाता है।
इन सभी जानकारियों में हमने जाना कि कंप्यूटर सॉफ्टवेयर व
हार्डवेयर दोनों ही कंप्यूटर के सही तरह से फंक्शन करने के लिए बेहद
जरूरी है। और आगे अन्य महत्वपूर्ण जानकारी पाने के लिए इस आर्टिकल
को अंत तक अवश्य पढ़ें।
हम आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें कि पर्सनल कंप्यूटर जो आप अपने
घरों में इस्तेमाल करते हैं उसी को कहा जाता है पर्सनल कंप्यूटर
जिसे हम सामान्य भाषा में इसकी शार्ट फॉर्म जो कि PC है इसके नाम से
जानते हैं और पीसी को माइक्रो कंप्यूटर भी कहते हैं क्योंकि इसे एक
समय पर एक ही व्यक्ति इस्तेमाल कर सकता है इसलिए इसको
माइक्रोकंप्यूटर भी कहा जाता है।
Types of computer based on size and
functionality-आकार और कार्यक्षमता के आधार पर
कंप्यूटर के प्रकार
माइक्रो कंप्यूटर (Micro computer)🖥
टेक्निकल रूप से ये कंप्यूटर बहुत कम काम करने के लिए बनाए गए हैं, लेकिन
ये सभी कामों के लिए उपयोग होते हैं। इन कंप्यूटरों का विकास 1970 में हुआ
था और ये एकल उपयोगकर्ता प्रणाली होती हैं। इन कंप्यूटरों में CPU में
माइक्रो प्रोसेसर का इस्तेमाल होता है, इसलिए इन्हें एकल उपयोगकर्ता
माइक्रो कंप्यूटर कहा जाता है।
ये कंप्यूटर बोझ में हल्के और सस्ते होते हैं। आमतौर पर घरों और छोटे
व्यवसायों में इन्हें उपयोग किया जाता है। वर्तमान में इन कंप्यूटरों का
विकास बहुत तेजी से हो रहा है। इन कंप्यूटरों को व्यक्तिगत कंप्यूटर
(पर्सनल कंप्यूटर) या पीसी भी कहा जाता है। ये कंप्यूटर माइक्रो कंप्यूटर
और मेनफ्रेम कंप्यूटर की तुलना में छोटे होते हैं।
इनके CPU में एक रैम, रोम, इनपुट/आउटपुट पोर्ट, इंटरकनेक्टिंग वायर्स और
मदरबोर्ड होता है। माइक्रो कंप्यूटर की सबसे बड़ी विशेषता ये है कि ये एक
किताब, फ़ोन और घड़ी के आकार में भी बनाए जा रहे हैं। इन माइक्रो
कंप्यूटरों का उपयोग घरों, स्कूलों, ऑफिस आदि में किया जाता है।
पीसी को व्यक्तिगत कंप्यूटर भी कहते हैं क्योंकि इसे IBM ने प्रस्तुत
किया था, इसलिए इसे IBM Compatible व्यक्तिगत कंप्यूटर भी कहा जाता है।
Micro Computer के उदाहरण
Desktop computer
Laptop computer
Palmtop Computer
Notebook Computer
Tablet Computer
मिनी कंप्यूटर (Mini Computer)
मिनी कंप्यूटर्स का आकार लगभग माइक्रो कंप्यूटर्स जैसा ही होता है, लेकिन
इसकी कार्य करने की क्षमता मिनी कंप्यूटर्स से अधिक होती है। ये कंप्यूटर
बैंक, फैक्ट्री और बीमा कंपनियों में हिसाब-किताब रखने और अन्य कार्यों के
लिए उपयोग होते हैं। इस कंप्यूटर पर एक समय में एक से अधिक लोग काम कर सकते
हैं।
मिनी कंप्यूटर्स की मेमोरी, स्पीड और कार्य क्षमता माइक्रो कंप्यूटर्स से
अधिक होती है, लेकिन मेनफ्रेम कंप्यूटर्स से कम होती है। इस कंप्यूटर में
एक से अधिक सीपीयू होते हैं। सबसे पहला मिनी कंप्यूटर, 1965 में PDP-8 के
रूप में बनाया गया था। उसका आकार एक फ्रीज के बराबर था और इसकी कीमत 18,000
डॉलर थी।
इसको DEC नामक कंपनी ने विकसित किया था। DEC का पूरा नाम Digital
Equipment Corporation था। मिनी कंप्यूटर का उपयोग वित्तीय खातों के
लेखापात, बिक्री विश्लेषण, लागत विश्लेषण और अन्य कार्यों के लिए किया
जाता है।
Mini Computer के उदाहरण
DEC PDP and VAX series
Control Data’s CDC 160A and CDC 1700
Data General Nova
Honeywell-Bull DPS 6/DPS 6000 series
IBM Mid Range Computers
मेनफ्रेम कंप्यूटर (Mainframe Computer)
यह कंप्यूटर बहुत शक्तिशाली होते हैं। इन कंप्यूटर्स की मेमोरी की सीमा
और स्पीड, माइक्रो कंप्यूटर और मिनी कंप्यूटर की तुलना में बहुत अधिक होती
है जिससे सभी टर्मिनल्स द्वारा किये जाने वाले कार्य को ठीक से संग्रहित
किया जा सके। इन कंप्यूटरों की मेमोरी क्षमता आवश्यकतानुसार बढ़ाई या कम
की जा सकती है।
इनका उपयोग नेटवर्किंग के लिए होता है। अर्थात इन कंप्यूटरों पर बहुत से
टर्मिनल्स जुड़े रहते हैं और इन टर्मिनल्स को कहीं भी रखा जा सकता है और
अगर टर्मिनल्स को मेन कंप्यूटर के पास रखा जाता है, जैसे एक ही बिल्डिंग
में, तो इसे “लोकल एरिया नेटवर्किंग” कहा जाता है।
अगर कंप्यूटर टर्मिनल्स को मेन कंप्यूटर से दूर, जैसे किसी अन्य शहर में,
रखा जाता है तो इस प्रकार की नेटवर्किंग को “वाइड एरिया नेटवर्किंग” कहा
जाता है। वाइड एरिया नेटवर्किंग का रेलवे में उपयोग होने वाले टर्मिनल्स,
इसका एक अच्छा उदाहरण है। बहुत सारी कंपनियाँ मेनफ्रेम कंप्यूटर का उपयोग
खरीद और भुगतान का ब्यौरा, बिल भेजना-रखना, नोटिस भेजना, कर्मचारियों का
वेतन देना, कर का ब्यौरा रखना आदि के लिए करती हैं।
मेनफ्रेम कंप्यूटर की गति टर्मिनल्स की संख्या और तारों की लंबाई के
अनुसार बढ़ती और घटती है। वास्तव में टर्मिनल्स मेनफ्रेम कंप्यूटर का
उपयोग करने के लिए एक लाइन में खड़े रहते हैं, परंतु ज्यादा पावरफुल होने
के कारण मेनफ्रेम कंप्यूटर प्रत्येक टर्मिनल का कार्य तेजी से निबटा सकता
है।
टर्मिनल पर काम कर रहे कर्मचारी को लगता है कि कंप्यूटर केवल उसका काम कर
रहा है। इस प्रकार के कार्य को “Time Sharing System” कहा जाता है।
P.C.A.T../386, 486, IBM 4381,ICL 39 Series और CDC Cyber Series मेनफ्रेम
कंप्यूटर के मुख्य उदाहरण हैं।
ये कंप्यूटर सर्वर कंप्यूटर के रूप में कार्य करते हैं। बड़ी कंपनियों और
सरकारी ऑफिसों में इनका प्रयोग अधिक मात्रा में डेटाबेस रखने के लिए किया
जाता है। इस कंप्यूटर में हजारों उपयोगकर्ता एक साथ कार्य कर सकते हैं और
इसकी मेमोरी क्षमता (24×7) दिन की होती है। मेनफ्रेम कंप्यूटर का
हार्डवेयर भी मिनी कंप्यूटर से बड़ा होता है और इनमें माइक्रो कंप्यूटर
का प्रयोग क्लाइंट के रूप में होता है।
मेनफ्रेम कंप्यूटर में दो तरह के प्रोसेसर का प्रयोग किया जाता है, पहला
मुख्य प्रोसेसर और दूसरा सिस्टम सहायता प्रोसेसर (एसएएपी) होता है।
एसएएपी डेटा को एक स्थान से दूसरे स्थान पर तेजी से ले जाता है। यह मुख्य
प्रोसेसर की तरह डेटा को प्रोसेस नहीं करता है।
Mainframe Computer के उदाहरण
IBM 4381
ICL 39
CDC Cyber
सुपर कंप्यूटर (Super Computer)
सुपर कंप्यूटर अभी तक का सबसे ताकतवर कंप्यूटर है। इसमें कई सीपीयू (CPU)
एक साथ काम करते हैं और इसे “दोहरी कार्यप्रणाली” कहा जाता है। ये
कंप्यूटर बड़ी समस्याओं को हल करने में मदद करते हैं।
दुनिया का पहला सुपर कंप्यूटर I.L.L.I.A.C. है। वॉन न्यूमान सिद्धान्त के
अनुसार, एक सीपीयू डेटा और प्रोग्राम को एक साथ क्रियान्वित करता है।
लेकिन सुपर कंप्यूटर “नॉन-वॉन न्यूमान सिद्धान्त” के अनुसार बनाया जाता
है।
सुपर कंप्यूटर में कई ALU (Arithmetic Logic Unit) और CPU होते हैं जो एक खास
काम के लिए उपयोग होते हैं और सभी ALU एक साथ काम करते रहते हैं। सुपर
कंप्यूटर में कई इनपुट और आउटपुट डिवाइस जोड़े जा सकते हैं।
सुपर कंप्यूटर आज के दौर में सबसे तेज़ कंप्यूटर है। इसे वैज्ञानिकों और
इंजीनियरों द्वारा उभरती हुई समस्याओं को हल करने के लिए इस्तेमाल किया
जाता है, जो बड़े डेटाबेस को संभालते हैं।
इस कंप्यूटर में एक से अधिक सीपीयू (CPU) का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे
यह बहुत तेज़ काम करता है। इसकी मदद से बड़ी से बड़ी समस्याएं कुछ ही सेकंड
में हल की जा सकती हैं। सुपर कंप्यूटर बड़े आकार और महंगाई के होते हैं और
यह बहुत ज्यादा क्षमता वाला होता है।
सुपर कंप्यूटर के कार्य:
सुपर कंप्यूटर का उपयोग कई महत्वपूर्ण कामों के लिए किया जाता है। यहाँ वे
कुछ काम बताए गए हैं जो समझने में आसान होंगे:
1. अंतरिक्ष यात्रा: सुपर कंप्यूटर अंतरिक्ष यात्रा के लिए बहुत
महत्वपूर्ण है। यह वैज्ञानिकों को बड़ी प्रयोगशालाओं में शोध और खोज करने
में मदद करता है।
2. मौसम विज्ञान: सुपर कंप्यूटर मौसम के बारे में जानकारी लेने में मदद
करता है। यह हमें मौसम की पूर्वानुमान बनाने और समय के अनुसार तूफानों और
बारिश के बारे में सूचना प्रदान करता है।
3. एच रेजोल्यूशन एनिमेशन या एक्शन मूवी: सुपर कंप्यूटर एक्शन मूवी और
उच्च रेजोल्यूशन एनिमेशन बनाने में मदद करता है। इसकी सहायता से एक्शन
सीनों को वास्तविकता के नजदीक लाया जा सकता है और एनिमेशन को अधिक रंगीन
बनाया जा सकता है।
4. युद्ध: सुपर कंप्यूटर युद्ध के लिए भी उपयोगी होता है। इसका उपयोग
सैन्य ओपरेशन, रणनीति और युद्ध के लिए बड़े डेटा को व्यवस्थित करने में
किया जाता है।
Super Computer के उदाहरण
PARAM 8000 (India’s First super computer)
IBM Summit
Sunway TaihuLight
NUDT Tianhe-2
Cray HPE/Piz Daint
Cray HPE Trinityb
भारत के सुपर कंप्यूटर (Super computers of India)
1-परम: सुपरकंप्यूटर भारत का पहला पेटाफ्लॉप स्तर का सुपरकंप्यूटर है
जिसे भारतीय प्रयोगशाला वाणिज्यिक संगठन (C-DAC) ने विकसित किया है। यह
एक अद्भुत गतिविधि और प्रसंस्करण क्षमता वाला है।
2-सागरमाला: यह सुपरकंप्यूटर भारतीय इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी मद्रास
(IIT Madras) द्वारा विकसित किया गया है। यह भारतीय विज्ञान और शोध
प्रयोगशाला के लिए उपयुक्त है।
3-मीहिर: यह सुपरकंप्यूटर वाईएमके, पुने द्वारा विकसित किया गया है और यह
भारतीय शोध और विकास निगम के लिए उपयुक्त है।
ये सुपरकंप्यूटर भारत को उच्च-स्तरीय वैज्ञानिक अनुसंधान, जैवविज्ञान,
मौसम पूर्वानुमान, जलवायु मॉडेलिंग, गणितीय अभिकल्पन, औषधीय और औद्योगिक
विज्ञान आदि में मदद करते हैं। इन सुपरकंप्यूटरों का उपयोग विभिन्न शोध
परियोजनाओं, उद्योगों और सरकारी कार्यों में किया जाता है।
Personal computers (PCs)
पर्सनल कंप्यूटर एक छोटा और सस्ता कंप्यूटर होता है जिसे एक व्यक्ति ही
इस्तेमाल कर सकता है। इस कंप्यूटर का निर्माण सामान्य कामों को करने के
लिए किया जाता है। यह व्यक्तिगत कार्यों को पूरा करने में मदद करता है,
जैसे कि असाइनमेंट पूरा करना, मूवी देखना, या ऑफिस के काम करना आदि। इस
कंप्यूटर में सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (सीपीयू), मेमोरी, इनपुट यूनिट और
आउटपुट यूनिट होता है। हम पर्सनल कंप्यूटर को माइक्रो कंप्यूटर भी कहते
हैं।
वर्कस्टेशन कंप्यूटर (Workstation Computer)
चलो अब हम वर्कस्टेशन कंप्यूटर के बारे में बात करें। ये कंप्यूटर
इंजीनियरिंग एप्लिकेशन (CAD, CAM), डेस्कटॉप प्रकाशन, सॉफ्टवेयर विकास
और अन्य ऐसे कामों के लिए इस्तेमाल होते हैं। इन कंप्यूटरों में एक बड़ा
उच्च रिज़ॉल्यूशन ग्राफिक स्क्रीन, बड़ी मात्रा में रैम, इंबिल्ट नेटवर्क
सपोर्ट, और एक ग्राफिकल यूज़र इंटरफ़ेस होता है। ये कंप्यूटर महंगे होते
हैं। इनकी कार्य क्षमता माइक्रो कंप्यूटर से अधिक होती है और इनका साइज़
भी बड़ा होता है।
Tablets 📱
टैबलेट कंप्यूटर हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हो गए हैं। ये हमें
आसानी और बड़ी उपयोगिता प्रदान करते हैं। ये छोटे उपकरण स्मार्टफोन और
लैपटॉप के बीच में आधार बन गए हैं, इसलिए ये विभिन्न कामों के लिए आदर्श
हैं। टैबलेट इंटरनेट चलाने, वीडियो देखने, खेल खेलने और किताबें पढ़ने के
लिए बहुत अच्छे होते हैं। इनमें टच-स्क्रीन होता है, जिससे उनका इस्तेमाल
करना आसान होता है। उनके मजबूत प्रोसेसर और काफी स्टोरेज के साथ, टैबलेट
कई कामों को एक साथ कर सकते हैं और विभिन्न एप्स चला सकते हैं। काम या
खेलने के लिए, टैबलेट ने हमारे टेक्नोलॉजी के साथ इंटरेक्शन का तरीका बदल
दिया है। ये हमें हथेली में आसानी से ले जाने और उन्हें इस्तेमाल करने का
आनंद प्रदान करते हैं।
Smartphones📱
आओ अब हम स्मार्टफोन के बारे में बात करें। स्मार्टफोन हमारे जीवन का एक
महत्वपूर्ण हिस्सा हो गया है। यह चमकदार और उपयोगी उपकरण है। स्मार्टफोन
में हमें बहुत सारी सुविधाएं मिलती हैं। हम इसे बातचीत करने, फोटो और
वीडियो खींचने, गेम खेलने और इंटरनेट सर्फ करने के लिए इस्तेमाल कर सकते
हैं। इसमें बहुत सारे ऐप्स भी चलाए जा सकते हैं। स्मार्टफोन चलाना बहुत ही
आसान होता है और हम इसे आसानी से हाथ में ले सकते हैं। हम इसका उपयोग करके
टेक्नोलॉजी के साथ बेहतर ढंग से जुड़ सकते हैं।
उद्देश्य के आधार पर कंप्यूटर के प्रकार (types
of computer based on purpose)
चलो अब आर्टिकल “Types of Computer in Hindi” में हम देखते हैं कि कंप्यूटर
कितने प्रकारों में होते हैं और इन्हें हम किस उद्देश्य के लिए उपयोग करते
हैं। हर उद्देश्य के लिए अलग-अलग प्रकार के कंप्यूटर होते हैं। हम
कंप्यूटर को उद्देश्य के हिसाब से विभाजित करके उन्हें नाम देते हैं।
सामान्य उद्देश्य कंप्यूटर (General-purpose computers)
चलो अब हम देखें कि ये कंप्यूटर किस तरह के काम के लिए उपयोग होते हैं। इन
कंप्यूटर का उपयोग सामान्य कामों के लिए किया जाता है जैसे पत्र लिखना और
डेटाबेस का उपयोग करना। ऐसे कंप्यूटर पर हम इन सभी काम कर सकते हैं, उन्हें
हम सामान्य उद्देश्य कंप्यूटर कहते हैं। इन कंप्यूटर्स का सबसे ज्यादा
उपयोग होता है। इन कंप्यूटर्स का उपयोग दुकानों, कार्यालयों, स्कूलों और
व्यक्तिगत काम के लिए भी किया जाता है। उदाहरण के तौर पर, आई.बी.एम. पीसी एक
ऐसा ही कंप्यूटर है।
विशेष उद्देश्य कंप्यूटर (Special-purpose computers)
चलो अब हम देखें कि उद्देश्य के आधार पर बनाए गए कंप्यूटर कैसे होते हैं।
ऐसे कंप्यूटर को हम विशेष उद्देश्यीय कंप्यूटर कहते हैं। इन कंप्यूटर्स
में ज्यादा मेमोरी होती है और वे बहुत तेज़ी से काम कर सकते हैं। विशेष
उद्देश्यीय कंप्यूटर्स में कार्य बहुत कुशलता से होता है। ये कंप्यूटर्स
अन्य कंप्यूटरों की तुलना में महंगे होते हैं और इनका उपयोग मौसम विज्ञान,
कृषि विज्ञान, युद्ध और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में किया जाता है।
गेमिंग कंप्यूटर (Gaming computers)🎮
गेमिंग कंप्यूटर गेमर के खेलने का सबसे अच्छा दोस्त होते हैं, जो मजेदार
और रोमांचक खेलने का अनुभव देते हैं। ये सुपर तेज मशीनें बनाई गई होती हैं
जो नवीनतम वीडियो गेम को खेलने के लिए बनाई गई हैं। गेमिंग कंप्यूटर बड़े-
बड़े प्रोसेसर, उच्च ग्राफिक्स कार्ड और ज्यादा मेमोरी के साथ स्मूथ
खेलने, अद्वितीय दृश्य और तत्परता देने में सक्षम होते हैं। इनमें
बेहतरीन ग्राफिक्स होते हैं, जो खिलाड़ियों को खूबसूरत विवरण और जीवित
माहौल का आनंद लेने में मदद करते हैं। इनके पास एडवांस्ड कूलिंग सिस्टम और
अनुकूलनयोग्य घटक होते हैं, जिससे खिलाड़ी अपने गेमिंग पीसी को सबसे
बेहतर प्रदर्शन के लिए बना सकते हैं। चाहे वह प्रतिस्पर्धी मल्टीप्लेयर
हो या विस्तृत आभासी दुनियाओं का अन्वेषण करना हो, गेमिंग कंप्यूटर्स
खेलने को अगले स्तर तक ले जाते हैं, हर सत्र को यादगार साहसिक यात्रा बनाते
हैं।
मीडिया सेंटर कंप्यूटर (Media center computers)📺
मूवीज़ और टीवी शो देखने के लिए कंप्यूटर
मीडिया सेंटर कंप्यूटर ऐसे कंप्यूटर होते हैं जो वीडियो गाने, टीवी शो और
संगीत जैसे मनोरंजक मीडिया को चलाने और संचालित करने के लिए बनाए जाते
हैं। ये कंप्यूटर बड़ी स्टोरेज क्षमता, अच्छी गुणवत्ता वाला वीडियो और
ऑडियो आउटपुट और आसानी से मीडिया फ़ाइलों को संगठित करने और उपयोग करने के
लिए बनाए गए सॉफ़्टवेयर के साथ आते हैं। मीडिया सेंटर कंप्यूटर इंटरनेट
से मीडिया सामग्री स्ट्रीम करने के लिए भी इस्तेमाल हो सकते हैं, जिसके
कारण ये घर के मनोरंजन सिस्टम के लिए बहुत लोकप्रिय होते हैं।
एंबेडेड कंप्यूटर (embedded computer)📟
एंबेडेड कंप्यूटर एक दिलचस्प प्रकार का कंप्यूटर है जो हमारे चारों तरफ़
के उपकरणों और सिस्टम में छुपा होता है। इनका निर्माण ऐसे किया जाता है कि
वे कुछ विशेष काम कर सकें और ये हमारी रोज़मर्रा की वस्तुओं जैसे कारें,
उपकरण, चिकित्सा उपकरण और औद्योगिक मशीनरी में स्थापित होते हैं। ये
कंप्यूटर इन उपकरणों के जैसे ही होते हैं, जो उन्हें उनके निर्धारित
उद्देश्यों को पूरा करने में सक्षम बनाते हैं। वे छोटे, कम बिजली खपत वाले
और प्रदर्शन में विशेषाधिकार के लिए अनुकूलित होते हैं। एंबेडेड
कंप्यूटर को विशेष कार्यों के लिए प्रोग्राम किया जाता है और अक्सर
वास्तविक समय में काम करते हैं। इनकी मौजूदगी आधुनिक तकनीक में
महत्वपूर्ण है, जो हमारे जीवन में स्वचालितता, नियंत्रण और जुड़ाव को
बढ़ाती है। स्मार्ट घरों से शानदार शहरों तक, एंबेडेड कंप्यूटर हमारी आपस
में जुड़ी दुनिया को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
आर्किटेक्चर के आधार पर कंप्यूटर के प्रकार
(Types of computer based on architecture)
एनालॉग कंप्यूटर (Analog computers)
“एनालॉग” एक ग्रीक शब्द है जिसका अर्थ होता है “किसी दो राशियों में
समानता ढूंढ़ना”। एनालॉग कंप्यूटर वास्तविक क्रिया को निरंतर बनाए रखने
के लिए उपयोग होते हैं। इन कंप्यूटर्स को एनालॉग डेटा या सिग्नल्स के रूप
में इनपुट लेते हैं, उन्हें प्रोसेस करते हैं और आउटपुट भी एनालॉग में ही
दिखाते हैं। इन कंप्यूटर्स से पूरी तरह सही परिणाम नहीं मिलते हैं, लेकिन
यहाँ तक कि 99% तक सही परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
एनालॉग कंप्यूटर्स का उपयोग विभिन्न मापों के लिए किया जाता है, जैसे
दबाव, तापमान, लंबाई, ऊंचाई आदि। यह कंप्यूटर माप करके उसके परिणाम को
अंकों में दर्शाते हैं और इन कंप्यूटर्स दो मापों के बीच तुलना भी करते
हैं। इन कंप्यूटर्स का उपयोग विज्ञान और इंजीनियरिंग क्षेत्रों में किया
जाता है। ये कंप्यूटर आउटपुट के रूप में ग्राफ भी प्रदान करते हैं। इन
कंप्यूटर्स में मेमोरी की कम क्षमता होती है और उनकी गति भी कम होती है। इन
कंप्यूटर्स में अल्फान्यूमेरिक डेटा को प्रोसेस नहीं किया जा सकता है और
इनके लिए आरएफ तकनीक की आवश्यकता होती है।
दबाव मापन:
तापमान नियंत्रण:
ऊंचाई का मापन:
विज्ञानिक अध्ययन:
डिजिटल कंप्यूटर (Digital computers)💻
डिजिटल कंप्यूटर एक तरह का इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है जो जानकारी को बहुत
तेज़ी से काम करने के लिए उपयोग करता है। इसका उपयोग अंकों और 0 और 1 के
बाइनरी सिस्टम से करते हुए डेटा को गणितीय कार्यों के लिए संग्रहित करने
में किया जाता है। यह विभिन्न क्षेत्रों में इस्तेमाल होता है जैसे कि
विज्ञान, वाणिज्यिक और मनोरंजन। डिजिटल कंप्यूटर तेज़, सटीक और विशेष
सॉफ़्टवेयर के माध्यम से विभिन्न कार्यों को करने में महान है। इसकी
योग्यता के कारण, डिजिटल कंप्यूटर हमारे जीवन का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा
बन गया है और उनके बिना आधुनिकता संभव नहीं हो सकती।
डिजिटल कंप्यूटर अंकों की गिनती करने वाला उपकरण होता है। ये कंप्यूटर
अक्षरों, संख्याओं और विशेष प्रतीकों को प्रतिष्ठित करते हैं। ये
कंप्यूटर डेटा और प्रोग्राम को इलेक्ट्रॉनिक रूप में 0 और 1 में बदलते
हैं। इन्हें ज्यादातर गणितीय कार्यों के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जैसे
जोड़ना, घटाना, गुणा आदि। आजकल के सबसे आम कंप्यूटर डिजिटल कंप्यूटर होते
हैं। इन कंप्यूटर के उदाहरण लेखा मशीन और कैलकुलेटर होते हैं। इनकी तुलना
में एनालॉग कंप्यूटर अधिक सही परिणाम, मेमोरी और गति प्रदान करते हैं। ये
कंप्यूटर टेक्स्ट, ग्राफिक्स और चित्रों के आधार पर आउटपुट देते हैं।
हाइब्रिड कंप्यूटर (Hybrid computers)
हाइब्रिड कंप्यूटर वह कंप्यूटर होता है जिसमें अनालॉग कंप्यूटर और
डिजिटल कंप्यूटर के सबसे अच्छे गुणों को मिलाकर बनाया जाता है। अनालॉग
कंप्यूटर में सिस्टम को नियंत्रित करने के लिए एक ही पल में दिशा-निर्देश
प्राप्त होते हैं। हाइब्रिड कंप्यूटर में खास मशीनों का उपयोग किया जाता
है ताकि इन कमांडों को डिजिटल कमांड में बदला जा सके। इंटरनेट मॉडेम इसी
प्रकार की मशीनों में से एक है। हाइब्रिड कंप्यूटर अनालॉग सिग्नल को
डिजिटल सिग्नल में और डिजिटल सिग्नल को अनालॉग सिग्नल में बदलने का काम
करता है। इसका उपयोग पेट्रोल पंप पर किया जाता है, जो ईंधन की मात्रा और
कीमत को मापता है। यह कंप्यूटर बाइनरी नंबर (0, 1) के साथ अनालॉग सिग्नल को
भी समझता है।
Components of Computer in Hindi
– कंप्यूटर के घटक
कंप्यूटर के घटक (components) कंप्यूटर के वे भाग होते हैं जिनकी
मदद से कंप्यूटर अपना सारा काम करता है. जिस प्रकार मनुष्य अपने काम
को करने के लिए अपने शरीर के अंगों का इस्तेमाल करता है उसी प्रकार
कंप्यूटर भी अपने components (घटकों) का इस्तेमाल अपने कार्य को
पूरा करने के लिए करता है.
कंप्यूटर के मुख्य रूप से 5 घटक होते हैं जिनके बारें में नीचे दिया
गया है:-
1. Input Unit (इनपुट यूनिट)
2. Output Unit (आउटपुट यूनिट)
3. Memory Unit (मेमोरी यूनिट)
4. Control Unit (कंट्रोल यूनिट)
5. ALU (ए.एल.यू)
1- Input Unit (इनपुट यूनिट)
इनपुट यूनिट वह यूनिट होती है जिसका इस्तेमाल यूजर के
द्वारा कंप्यूटर को डेटा और निर्देश देने के लिए किया
जाता है।
इनपुट यूनिट में इनपुट डिवाइस शामिल होते है जिनके
माध्यम से यूजर कंप्यूटर को कमांड या इनपुट देता है और
बदले में आउटपुट प्राप्त करता है।
इनपुट डिवाइस की मदद से यूजर कंप्यूटर के साथ सीधे
इंटरैक्ट करता है और कंप्यूटर को कण्ट्रोल करता है।
इनपुट डिवाइस के कुछ लोकप्रिय उदहारण है – कीबोर्ड, माउस,
जॉयस्टिक, स्कैनर आदि।
बिना इनपुट यूनिट के यूजर कंप्यूटर से आउटपुट प्राप्त
नहीं कर सकता। Input Unit यूजर और कंप्यूटर के बीच एक
माध्यम (medium) की तरह काम करती है।
2- Output Unit (आउटपुट यूनिट)
आउटपुट यूनिट वह यूनिट होती है जो यूजर के द्वारा दिए गए
इनपुट को प्रदर्शित (display) करती है।
आउटपुट यूनिट में आउटपुट डिवाइस शामिल होते हैं जिनका
उपयोग करके यूजर कंप्यूटर से आउटपुट डेटा प्राप्त करता
है।
आउटपुट डिवाइस का कार्य आउटपुट डेटा को यूजर के सामने
प्रदर्शित (display) करना होता है। आउटपुट डिवाइस
कंप्यूटर से डेटा को प्राप्त करते है और उस डेटा को
टेक्स्ट, वीडियो और ऑडियो के फॉरमेट में बदल देते है।
आउटपुट डिवाइस के कुछ लोकप्रिय उदहारण हैं – मॉनिटर,
प्रिंटर, स्पीकर, प्रोजेक्टर और प्लॉटर आदि।
3- Control Unit (कंट्रोल यूनिट)
कंट्रोल यूनिट कंप्यूटर से जुड़े हुए सभी डिवाइसो और
उनके कार्यों को नियंत्रित (control) करती है ताकि
कंप्यूटर के सभी कार्य सही ढंग से हो सके।
कंट्रोल यूनिट कंप्यूटर की सभी प्रक्रियाओं को execute
(निष्पादित) और control (नियंत्रित) करने में मदद करती है।
कण्ट्रोल यूनिट CPU का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जो मुख्य
मेमोरी से निर्देशों को प्राप्त करके उन्हें डिकोड करती
है और इसके बाद इन सभी निर्देशों को execute कर देती है।
कंट्रोल यूनिट को शॉर्ट फॉर्म में CU कहा जाता है.
कंट्रोल यूनिट के दो प्रकार के होते हैं – पहला Hardwire
CU और दूसरा Micro-programmable CU.
4- Memory Unit (मेमोरी यूनिट)
मेमोरी यूनिट का इस्तेमाल कंप्यूटर में डेटा और
निर्देशों को स्टोर करने के लिए किया जाता है। यह
कंप्यूटर के डेटा को स्टोर करने में मदद करता है।
मेमोरी यूनिट दूसरे अन्य यूनिट की आवश्यकताओं के अनुसार
उन्हें डेटा प्रदान करती है। मैमोरी यूनिट को प्राइमरी
स्टोरेज, मुख्य मेमोरी, या इंटरनल स्टोरेज के नाम से भी
जाना जाता है।
कंप्यूटर में दो प्रकार की मेमोरी होती है पहली Primary
memory (प्राइमरी मेमोरी) और दूसरी secondary memory
(सेकेंडरी मेमोरी).
Primary Memory (प्राइमरी मेमोरी)
प्राइमरी मेमोरी वह मेमोरी होती है जिसे सीपीयू सीधे (direct) एक्सेस
कर सकता है। प्राइमरी मेमोरी को Internal (आंतरिक) मेमोरी भी कहा जाता
है क्योंकि यह CPU के अंदर मौजूद होती है।
प्राइमरी मेमोरी कंप्यूटर की main memory होती है जिसका इस्तेमाल
CPU के द्वारा प्रोसेस किए गए डेटा और निर्देशों को स्टोर करने के
लिए किया जाता है।
प्राइमरी मेमोरी की स्टोरेज क्षमता बहुत कम होती है जिसके कारण यह
बहुत कम मात्रा में डेटा को स्टोर कर पाती है।
प्राइमरी मेमोरी चार प्रकार की होती है-
1. RAM
2. ROM
3. Flash memory
4. Cache memory
Secondary Memory (सेकेंडरी मेमोरी)
सेकेंडरी मेमोरी वह मेमोरी होती है जिसे सीपीयू सीधे (direct) एक्सेस
नहीं कर सकता। सेकेंडरी मेमोरी की स्टोरेज छमता अधिक होती है जिसके
कारण यह ज्यादा मात्रा में डेटा को स्टोर कर सकती है।। यह वीडियो,
इमेज, ऑडियो, और फाइल आदि को स्टोर करती है
सेकेंडरी मेमोरी को External (बाहरी) मेमोरी भी कहा जाता है क्योंकि
इसे कंप्यूटर में अलग से जोड़ा जाता है.
सेकेंडरी मेमोरी के प्रकार निम्नलिखित हैं:-
1. हार्ड डिस्क
2. मैग्नेटिक डिस्क
3. मैमोरी कार्ड
4. पेन ड्राइव
5. फ्लॉपी डिस्क
6. डीवीडी (DVD)
7. सीडी (CD)
8. फ़्लैश ड्राइव
5- ALU (ए.एल.यू)
ALU का पूरा नाम Arithmetic Logic Unit (अर्थमेटिक लॉजिक
यूनिट) है। इसका इस्तेमाल अंकगणितीय (Arithmetic) और
तार्किक (logic) कार्यों को करने के लिए किया जाता है।
अंकगणित कार्य में गुणा (×), भाग ((÷), जोड़(+), घटाना (-)
जैसे कार्य शामिल होते है और लॉजिक कार्य में डेटा का चयन
करना, दो संख्याओं की तुलना करना आदि कार्य शामिल होते
हैं।
ALU कठिन से कठिन गणनाओ को हल करने में सक्षम होता है। एक
सीपीयू में एक से अधिक ALU हो सकते है।
ALU को कंप्यूटर का गणितीय मस्तिष्क (mathematical brain)
भी कहते है क्योंकि यह गणित की गणनाओं को आसानी से कर सकता
है।
Applications of Computer in Hindi
– कंप्यूटर के अनुप्रयोग
कंप्यूटर ने आज के समय में लोगो के काम को बहुत ज्यादा मात्रा में
आसान बना दिया है। जहां पर computer आने से पहले लोगो को किसी काम को
करने में बहुत ज्यादा समय लगता था। तो वही कंप्यूटर आ जाने के बाद
उसी काम को करने में कुछ ही समय लगता है।
आज के समय में कंप्यूटर का इस्तेमाल निम्नलिखित जगहों पर किया जाता
है-
1- Home (घरों में)
computer का इस्तेमाल घरो में बहुत से कामो को पूरा करने के लिए किया
जाता है। जैसे ऑनलाइन बिल भरने के लिए , गेम खेलने और मूवी देखने के
लिए आदि।
इसके अलावा भी घरों में बहुत सारें ऐसे काम होते है जहां पर इसका use
किया जाता है। जैसे कि- इंटरनेट का इस्तेमाल करने के लिए ,ऑनलाइन
study (पढ़ाई) के लिए आदि।
बच्चे घरों में रखे computer की मदद से अच्छे से study (पढ़ाई) कर
पाते है। क्योकि इसके साथ study करना काफी ज्यादा आसान होता है।
2- Medical (स्वास्थ्य) के क्षेत्र में
कंप्यूटर ने medical के क्षेत्र में एक क्रांति ला दी है। क्योंकि
कंप्यूटर से मरीज की बीमारी का पता लगाना बहुत आसान हो गया है।
डॉक्टर कंप्यूटर का इस्तेमाल मरीज का ultrasound (अल्ट्रासाउंड),
ब्लड टेस्ट, CT स्कैन और MRI आदि के लिए करते हैं।
इसके अलावा इसका इस्तेमाल diagnosis (निदान) करने, X-ray करने, औऱ मरीज
को मॉनिटर करने के लिए किया जाता है।
बड़े बड़े hospital में आप लोगो ने देखा होगा कि computer की मदद से
patients (मरीज) की heartbeat (हृदय गति) को मापा जाता है।
3- Science and Engineering
(विज्ञान और इंजीनियरिंग) के क्षेत्र में
विज्ञान और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में सुपर कंप्यूटर का इस्तेमाल
किया जाता है। विज्ञान में नयी रिसर्च को करने में सुपर कंप्यूटर
बहुत उपयोगी है।
इसके साथ-साथ मौसम का पूर्वानुमान लगाने और भूकंप की तीव्रता को
मापने के लिए भी इसका प्रयोग किया जाता है।
वैज्ञानिक और इंजीनियर कंप्यूटर का इस्तेमाल data को इक्कठा करने,
analyze करने, और store करने के लिए करते हैं। जिससे की नयी
टेक्नोलॉजी का निर्माण किया जा सके।
कंप्यूटर की पीढियां क्या है?
कंप्यूटर लैंग्वेज क्या है?
4- Industry (उद्योग) के क्षेत्र में
कंप्यूटर का इस्तेमाल उद्योग में बहुत सारें कामों को करने के लिए
किया जाता है जैसे कि – inventory को मैनेज करने के लिए, इंटीरियर
डिज़ाइन के लिए, प्रोडक्ट के sample को डिज़ाइन करने के लिए, और
वीडियो conference करने के लिए आदि।
computer ने online marketing को काफी हद तक आसान बना दिया है।
पिछड़े छेत्र में जहां पर सामान (product) नहीं पहुंच पाया करते थे।
computer इन इस बड़ी समस्या को सुलझा दिया है। इसकी मदद से अब हर
छोटे बड़े छेत्र में marketing की जा सकती है और सामान को आसानी से
पहुंचाया जा सकता है।
इसकी वजह से share market में शेयर को खरीदना और बेचना काफी आसान ही
गया हैं अब हम घर बैठे शेयर को खरीद और बेच सकते हैं।
5- Government (सरकारी) क्षेत्र में–
आजकल computer का इस्तेमाल सभी सरकारी कामो को पूरा करने के लिए भी
किया जाता है। आज सरकार की ऐसी कोई संस्था नही है जहां कंप्यूटर का
use ना किया जाता हो।
पुलिस स्टेशन से लेकर मिसाइल को टेस्ट करने तक सभी इसका प्रयोग करते
है।
computer में लगभग सारा काम हो जाता है जिससे कागज को कम इस्तेमाल
करना पड़ता है। इसमें फ़ाइल pdf या docks के form में होती है। जिसकी
मदद से कागज की बर्बादी बचती है।
सरकार लोगों का data कंप्यूटर के अंदर ही save करके रखती है। जिससे
कि बाद में उसे आसानी से एक्सेस किया जा सके। जैसे आधार कार्ड की सभी
जानकारी हम कंप्यूटर के द्वारा प्राप्त कर सकते हैं।
6- Banking (बैंक) के क्षेत्र में–
Banking के छेत्र में इसका उपयोग लोगो के पैसे निकालने और जमा करने
के लिए किया जाता है। उदहारण के लिए ATM मशीन। यह भी एक तरह का
computer ही है जो आपके command (निर्देश) के अनुसार आपके पैसे
बैंक में जमा भी करता है और बैंक से पैसे निकालता भी है।
अब तो online का जमाना है। computer ने लोगो को और भी ज्यादा digital
बना दिया है। जिसकी मदद से लोग घर बैठे ही अपने पैसे एक जगह से दूसरी
जगह transfer कर सकते है।
यह कंप्यूटर की advance technology की वजह से संभव हो पाया है। यानी
कह सकते है computer ने लोगो को digital transaction की connectivity दी
है।
7- Training (प्रशिक्षण) के क्षेत्र में –
कई ऐसे organization (संगठन) है जो computer का use करके अपने
कर्मचारियों को training देते है। क्योंकि इससे कोई भी व्यक्ति
वीडियो को देखकर और आवाज को सुनकर बहुत तेजी से और आसानी से सीख पाता
है।
अगर organization बिना computer के use के training देते है। तो उसमे
काफी ज्यादा पैसा खर्च होता है। यानी हम कह सकते है की training के साथ
साथ computer पैसो की बचत भी करता है।
इसके अलावा इसका इस्तेमाल कंपनी में video conferencing या video कॉल
करने के लिए भी किया जाता है।
जैसे company के किसी कर्मचारी को meeting के लिए दूसरी जगह जाना
पड़ता है। तो ऐसे में video conferencing के जरिए वह कर्मचारी
company में बैठे बैठे meeting कर सकता है। जिससे उसके आने जाने में
लगने वाला समय और पैसा दोनों बचेगा।
8- Arts (कला) के क्षेत्र में
इसका प्रयोग dance (नृत्य) में, फोटोग्राफी में, चित्र बनाने और
culture (संस्कृति) के छेत्र में किया जाता है। जैसे किसी की तस्वीर
को बनाना , वीडियो को edit करना, फ़ोटो को एडिट करना आदि।
Dance की वीडियो को कंप्यूटर में हम आसानी से save कर सकते है और उस
dance की वीडियो को edit भी आसानी से कर सकते हैं।
आज के computer और भी ज्यादा modern और advance हो गए। जिसकी मदद से
अब video को edit करना , photo बनाना और भी ज्यादा आसान हो गया है।
9- entertainment (मनोरंजन) के क्षेत्र में
computer का उपयोग लोग online फिल्मे देखने , online गेम खेलने और
song सुनने के लिए भी करते है। आज के समय में इसका सबसे ज्यादा उपयोग
entertainment के लिए ही किया जाता है।
video कैसी भी हो , गेम कैसा भी हो अगर आपके पास computer system है।
तो आप इन सभी चीज़ो को आसानी से देख पाएंगे, सुन पाएंगे और खेल
पाएंगे।
10- education (शिक्षा) के क्षेत्र में
शिक्षा चाहे छोटे level (स्तर) की हो या फिर बड़े level की computer ने
हमेशा education को बढ़ावा दिया है।
कोरोना काल में सभी स्कूल और कॉलेज बन्द हो चुके थे। तब सभी छात्र
कंप्यूटर की मदद से पढ़ते थे।
आज के समय में दुनिया के हर कोने में online शिक्षा दी जा रही है।
जिसमे computer की बहुत बड़ी भूमिका है। आज के समय के ज्यादातर
student computer के द्वारा ही शिक्षा प्राप्त करते है।
11- Business (व्यापार) में
Computers का प्रयोग सामान को online खरीदने और बेचने के लिए भी किया
जाता है। online product खरीदने और बेचने का एक फायदा यह भी है कि
व्यापारी और customer दोनों direct एक दुसरे से जुड़ पाते है और
कस्टमर को खुद दुकान में जाने की जरूरत नही पड़ती। सामान घर मे पहुंच
जाता है।
इसके कारण व्यापारी और customer दोनों के पैसे काफी हद तक बच जाता
है। देखा जाये तो computer व्यापारियों और ग्राहकों के लिए भी
फायदेमंद है।
12- marketing (मार्केटिंग) के क्षेत्र में
computer की मदद से हम आसानी से market को समझ सकते है। जैसे market
में किस product की demand ज्यादा है , future में किस product की
demand रह सकती है
और भी बहुत कुछ।
इसके अलावा आप computer की मदद से किसी website या social media में
अपने product का प्रचार (advertisement) कर सकते है।
इनपुट डिवाइस क्या है – What is Input
Device in Hindi
Input Device एक ऐसी Electronic Device है जिसके द्वारा हम डिवाइस
में डेटा इनपुट करने व निर्देशों (instruction) को प्रदान करने के लिए
किया जाता है। यह Computer का एक हिस्सा है। हम जिस किसी भी Device
के द्वारा कंप्यूटर में कुछ भी Input करते हैं, उसे Input device कहा
जाता है।
कंप्यूटर के इनपुट डिवाइस
कंप्यूटर को चलने के लिए बहुत सारे इनपुट डिवाइस की जरुरत पड़ती है।
अब इन सब के बारे में एक–एक करके जानते हैं।
Keyboard
यह सबसे प्रमुख Input device है। इसी के मदद से हम Computer के सारे
लिखने वाले काम कर सकते हैं। सबसे ज्यादा इस्तमाल किए जाने वाले
devices में से यह एक है। इसकी मदद से हम कुछ भी लिख सकते हैं।
आप जो अभी पढ़ रहे हैं वो भी इसी के Keyboard से लिखा गया है।
जैसे की email भेजना, messages भेजना, online transfer करना, online
shopping करना और अन्य कामों में हम इसे इस्तमाल करते हैं। इन सभी
कामों में हमें Keyboard की जरुरत पड़ती है।
Mouse
इसे pointing device और Cursor Moving Device के नाम से भी जाना जाता
है। एक Mouse में 2 या 3 buttons हो सकते हैं। जेसे की Left, Right और
मध्य button (Left key, Right key, Middle key Roller)।
इस Mouse के इस्तमाल से Computer में Graphical User Interface का
महत्व बढ़ गया है। Mouse को Flat Surface पे या Mouse Pad पे रखा जाता
है। Cursor को Control करने के लिए इसका इस्तमाल किया जाता है।
Joystick
Joystick एक input device है। Trackball की तरह कार्य करता है। इसमें दो
Ball होते हैं। balls के साथ एक छड़ी लगा दी जाती है जिससे ball को आसानी
से घुमाया जा सकता है। इसका उपयोग video games खेलने, CAD Design व्
simulator प्रशिक्षण आदि में किया जाता है।
जब हम इसे Left में Move करते हैं तो अंदर से Right की और Move करता
है। उपर वाला ball Direction के लिए किया जाता है और अंदर का ball,
Socket में Move करता है।
Light Pen
इसका आकार पेन के जैसा होता है। यह एक Printing device और Pointing
Device है। इसकी सहायता से computer screen पर लिखा जा सकता है।
चित्र बनाया जा सकता है, bar code को पढ़ा जा सकता है।
इस Pen के छोटी सी Tube के अंदर Photocell और Optical System मोजूद
रहता है।
Scanner
Scanner का प्रयोग करके लिखित कागजात और तस्वीरों को digital चित्र
में परिवर्तित कर memory में सुरक्षित रखा जा सकता है। Scanner के
जरिये documents को भी scan कर कंप्यूटर में स्टोर किया जा सकता है।
इन Digital चित्र पर computer द्वारा processing भी किया जा सकता है।
Processing मतलब Scan किए गए Document को Edit कर सकते हो।
Microphone
यह भी एक Input Device है। Souds को Digital Form में Convert करके
Store करता है। जैसे आप Audio Recorder और Voice Recorder को इस्तमाल
करते है।
इनका application बहुत ज्यादा है Video Recording, Movies बनाने में इन
Microphone का बहुत योगदान है। Sound को Receive करता है Digital
Signal में Convert करता है और Speaker के जरिये Output भी करता हैं।
Output device in Hindi
– आउटपुट डिवाइस क्या है?
Output device एक ऐसी डिवाइस होती है जिसका काम आउटपुट
देने का होता है।
आउटपुट डिवाइस वह डिवाइस होती है जिसका
इस्तेमाल कंप्यूटर से मिलने वाले परिणाम को दिखाने के
लिए किया जाता है।
इनपुट डिवाइस के द्वारा दिये गए इनपुट को कंप्यूटर में
display (प्रदर्शित) करना output device का कार्य है।
दूसरे शब्दों में कहें तो, “आउटपुट डिवाइस एक हार्डवेयर
है जो कि data को प्राप्त करता है और उस data को दूसरे रूप
में बदल देता है।”
आउटपुट डिवाइस इनपुट डिवाइस का उल्टा होता है। इनपुट
डिवाइस के द्वारा कंप्यूटर को data भेजा जाता है जबकि
आउटपुट डिवाइस कंप्यूटर से डाटा को प्राप्त करता है।
Output device वह डिवाइस होता है जो computer से डाटा को
प्राप्त करके उस डाटा को Text , वीडियो और ऑडियो के form
(रूप) में बदल देता है।
Output device के कुछ अच्छे उदहारण है – मॉनिटर (monitor),
प्रोजेक्टर (projector) , हेडफ़ोन, स्पीकर, और प्रिंटर आदि।
Types of Output Device in Hindi –
आउटपुट डिवाइस के प्रकार
इसके बहुत सारें प्रकार होते हैं जो कि नीचे दिए गए हैं-
1. Monitor (मॉनिटर)
2. Printer (प्रिंटर)
3. Plotter (प्लॉटर)
4. Projector (प्रोजेक्टर)
5. Speaker (स्पीकर)
6. Headphone (हैडफ़ोन)
7. Sound Card (साउंड कार्ड)
8. Video Card (विडियो कार्ड)
9. GPS (जीपीएस)
10. Speech Synthesizer (स्पीच सिंथेसाइज़र)
Monitor (मॉनिटर क्या है?)
मॉनिटर कंप्यूटर का एक प्रमुख आउटपुट डिवाइस है। इसे कभी-
कभी visual display unit (VDU) भी कहा जाता है।
मॉनिटर वीडियो, ऑडियो, इमेज और text को कंप्यूटर में
दिखाता है।
यह एक TV की तरह ही होता है परंतु इसका resolution
टेलीविज़न (TV) से अधिक होता है।
1 मार्च 1963 को सबसे पहले कंप्यूटर मॉनिटर को विकसित
किया गया था।
जब monitor किसी डाटा को अपनी screen में डिस्प्ले करता है
तो उस डाटा को pixel के रूप में जाना जाता है।
मॉनिटर का चित्र
मॉनिटर के प्रकार
मॉनिटर 6 प्रकार के होते हैं –
1. Cathode Ray Tube (CRT) Monitor
2. Flat Panel Monitor
3. Touch screen monitor
4. LED Monitor
5. OLED Monitor
6. DLP Monitor
1 – Cathode Ray Tube (CRT) Monitors –
CRT Monitor स्क्रीन पर चित्र को दिखाने के लिए electronic beam का
इस्तेमाल करते है। इस इलेक्ट्रॉनिक बीम के अंदर एक प्रकार की gun
(बंदूक) होती है। जो इलेक्ट्रॉनिक किरणों को आग लगाने में मदद करती
है। जिसके कारण इलेक्ट्रॉनिक किरणे मॉनिटर की सतह पर बार बार टकराती
है।
इलेक्ट्रॉनिक किरणों के सतह पर टकराने की वजह से मॉनिटर में अलग-अलग
प्रकार के रंग पैदा होते है और इन्ही रंगो के कारण मॉनिटर में इमेज
या वीडियो display होती है।
2. Flat Panel Monitors
फ्लैट पैनल मॉनिटर में बहुत ही पतले (Thin) पैनल का इस्तेमाल किया
जाता है।
ये मॉनिटर वजन में काफी हल्के होते है और इनको रखने के लिए कम जगह की
आवश्यकता होती है। हल्के होने की वजह से इस मॉनिटर को हम अपने साथ
कहीं भी आसानी से ले जा सकते हैं।
CRT मॉनिटर की तुलना में flat panel monitor बहुत कम बिजली का
इस्तेमाल करते हैं।
ये मॉनिटर रेडिएशन (radiation) के मामले में भी काफी अच्छे होते है।
क्योकि ये नुकसान दायक radiation उत्पन्न नहीं करते।
CRT की तुलना में ये monitor थोड़े महंगे होते है।
फ्लैट पैनल मॉनिटर का उपयोग TV,, computer, और मोबाइल फ़ोन की
स्क्रीन में किया जाता है।
3– Touch Screen Monitors
टच स्क्रीन मॉनिटर को इनपुट और आउटपुट दोनों डिवाइस के रूप में जाना
जाता है। क्योकि टच स्क्रीन मॉनिटर में हम बिना किसी keyboard और
mouse के कंप्यूटर को input दे सकते है।
इस मॉनिटर में हम स्क्रीन को touch करके किसी भी program को आसानी से
open कर सकते है और फिर उसमें काम कर सकते हैं।
4 – LED Monitors
LED monitor फ्लैट पैनल मॉनिटर की तरह वजन में हल्के होते है।
LED monitor का उपयोग लैपटॉप, मोबाइल फोन, टीवी, कंप्यूटर, और टैबलेट
के लिए किया जाता है।
इसका अविष्कार James P. Mitchell ने किया था। इसके अलावा यह ज्यादा
expensive (महंगा) नहीं होता। इसको maintain करके रखना काफी ज्यादा
आसान होता है।
5 – OLED Monitors
OLED का पूरा नाम Organic Light Emitting Diode है। OLED मॉनिटर एक
नया मॉनिटर है जिसमें बहुत अच्छे Color दिखते हैं और यह मॉनिटर बहुत
पतला होता है।
यह मॉनिटर यूज़र को एक बेहतर experience देता है। इसका उपयोग
smartphone और tablet की स्क्रीन बनाने के लिए किया जाता है।
6– DLP Monitor
DLP monitor को डिजिटल लाइट प्रोसेसिंग भी कहा जाता है। DLP monitor
का इस्तेमाल बड़ी स्क्रीन में चित्रों को display करने के लिए किया
जाता है।
मॉनिटर के नुकसान –
1. कुछ ऐसे monitor होते हैं जो radiation (रेडिएशन) पैदा करते
हैं जो कि स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है।
2. कुछ monitors को maintain करके रखना काफी ज्यादा मुश्किल
होता है।
3. मॉनिटर का price (मूल्य) ज्यादा होता है।
4. मॉनिटर को रखने के लिए ज्यादा space (जगह) की जरूरत होती
है।
Printer (प्रिंटर क्या है?)
प्रिंटर एक output device है जिसके द्वारा हम कंप्यूटर में
मौजूद text और image को कागज में प्रिंट कर सकते हैं।
यह एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है जो कंप्यूटर की soft copy को
hard copy में बदलने का काम करता है।
प्रिंटर का
चित्र
प्रिंटर के प्रकार
प्रिंटर के 5 प्रकार होते हैं –
1 – Laser Printer (लेज़र प्रिंटर)
Laser printer का इस्तेमाल कागज में text और images को प्रिंट करने के
लिए किया जाता है।
लेज़र प्रिंटर कागज में text और images प्रिंट करने के लिए laser light
का इस्तेमाल करता है।
लेज़र प्रिंटर के अंदर सिलिंडर के आकार का एक drum मौजूद होता है।
जिस ड्रम को Photoreceptor के रूप में जाना जाता है।
2 – Photo printer (फ़ोटो प्रिंटर)
Photo printer के द्वारा बहुत ही ज्यादा हाई क्वालिटी की डिजिटल
फ़ोटो को प्रिंट कर सकते हैं।
इसका इस्तेमाल photo paper के ऊपर फ़ोटो को प्रिंट करने के लिए किया
जाता है। फोटो पेपर दिखने में बिलकुल सफेद रंग के होते है।
Photo printer में इस्तेमाल किये जाने वाले फोटो पेपर के ऊपर एक लेयर
होती है। जो बिलकुल oily (चिकनी) होती है। फोटो प्रिंटर के द्वारा सभी
आकार की फ़ोटो को प्रिंट किया जा सकता है।
3- Color Printer (कलर प्रिंटर)
कलर प्रिंटर CMYK कलर मॉडल पर आधारित होता है। CMYK कलर मॉडल के
अंदर चार प्रकार के रंग शामिल होते है – Cyan (सियान), Magenta
(मजेंटा), Yellow (पीला) और Black (काला).
CMYK मॉडल इन सभी रंगो को एक दूसरे के साथ प्रिंट करता है। कलर
प्रिंटर एक से ज्यादा रंगो को प्रिंट करने की क्षमता रखते है।
Color printer का इस्तेमाल ज्यादातर किताबो , कागज सामग्री और
पत्रिकाओं की छपाई के लिए किया जाता है।
4- Inkjet Printer (इंकजेट प्रिंटर)
इंकजेट प्रिंटर एक ऐसा प्रिंटर है जिसमें किसी कागज में print करने
के लिए ink (स्याही) का इस्तेमाल किया जाता है।
इंकजेट प्रिंटर का इस्तेमाल हाई क्वालिटी छपाई के लिए किया जाता है।
इंकजेट प्रिंटर output देने में ज्यादा समय का वक़्त नहीं लगाते है।
इंकजेट प्रिंटर ज्यादा expensive (महँगे) नहीं होते।
5- Digital Printer (डिजिटल प्रिंटर)
डिजिटल प्रिंटर का इस्तेमाल डिजिटल फाइल्स को प्रिंट करने के लिए
किया जाता है। जो फाइल TIFF, PDF etc के फॉर्मेट में होती है।
डिजिटल प्रिंटर में printing plate की ज़रूरत नहीं पड़ती। डिजिटल
प्रिंटर paper, fabric, canvas, और cardstock पर डाटा को सीधे प्रिंट कर
देता है।
डिजिटल प्रिंटर का उपयोग दूकान , बिज़नेस कार्ड , और letterheads के
लिए किया जाता है।
Advantages of Printer in Hindi – प्रिंटर के फायदे
1. प्रिंटर की मदद से data को हार्डकॉपी में print कर सकते है।
2. यह text, फ़ोटो और ग्राफिवस को किसी भी size में प्रिंट
करने की छमता रखता है।
3. इसकी मदद से डाटा को आसानी से समझा और पढ़ा जा सकता है।
Disadvantage of Printer in Hindi – प्रिंटर के नुकसान
1. प्रिंटर काफी ज्यादा expensive (महँगे) होते है। इसके
अलावा प्रिंटर को maintain करके रखने में काफी ज्यादा
पैसे खर्च होते है।
2. इसमें पेपर waste (बर्बाद) भी होता है। क्योकि इसके
द्वारा कुछ डाटा सही तरीके से प्रिंट नहीं हो पाता। जिसकी
वजह से पेपर के बर्बाद होने का खतरा बना रहता है।
Plotter (प्लॉटर क्या है?)
प्लॉटर एक ऐसी आउटपुट डिवाइस है जो high quality
के ग्राफ़िक्स को प्रिंट करने में मदद करता है।
Plotter के अंदर अलग अलग प्रकार के रंग होते है।
प्लॉटर printer की तरह ही काम करता है। लेकिन इसमें हाई
क्वालिटी के ग्राफ़िक्स को प्रिंट करने की छमता होती है।
इसके अलावा plotter का इस्तेमाल 3D पोस्टर , 3D इमेज , 3D
डिज़ाइन प्रिंट करने के लिए भी किया जाता है।
प्लॉटर का चित्र
Types of Plotter in Hindi
– प्लॉटर के प्रकार
1 – Drum Plotter (ड्रम प्लॉटर)
Drum plotter को roller plotter भी कहते हैं। इसमें एक drum या roller
होता है जिसमें paper (कागज़) को रखा जाता है।
इसमें drum कागज को दायीं और बायीं तरफ घुमाता है। परन्तु इसमें
प्रिंटिंग का काम pen करती है।
2 – Flat Bed Plotters
Flat bed plotter एक ऐसा ग्राफ़िक्स प्लॉटर है जिसमें कागज को flat
surface (सपाट सतह) पर रखा जाता है। इसमें surface का size जितना बड़ा
होगा उतना ही बड़ा drawing का साइज होगा।
कुछ flatbed plotter ऐसे होते है जो पेपर की बजाय कार्डबोर्ड,
प्लास्टिक और metal (धातु) में भी प्रिंट करते हैं।
इसमें graphics और pictures को draw करने के लिए pen का इस्तेमाल किया
जाता है।
Flat bed plotter का इस्तेमाल चमकदार और रगीन ग्राफ़िक्स बनाने के लिए
किया जाता है। इसके लिए इसमें अलग-अलग रंगो का इस्तेमाल किया जाता
है।
3 – Ink Jet Plotters
Inkjet plotter सबसे ज्यादा प्रयोग किया जाने वाला प्लॉटर है। इसकी
खासियत यह है कि इसमें high quality में प्रिंट कर सकते हैं।
इस प्लॉटर में, image या graphics को प्रिंट करने के लिए कागज में ink
की छोटी-छोटी बूंदे डाली जाती है।
इस प्लॉटर का इस्तेमाल बहुत बड़े-बड़े banner और billboard को बनाने
के लिए किया जाता है।
इंकजेट प्लॉटर में प्रिंटिंग के लिए चार रंगो (Cyan, magenta,
yellow और black) का इस्तेमाल किया जाता है। क्योकि इंकजेट प्लॉटर के
पास चार प्रकार के कलर ही उपलब्ध है।
इंकजेट प्लॉटर की स्याही बिलकुल पानी की तरह पतली होती है। जिसके
कारण प्रिंटिंग करते वक़्त कागज ज्यादा भारी नहीं होता। कहने का
मतलब है की स्याही बिलकुल हल्की होती है जिसके कारण प्रिंट की हुई
चीज़ कागज के उपर बिलकुल हल्के हो जाते है।
Advantage of Plotter in Hindi – प्लॉटर के फायदे
1. प्लॉटर high quality के ग्राफ़िक्स और image बनाने में मदद
करता है।
2. यह उच्च स्तर का resolution प्रदान करता है।
3. इसमें यूजर को ग्राफ़िक्स या इमेज प्रिंट करने के लिए
ज्यादा option मिल जाते है।
Disadvantage of Plotter in Hindi – प्लॉटर के नुकसान
1. इसमें मैमोरी बहुत कम होती है।
2. printer की तुलना में plotter काफी ज्यादा expensive (महँगे)
होते है।
Projector (प्रोजेक्टर क्या है?)
Projector एक तरह का output डिवाइस है जो वीडियो या चित्र को
बड़े स्क्रीन या दीवार में display करने में मदद करता है।
सरल शब्दो में कहे तो “प्रोजेक्टर एक ऑप्टिकल डिवाइस है
जिसके द्वारा हम वीडियो या इमेज को बहुत बड़े साइज में
दिखा सकते है।”
इसका इस्तेमाल कॉलेज में बहुत सारें students को पढ़ाने
के लिए किया जाता है। जिससे कि सारें students वीडियो को
देख पाए।
प्रोजेक्टर का चित्र
Types of projector in Hindi
– प्रोजेक्टर के प्रकार
1. 4K projector
4K प्रोजेक्टर की मांग मार्किट में सबसे ज्यादा होती है। क्योकि यह
प्रोजेक्टर काफी ज्यादा लोकप्रिय होते है।
4K projector को Bluetooth, Wi-Fi, और USB की मदद से कंप्यूटर के साथ
जोड़ा जा सकता है।
4K प्रोजेक्टर DLP टेक्नोलॉजी पर आधारित है। इसके अलावा इन
प्रोजेक्टर का वजन लगभग 865 ग्राम के आस पास होता है। 4K projector को
चलाने के लिए बैटरी की ज़रूरत नहीं पड़ती।
[Link] projector
LED projector को मोबाइल , लेपटॉप जैसे डिवाइस के साथ आसानी से
connect किया जा सकता है।
LED प्रोजेक्टर स्क्रीन को डिस्प्ले करने के लिए LED लाइट का
इस्तेमाल करते है। जिसके कारण इमेज और वीडियो high quality की दिखाई
देती है।
इसके अलावा LED प्रोजेक्टर को remote के द्वारा भी कण्ट्रोल किया
जा सकता है। और इस प्रोजेक्टर के अंदर एक छोटे पंखे को लगाया जाता
है। जो LED प्रोजेक्टर को गर्म नहीं होने देता।
[Link] projector
LCD projector को slide और overhead प्रोजेक्टर के रूप में भी जाना
जाता है। यह प्रोजेक्टर सपाट सतह पर वीडियो और चित्र को display करता
है।
यह किसी इमेज या वीडियो को दिखाने के लिए liquid crystal का इस्तेमाल
करता है।
LCD प्रोजेक्टर को maintain करके रखना पड़ता है और समय समय पर इस
प्रोजेक्टर को filter की ज़रूरत पड़ती है।
[Link] Projector
Nebula Projector को mini प्रोजेक्टर के रूप में भी जाना जाता है।
क्योकि यह एक छोटा portable प्रोजेक्टर है।
यह प्रोजेक्टर wireless होता है। यानी बिना किसी USB डिवाइस की मदद
के बिना nebula प्रोजेक्टर को कंप्यूटर के साथ connect किया जा सकता
है।
इसके अलावा यह प्रोजेक्टर hd स्क्रीन डिस्प्ले करने की छमता रखता
है। Nebula projector वजन में काफी ज्यादा हल्के होते है।
[Link] Projector
light projector को इमेज और वीडियो को प्रोजेक्ट करने के लिए नहीं किया
जाता। बल्कि इस प्रोजेक्टर का इस्तेमाल घर की सजावट के लिए किया
जाता है। यानी लाइट प्रोजेक्टर की रौशनी के कारण घर को सजाया जा सकता
है।
पुराने समय में लाइट प्रोजेक्टर के अंदर speaker और voice control की
सुविधा नहीं होती थी। लेकिन लाइट प्रोजेक्टर के नए version में
speaker और voice control की सुविधा उपलब्ध है।
इसके अलावा लाइट प्रोजेक्टर में चमक को कण्ट्रोल किया जा सकता है।
यानी user अपने अनुसार लाइट को set कर सकता है।
Advantage of Projector in Hindi – प्रोजेक्टर के फायदे
1- projector छोटे आकार वाली images और video को बड़े आकार में
डिस्प्ले करने की छमता रखता है।
2- प्रोजेक्टर की मदद से student आसानी से किसी भी concept को समझ
सकता है।
3- इसमें हम अपनी इच्छा अनुसार इमेज और वीडियो का size बड़ा छोटा कर
सकते है।
Disadvantages of Projector in Hindi – प्रोजेक्टर के नुकसान
1- इसको maintain करके रखना काफी ज्यादा मुश्किल होता है।
2- इसको चलाने के लिए dark room (अंधेर कमरे) की ज़रूरत पड़ती है।
किसी भी स्थान या कमरे में प्रोजेक्टर को चलाया नहीं जा सकता।
3- इसमें sound के लिए अलग से ऑडियो सिस्टम लगाना पड़ता है।
कंप्यूटर की पीढियां क्या है?
पेरिफेरल डिवाइस क्या है?
Speaker (स्पीकर क्या है?)
Speaker एक आउटपुट डिवाइस है जो sound (ध्वनि) को उत्पन्न
करता है।
स्पीकर को चलाने के लिए sound card की ज़रूरत पड़ती है।
स्पीकर को computer के साथ कनेक्ट करने के लिए ब्लूटूथ ,
USB और wifi का इस्तेमाल किया जाता है।
स्पीकर काफी हल्के डिवाइस होते है जो अलग अलग size में
उपलब्ध है।
स्पीकर का चित्र
Types of Speaker in Hindi
– स्पीकर के प्रकार
1. Portable Bluetooth speaker
यह speaker कंप्यूटर डिवाइस के साथ bluetooth की मदद से कनेक्ट होते
है। इसके अलावा android मोबाइल , लेपटॉप के साथ भी portable bluetooth
speaker को जोड़ा जा सकता है।
यह स्पीकर साइज में काफी छोटे और हल्के होते है। जिसे कोई भी user
किसी भी स्थान पर लेकर जा सकता है।
इसके अलावा पोर्टेबल ब्लूटूथ स्पीकर को कोई भी user अपने bag में
चिपका सकता है। या कहे अपने bag में टांग सकता है।
2. Wireless Speakers
वायरलेस स्पीकर को कंप्यूटर डिवाइस के साथ connect करने के लिए wifi
और bluetooth का इस्तेमाल किया जाता है। वायरलेस स्पीकर साइज में
थोड़े बड़े होते है। इसके अलावा इन स्पीकर का वजन थोड़ा ज्यादा होता
है।
3. Built-in Speakers
Built-in speaker का उपयोग स्टीरियो सेट, टीवी, लैपटॉप और अन्य
electronic डिवाइस में किया जाता है।
यह स्पीकर ज्यादा मात्रा में ध्वनि को उतपन नहीं कर सकते। क्योकि
built in speaker में ध्वनि उतपन करने की एक सीमा होती है। यह स्पीकर
आकार में छोटे होते है और कम वजन वाले होते है।
[Link]
यह कम frequency वाला स्पीकर है। जिसकी आवाज लगभग 80 hertz की है।
Subwoofer में ध्वनि को tracks में capture किया जाता है। subwoofer
को कम bass वाली frequency के लिए डिज़ाइन किया गया है।
[Link]
woofers का उपयोग ज्यादातर home cinema में किया जाता है। woofers
लगभग 80 से 1000 hertz ध्वनि को उतपन करने की छमता रखते है। woofers
इस्तेमाल loudspeaker के रूप में भी किया जाता है।
woofers आकार में बड़े होते है। इसके अलावा वूफर्स बहुत ज्यादा
मात्रा में ध्वनि उतपन कर सकते है। user अपने इच्छा अनुसार ध्वनि को
कम या ज्यादा कर सकता है।
Advantage of speaker in Hindi – स्पीकर के फायदे
1- स्पीकर के द्वारा हम आवाज को आसानी से सुन सकते है।
2- इसकी मदद से एक ही समय मे बहुत सारें लोग आवाज को सुन सकते हैं।
3- इसको लैपटॉप , मोबाइल, या डेस्कटॉप के साथ कनेक्ट करना काफी
ज्यादा आसान होता है।
Disadvantages of Speaker in Hindi – स्पीकर के नुकसान
1- यह बहुत ज्यादा आवाज करते हैं जिससे कुछ लोग इससे परेशान होने
लगते है।
2- इसके कारण बहुत ज्यादा मात्रा में noise pollution (ध्वनि प्रदूषण)
होता है।
3- इसमें कई बार connectivity issues आने लगते है। यानी कई बार ऐसा होता
है की स्पीकर डिवाइस के साथ connect नहीं होता।
4- कुछ ऐसे स्पीकर होते हैं जिनका size काफी बड़ा होता है जैसे कि –
शादी में use होने वाले स्पीकर। इन speakers को किसी एक स्थान पर
लाने में बहुत दिक्कत होती है।
Headphone (हैडफ़ोन क्या है?)
Headphone एक आउटपुट डिवाइस है जिसका इस्तेमाल आवाज या
गानों को सुनने के लिए किया जाता है। इसे कभी-कभी
earphone भी कहा जाता है।
इसका इस्तेमाल एक समय में केवल एक व्यक्ति ही कर सकता है।
इसमें छोटे-छोटे दो स्पीकर लगे होते हैं।
Headphone का आकार काफी ज्यादा छोटा होता है। इसके अलावा
हैडफ़ोन का वजन काफी हल्का होता है। headphone को किसी भी
स्थान में लेकर जा सकते है।
हैडफ़ोन का चित्र
Types of Headphone in Hindi
– हैडफ़ोन के प्रकार
[Link] Back Headphone
Closed back headphone का उपयोग शोर को रोकने के लिए किया जाता है।
यानी user इस headphone का इस्तेमाल बाहरी ध्वनि के बचाव के लिए
करता है।
यह headphone आकार में छोटे होते है। इसके अलावा closed back
headphone ज्यादा expensive (महँगे) नहीं होते।
[Link]-Back Headphones
Open back headphone खुली और हवादार ध्वनि produce करते है। इस
हैडफ़ोन में बाहरी सतह पर छोटे छोटे छेद होते है। जिसके कारण open
back headphone में हवा cross (आर-पार) हो सकती है।
[Link] Ear Headphone
On ear headphone आकार में थोड़े छोटे होते है। इसके अलावा इनका वजन
भी काफी हल्का होता है। ऑन एअर हैडफ़ोन को Supra-aural headphone के
रूप में भी जाना जाता है। यह headphone यूजर के लिए काफी comfortable
होते है। क्योकि दुसरे headphones की तुलना में इसका आकार छोटा
होता है।
Advantage of Headphone in Hindi – हैडफ़ोन के फायदे
1- हैडफ़ोन user को बाहरी ध्वनि यानी शोर शराबे से बचाता है।
2- ये ज्यादा expensive नहीं होते।
3- इसको किसी भी स्थान में लेकर जाया जा सकता है।
Disadvantage of Headphone in Hindi – हैडफ़ोन के फायदे
1- इसकी ध्वनि (sound) सिमित (limited) होती है अर्थात ये ज्यादा तेज
आवाज पैदा नही कर सकते।
2- इसकी वजह से कान में infection होने का खतरा बना रहता है।
3- ज्यादा headphone के उपयोग से कान में दर्द होने लगता है।
Sound card (साउंड कार्ड क्या है?)
साउंड कार्ड एक ऐसी आउटपुट डिवाइस है जिसको कंप्यूटर की
मदरबोर्ड में insert किया जाता है। साउंड कार्ड की मदद से
कंप्यूटर की आवाज को बेहतर बनाया जाता है जिससे कि यूजर
आवाज को आसानी से सुन सके।
साउंड कार्ड का इस्तेमाल ज्यादातर game खेलने, music
सुनने या मूवी देखने के लिए किया जाता है।
Sound card दो प्रकार के होते हैं – Internal और External.
सबसे पहले साउंड कार्ड का अविष्कार 1972 में Sherwin
Gooch ने किया था।
साउंड कार्ड को audio adapter भी कहा जाता है।
साउंड कार्ड का चित्र
Video card (वीडियो कार्ड क्या है?)
वीडियो कार्ड एक output device है जो कि मदरबोर्ड से जुड़ा
रहता है। इसकी मदद से वीडियो और ग्राफ़िक्स की quality को
बढ़ाया जाता है।
वीडियो कार्ड का ज्यादातर इस्तेमाल game खेलने के लिए
किया जाता है।
आजकल के कंप्यूटर में वीडियो कार्ड पहले से ही मौजूद होता
है इसलिए हमें इसे खुद से डालने की जरूरत नही पड़ती।
वीडियो कार्ड बहुत ज्यादा गर्मी पैदा करते हैं इसलिए
इसमें heat sink की जरूरत पड़ती है।
Video card को Graphics card भी कहते हैं।
GPS (जीपीएस क्या है?)
GPS का पूरा नाम global positioning system होता है। यह एक
आउटपुट डिवाइस है जिसकी मदद से डिवाइस की location का पता
लगाया जाता है।
यह रेडियो पर आधारित navigation system है जो किसी location
(स्थान) का पता लगाने के लिए रेडियो सिग्नल का इस्तेमाल
करता है।
GPS में 24 satellite होती है।
आजकल हमारे फ़ोन में google map होता है जिसकी मदद से हम
किसी भी स्थान पर आसानी से जा सकते हैं।
Speech synthesizer
(स्पीच सिंथेसाइज़र क्या है?)
Speech synthesizer एक ऐसी डिवाइस है जो text को speech में
बदल देती है।
Speech synthesizer एक कार्ड होता है। जो कंप्यूटर के साथ
जुड़ा रहता है।
Advantage of Speech synthesizer in Hindi
– स्पीच सिंथेसाइज़र के फायदे
1- इसको इस्तेमाल करने के लिए ज्यादा पैसे खर्च नहीं करने पड़ते।
2- Synthesized Speech डिवाइस को user के द्वारा कण्ट्रोल किया जा
सकता है।
3- यह text को स्पीच में बदलने में ज्यादा समय नहीं लगाता।
स्पीच सिंथेसाइज़र के नुकसान
1- Synthesized Speech डिवाइस में गलतिया होने के chance बने रहते
है।
2. इसमें background की noise को फ़िल्टर करने में परेशानियों का
सामना करना पड़ता है।