विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
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आधारभूत कम््यूटर विज्ञान
कम््यूटर
• कम्प्यटू र शब्द की उत्पत्ति अग्रं जे ी के कम्प्यटू (compute) शब्द से । अर्थ - गणना या त्तगनती करना ।
• कम्प्यटू र में गणना करने की क्षमता के अत्ततररक्त तात्तकथक शत्तक्त एवं मैमोरी का भण्डार होता है तर्ा यह पलक झपकते ही त्तनदेशों का
पालन कर सकता है।
पररभाषा
• कम्प्यटू र एक स्वचात्तलत इलेक्ट्रॉत्तनक मशीन, त्तजसमें हम अपररष्कृ त आंकडे देकर प्रोग्राम के त्तनयंत्रण द्वारा उन्हें अर्थपूणथ सचू नाओ ं में
पररवत्ततथत कर सकते हैं।
• अपररष्कृत आक ं ड़े (Raw data):- सचू ना, आँकडे आत्तद।
• प्रोग्राम :- कम्प्यटू र की त्तकसी त्तवत्तशष्ट भाषा में त्तलखे गए त्तनदेशों के समहू को प्रोग्राम कहते हैं
• अर्थपर् ू थ सच ू नाएँ :- (Meaningfull Information) :-
• कम्प्यटू र प्रोग्राम के माध्यम से प्राप्त होने वाले वे पररणाम हैं त्तजनसे कोई अर्थ त्तनकलता हो तर्ा वे उपयोगी हो ।
कम््यूटर क़े प्रकार :
1. अनुप्रयोि क़े आधार पर ििीकरर् (i) एनालॉग (ii) त्तडत्तजटल (iii) हाइत्तिड कम्प्यटू र
(i) एनालॉि कम््यूटर : ये अक ं ो पर कायथ नहीं करते ।
• भौत्ततक रूप से उपलब्ध डाटा पर सीधे कायथ करते है ।
• भौत्ततक डाटा ताप, दाब, लम्पबाई, त्तवद्यतु या द्रवों का प्रवाह आत्तद भौत्ततक रात्तशयाँ होती है।
• इन कम्प्यटू रो का उपयोग वहाँ त्तकया जाता है जहाँ भौत्ततक रात्तशयों के त्तनरन्तर मापन की आवश्यकता होती है । जैस:े इन्जीत्तनयररंग,
इन्डस्रीज एवं त्तवज्ञान क्षेत्रों में ।
• एनालॉग सक ं े त सतत् होते हैं।
• जैसे: स्पीडोमीटर, घत्तडया,ं र्माथमीटर, वोल्टमीटर आत्तद ।
(ii) विजीटल कम््यटू र :
• ये कम्प्यटू र अक ं ों पर कायथ करते हैं, जो बाइनरी त्तडत्तजट (0 व 1) के रूप में होते हैं।
• सक ं े त असतत होते हैं।
• प्रोसेस होने के बाद डेटा सख्ं या, अक्षर तर्ा सक ं े त में त्तदखते हैं। जैस:े - त्तडत्तजटल वॉच ।
(iii) हाइविि कम््यटू र: इनमें एनालॉग एवं त्तडजीटल दोनों कम्प्यटू रों के गणु ों का समावेश होता है। इसत्तलए ये कम्प्यटू र ताप, गत्तत, प्रवाह
आत्तद संकेतों पर कायथ करते हुए गणना करने एवं तात्तकथक त्तियाओ ं को करने का भी कायथ कर सकते हैं। आउटपटु अक ं ों या मापने की
त्तकसी इकाई में।
• त्तचत्तकत्सा क्षेत्र में उपयोग अत्तधक
2. मूल तकनीक क़े आधार पर (i) एनालॉग (ii) त्तडत्तजटल (iii) हाइत्तिड (iv) क्ट्वांटम कम्प्यटू र (v) ऑत्त्टकल कम्प्यटू र
(vi) न्यरू ोकम्प्यटू र(vii) DNA कम्प्यटू र(viii) एटोत्तमककम्प्यटू र
(iv) किांटम कम््यूटर : यह कम्प्यूटर क्ट्वांटम भौत्ततकी के त्तवषयो अर्ाथत परमाणु की सरंचना उसकी गत्तत तर्ा उसके व्यवहार के आधार
पर कायथ करे गा।
• यह कं्यटू र ऐसी समस्याओ को हल करने में सक्षम है जो परंपरागत कं्यटू र हल नहीं कर सकते। जैसे – फमेट का प्रमेय।
• परंपरागत कं्यटू र से यह दो अवधारणाओ में अलग है –
1. परंपरागत कं्यटू र अत्तधकतम आणत्तवक स्तर पर समस्या को हल कर सकते है, जबत्तक यह परमात्तण्वक स्तर पर।
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2. परम्पपरागत त्तडत्तजटल कम्प्यटू र में सचू नाएं बाइनरी कोड (0,1) के रूप में संग्रहीत रहती है और जबत्तक क्ट्वांटम कम्प्यरू में
सचू नाओ ं की आधारभतू इकाई क्ट्वांटम त्तबट्स (Qubits) होगी जो (0,1) तर्ा इन दोनों के सपु रपोजीशन का एक सार्
प्रयोग करने में सक्षम है।
किांटम सप्रु ीम़ेसी - क्ट्वांटम कम्प्यटू र त्तकसी भी ऐसी गणना को कर सकता है त्तजसे आधत्तु नक सपु र कम्प्यटू र करने में सक्षम नहीं है।
भारत राष्रीय किांटम वमशन किांटम कं्यूवटंि कया है?
दत्तु नया भर में तकनीक के बढ़ते प्रभाव के सार्, भारत राष्रीय क्ट्वांटम कं्यटू र सचू ना को संग्रहीत और प्रोसेस करने के त्तलए
क्ट्वांटम त्तमशन (NQM) के सार् भत्तवष्य की ओर कदम बढ़ा रहा है, क्ट्यत्तू बट नामक त्तवशेष इकाइयों का उपयोग करते हैं। रे ग्यल ु र कं्यटू रों
जो भारत सरकार की एक बडी पहल है, त्तजसका उद्देश्य देश को के उलट, जहां त्तबट्स के वल 0 या 1 हो सकते हैं, क्ट्यत्तू बट एक ही
क्ट्वांटम प्रौद्योत्तगकी अनुसंधान और त्तवकास में सबसे आगे लाना है। समय में 0 और 1 दोनों हो सकते हैं। एक सार् कई अवस्र्ाओ ं में
19 अप्रैल 2023 को कें द्रीय मंत्तत्रमंडल द्वारा स्वीकृ त इस त्तमशन को होने की यह क्षमता क्ट्वांटम कं्यूटरों को पारंपररक कं्यटू रों से अलग
2023-24 से 2030-31 तक के त्तलए त्तनधाथररत त्तकया गया है, और संभात्तवत रूप से अत्तधक शत्तक्तशाली बनाती है।
त्तजसका बजट आवंटन ₹6,003.65 करोड है। कई देश क्ट्वांटम कं्यत्तू टंग और अन्य क्ट्वांटम तकनीकों पर
राष्रीय क्ट्वांटम त्तमशन, के वल एक त्तमशन नहीं है, बत्तल्क यह सत्तिय रूप से काम कर रहे हैं, इस त्तमशन के पररणाम स्वास््य सेवा,
एक साहत्तसक कदम है त्तजसके माध्यम से भारत का लक्ष्य नवाचार स्वच्छ ऊजाथ, जलवायु पररवतथन, रोजगार सृजन और बहुत कुछ को
को बढ़ावा देने, सरु क्षा को मजबतू करने और त्तवत्तभन्न उद्योगों को प्रभात्तवत कर सकते हैं, जो हर नागररक के जीवन को प्रभात्तवत
बढ़ावा देने के त्तलए क्ट्वांटम प्रौद्योत्तगकी की शत्तक्त का उपयोग करना करे गा।
है, त्तजससे वह इस अत्याधत्तु नक क्षेत्र में वैत्तिक नेता के रूप में खदु
को स्र्ात्तपत कर सके ।
राष्रीय किांटम वमशन क़े उद्द़ेश्य
सचं ार, त्ति्टोग्राफी और कं्यत्तू टंग जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा देने के त्तलए भारत में क्ट्वाटं म प्रौद्योत्तगत्तकयों का उपयोग करने के व्यापक उद्देश्य के
सार्, राष्रीय क्ट्वांटम त्तमशन ने क्ट्वांटम क्षेत्र में भारत की क्षमताओ ं को आगे बढ़ाने के त्तलए त्तवत्तशष्ट उद्देश्यों को रे खांत्तकत त्तकया है:
• किांटम कं्यवू टंि विकास: कम्प्यटू ेशनल क्षमताओ ं को आगे बढ़ाने के त्तलए सपु रकंडत्तक्ट्टंग और फोटोत्तनक प्रौद्योत्तगत्तकयों जैसे
्लेटफामों पर 20-50 भौत्ततक क्ट्यत्तू बट (3 वषथ), 50-100 भौत्ततक क्ट्यत्तू बट (5 वषथ) और 50-1000 भौत्ततक क्ट्यत्तू बट (8 वषथ) के सार्
मध्यवती-पैमाने के क्ट्वाटं म कं्यटू र त्तवकत्तसत करना।
• उपग्रह-आधाररत किांटम सच ं ार: भारत में 2000 त्तकलोमीटर से अत्तधक दरू ी पर त्तस्र्त दो ग्राउंड स्टेशनों के बीच उपग्रह-सक्षम
क्ट्वाटं म-सरु त्तक्षत सचं ार स्र्ात्तपत करना तर्ा अन्य देशों के सार् लबं ी दरू ी के सरु त्तक्षत क्ट्वाटं म सचं ार के त्तलए इस प्रौद्योत्तगकी का
त्तवस्तार करना।
• इटं र-वसटी किांटम कुंजी वितरर् (कयक ू ़े िी): मौजदू ा ऑत्त्टकल फाइबर अवसरं चना पर त्तविसनीय नोड्स और वेवलेंर् त्तडवीजन
मल्टी्लेत्तक्ट्संग (WDM) का उपयोग करके 2000 त्तकमी तक फै ले क्ट्वांटम-सरु त्तक्षत संचार को लागू करना, त्तजससे सरु त्तक्षत डेटा
रासं त्तमशन को बढ़ाया जा सके ।
• मल्टी-नोि किांटम ऩेटिकथ :प्रत्येक नोड पर क्ट्वांटम मेमोरी, एन्टेंगलमेंट स्वैत्तपंग और त्तसंिोनाइज़्ड क्ट्वांटम ररपीटसथ को शात्तमल
करते हुए एक मल्टी-नोड क्ट्वाटं म नेटवकथ त्तवकत्तसत करना, त्तजससे स्के लेबल और मजबतू क्ट्वांटम सचं ार (2-3 नोड्स) सक्षम हो सके ।
• उन्नत किांटम सेंवसिं और घवडयां:अत्यत्तधक संवेदनशील क्ट्वांटम उपकरणों को त्तडजाइन करना, त्तजसमें परमाणु प्रणात्तलयों में 1
फे म्पटो-टेस्ला/sqrt(Hz) सवं ेदनशीलता वाले मैग्नेटोमीटर और नाइरोजन ररत्तक्त कें द्रों में 1 त्तपको-टेस्ला/sqrt(Hz) से बेहतर, 100
नैनो-मीटर/सेकंड² संवेदनशीलता से बेहतर गरुु त्वाकषथण सेंसर और सटीक समय, नेत्तवगेशन और सरु त्तक्षत संचार के त्तलए 10⁻¹⁹
आत्तं शक अत्तस्र्रता वाली परमाणु घत्तडयां शात्तमल हैं।
• किांटम सामग्री और उपकरर्:कं्यत्तू टंग और संचार में अनप्रु योगों के त्तलए क्ट्यत्तू बट, त्तसंगल-फोटॉन स्रोत/त्तडटेक्ट्टर, उलझे हुए फोटॉन
स्रोत और क्ट्वाटं म सेंत्तसगं /मेरोलॉत्तजकल उपकरणों के त्तनमाथण के त्तलए अगली पीढ़ी की क्ट्वाटं म सामग्री जैसे सपु रकंडक्ट्टर, नवीन
अधथचालक संरचनाएं और टोपोलॉत्तजकल सामग्री का त्तवकास और संश्लेषण करना।
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राष्रीय क्ट्वांटम त्तमशन (एनक्ट्यएू म) प्रधानमंत्री त्तवज्ञान प्रौद्योत्तगकी निाचार सलाहकार पररषद क़े तहत नौ पहलों में स़े एक है, त्तजसका
उद्देश्य भारत को क्ट्वाटं म प्रौद्योत्तगकी में वैत्तिक नेता के रूप में स्र्ात्तपत करना है। सरु त्तक्षत क्ट्वाटं म सचं ार, क्ट्वाटं म कं्यत्तू टंग और सटीक सवं ेदन
में प्रगत्तत को बढ़ावा देकर, त्तमशन दरू सचं ार, रक्षा, त्तवि और स्वास््य सेवा जैसे क्षेत्रों को बदलने के त्तलए तैयार है, त्तजससे समाज पर गहरा
प्रभाव पडेगा।
कायाथन्ियन रर्नीवत: विषयित हब (टी-हब)
राष्रीय क्ट्वांटम त्तमशन एक राष्रव्यापी पहल है जो क्ट्वांटम प्रौद्योत्तगकी में अत्याधत्तु नक प्रगत्तत को आगे बढ़ा रही है। इस त्तमशन के तहत चार
र्ीमैवटक हब (टी-हब) स्र्ावपत त्तकए गए हैं, जो 17 राज्यों और 2 कें द्र शात्तसत प्रदेशों में 14 तकनीकी समहू ों को एक सार् लाते हैं। ये हब
प्रौद्योत्तगकी नवाचार, कौशल त्तवकास, उद्यत्तमता, उद्योग भागीदारी और वैत्तिक सहयोग पर ध्यान कें त्तद्रत करते हैं, त्तजससे वास्तव में राष्रीय
प्रभाव सत्तु नत्तित होता है। देश के हर कोने से मत्तहला वैज्ञात्तनकों को त्तमशन के रोमांचक कायथिमों में भाग लेने और लाभ उठाने के त्तलए सत्तिय
रूप से प्रोत्सात्तहत त्तकया जाता है।
भारत क़े अग्रर्ी सस्ं र्ानों में चार टी-हब स्र्ावपत वकए िए हैं:
1. भारतीय त्तवज्ञान सस्ं र्ान बेंगलरुु
2. भारतीय प्रौद्योत्तगकी सस्ं र्ान, मद्रास और टेलीमैत्तटक्ट्स त्तवकास कें द्र, नई त्तदल्ली
3. भारतीय प्रौद्योत्तगकी संस्र्ान, बॉम्पबे
4. भारतीय प्रौद्योत्तगकी संस्र्ान त्तदल्ली।
इन कें द्रों का चयन कठोर प्रत्ततस्पधी प्रत्तिया के माध्यम से त्तकया गया और प्रत्येक कें द्र एक त्तवत्तशष्ट क्ट्वांटम डोमेन पर ध्यान कें त्तद्रत करता है, जो
क्ट्वांटम कं्यत्तू टंग, क्ट्वांटम संचार, क्ट्वांटम सेंत्तसंग और मेरोलॉजी, और क्ट्वांटम सामग्री और उपकरणों में प्रगत्तत को बढ़ावा देता है।
हब-स्पोक-स्पाइक मॉिल राज्यिार वनवध आिंटन
प्रत्येक टी-हब हब-स्पोक-स्पाइक मॉडल का पालन करे गा, जो एनक्ट्यएू म के तहत चनु े गए चार टी-हब सामत्तू हक रूप से देश
क्ट्लस्टर-आधाररत नेटवकथ को बढ़ावा देगा, जहाँ शोध पररयोजनाएँ भर के 43 संस्र्ानों के 152 शोधकताथओ ं को शात्तमल करते हैं, जो
(स्पोक) और व्यत्तक्तगत शोध समहू (स्पाइक) कें द्रीय हब के सार्- क्ट्वाटं म प्रौद्योत्तगत्तकयों में अनसु धं ान और नवाचार को बढ़ावा देने के
सार् काम करते हैं। यह संरचना शोध संस्र्ानों के बीच सहयोग को त्तलए एक सहयोगी पाररत्तस्र्त्ततकी तंत्र को बढ़ावा देते हैं। इन हब द्वारा
बढ़ाती है, त्तजससे उन्हें संसाधनों और त्तवशेषज्ञता को अत्तधक प्रभावी की जाने वाली गत्ततत्तवत्तधयों में प्रौद्योत्तगकी त्तवकास, मानव संसाधन
ढंग से साझा करने की अनमु त्तत त्तमलती है। त्तवकास, उद्यत्तमता त्तवकास, उद्योग सहयोग और अतं राथष्रीय सहयोग
शात्तमल हैं।
राष्रीय किांटम वमशन क़े अंतिथत पहल
एनक्ट्यएू म के तहत, क्ट्वाटं म-लचीले एत्तन्ि्शन तकनीक और पोस्ट-क्ट्वाटं म त्ति्टोग्रात्त़िक (पीक्ट्यसू ी) ढाचं े को त्तवकत्तसत करने के त्तलए समत्तपथत
प्रयास चल रहे हैं, त्तजससे यह सत्तु नत्तित हो सके त्तक क्ट्वांटम यगु में भारत की महत्वपणू थ डेटाबेस प्रणात्तलयाँ सरु त्तक्षत रहें। प्रमख
ु पहलों में शात्तमल हैं:
• किांटम-सरु वित पाररवस्र्वतकी तंत्र ढांचा:क्ट्वांटम खतरों के त्तखलाफ भारत के त्तडत्तजटल बत्तु नयादी ढांचे को सरु त्तक्षत और मजबतू
करने के त्तलए एक रणनीत्ततक रोडमैप की रूपरे खा तैयार करने के त्तलए एक अवधारणा पत्र त्तवकत्तसत त्तकया गया है।
• िीआरिीओ की पहल: रक्षा अनसु ंधान एवं त्तवकास संगठन (डीआरडीओ) क्ट्वांटम-सरु त्तक्षत समत्तमत और असमत्तमत कंु जी
त्ति्टोग्रात्तफक एल्गोररदम के सार्-सार् क्ट्वाटं म-लचीली सरु क्षा योजनाओ ं के त्तडजाइन और परीक्षण पर कें त्तद्रत पररयोजनाओ ं का
नेतत्ृ व कर रहा है।
• SETS द्वारा की िई प्रिवत: त्तप्रंत्तसपल साइत्तं टत्तफक एडवाइजर (PSA) के कायाथलय के अतं गथत सोसाइटी फॉर इलेक्ट्रॉत्तनक रांजक्ट्े शन
एंड त्तसक्ट्योररटी (SETS), पोस्ट-क्ट्वांटम त्ति्टोग्राफी (PQC) अनसु ंधान को गत्तत दे रही है। इसने फास्ट आइडेंत्तटटी ऑनलाइन
(FIDO) प्रमाणीकरण टोकन और इटं रनेट ऑफ त्तर्ंग्स (IoT) सरु क्षा जैसे अनप्रु योगों के त्तलए PQC एल्गोररदम को लागू त्तकया है।
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• सी-िॉट निाचार: दरू संचार त्तवभाग (डीओटी) के तहत टेलीमेत्तटक्ट्स त्तवकास कें द्र (सी-डॉट) ने क्ट्वांटम कंु जी त्तवतरण (क्ट्यूकेडी),
पोस्ट-क्ट्वांटम त्ति्टोग्राफी (पीक्ट्यसू ी), और क्ट्वांटम त्तसक्ट्योर वीत्तडयो आईपी फोन सत्तहत अत्याधत्तु नक समाधान त्तवकत्तसत त्तकए हैं।
ये पहल उभरते क्ट्वाटं म यगु के साइबर सरु क्षा खतरों के त्तवरुद्ध भारत के त्तडत्तजटल बत्तु नयादी ढाचं े की सरु क्षा के त्तलए महत्वपणू थ हैं।
िैविक प्रवतस्पधाथत्मकता और रर्नीवतक प्रभाि
• एनक्ट्यएू म में देश के प्रौद्योत्तगकी त्तवकास पाररत्तस्र्त्ततकी तंत्र को बदलने की क्षमता है, त्तजससे यह वैत्तिक स्तर पर प्रत्ततस्पधी बन जाएगा। यह
संचार, स्वास््य सेवा, त्तवि और ऊजाथ जैसे प्रमख ु क्षेत्रों में प्रगत्तत को बढ़ावा देगा, सार् ही दवा खोज, अतं ररक्ष अन्वेषण, बैंत्तकंग और सरु क्षा
में भी इसका उपयोग त्तकया जाएगा। इसके अलावा, यह त्तमशन त्तडत्तजटल इत्तं डया, मेक इन इत्तं डया, त्तस्कल इत्तं डया, स्टैंड-अप इत्तं डया, स्टाटथ-
अप इत्तं डया, आत्मत्तनभथर भारत और सतत त्तवकास लक्ष्यों (एसडीजी) जैसी राष्रीय पहलों को आगे बढ़ाने में महत्वपणू थ भत्तू मका त्तनभाएगा।
• इस प्रकार कहा जा सकता है त्तक राष्रीय क्ट्वांटम त्तमशन (NQM) त्तस़िथ एक तकनीकी पहल से कहीं ज़्यादा है - यह क्ट्वांटम यगु में भारत के
भत्तवष्य को सरु त्तक्षत करने की त्तदशा में एक रणनीत्ततक कदम है। महत्वपणू थ त्तनवेश, त्तवि स्तरीय अनसु धं ान सहयोग और समत्तपथत नवाचार
कें द्रों के सार्, यह त्तमशन भारत को वैत्तिक क्ट्वाटं म िात्तं त के अग्रभाग में ले जाने के त्तलए तैयार है।
• यह पहल एक ऐसी दत्तु नया में वैज्ञात्तनक उत्कृ ष्टता, आत्तर्थक लचीलापन और राष्रीय सरु क्षा के त्तलए भारत की प्रत्ततबद्धता को रे खांत्तकत
करती है जहाँ क्ट्वाटं म प्रौद्योत्तगत्तकयाँ उद्योगों और समाजों को नया आकार देने के त्तलए तैयार हैं।
(v) ऑव्टकल कम््यूटसथ : ये त्तफफ्र् जनरे शन (5वीं पीढी) के कम्प्यटू र हैं। इनकी कायथप्रणाली का आधार फोटोन हैं। ये ऑत्त्टकल
भौत्ततकी पर आधाररत होते हैं।
(vi) न्यूरो कम््यूटर :
• ये भी भत्तवष्य के कम्प्यटू र हैं। इसमें जीव त्तवज्ञान व इलेक्ट्रॉत्तनक्ट्स को संयक्ट्ु त रूप से प्रयोग में लाया जाता है। ये मानव मत्तस्तष्क की
कायथप्रणाली का अनसु रण करते हैं। इन कम्प्यटू र की प्रोसेत्तसंग स्पीड अत्यत्तधक होती है।
• वतथमान के नए आयामों यर्ा रोबोत्तटक्ट्स, कृ त्तत्रम बत्तु द्धमत्ता के क्षेत्र में इनका प्रयोग बहुत अत्तधक बढने की संभावना है। कम्प्यूटर
की प्रोसेत्तसंग स्पीड अत्यत्तधक होती है। वतथमान के नए आयामों यर्ा रोबोत्तटक्ट्स, कृ त्तत्रम बत्तु द्धमत्ता के क्षेत्र में इनका प्रयोग बहुत
अत्तधक बढने की संभावना है। ऐसी संभावना है त्तक क्ट्वांटम तकनीक (क्ट्यत्तू बट) आधाररत कम्प्यटू र एक त्तदन मानव मत्तस्तष्क को भी
त्तवत्तजट कर सकें गे। तकनीकी भाषा में इन्हें ‘वेटवेपर’ भी कहा जाता है।
उदाहरण के त्तलए (परसे्रॉन)
(vii) िी.एन.ए. कम््यूटर: आत्तण्वक जीव त्तवज्ञान व इलेक्ट्रॉत्तनक्ट्स का संयक्ट्ु त अनप्रु योग, इनकी संग्रहण क्षमता, गत्तत व त्तवश्लेषण क्षमता
बहुत ही अत्तधक होती है।
उदाहरण के त्तलए माया सीरीज (I व II)
(viii) एटॉवमक कम््यूटर: वतथमान में परमाणु कम्प्यटू र भी त्तवकास के चरण में है। इनमें त्तवत्तशष्ट प्रोटीन्स का इस्तेमाल एकीकृ त पररपर् बनाने
में त्तकया जाएगा। इनकी क्षमता वतथमान कम्प्यटू सथ से लगभग 10,000 गणु ा अत्तधक होगी।
3. आकार क़े आधार पर कम््यूटर :
(i) माइरो कम््यूटर : आकार में छोटे एवं कम कीमत के होते हैं। घरों, त्तवद्यालयों, कायाथलयों में प्रायः उपभोग में।
• संग्रहण क्षमता तर्ा कायथ करने की गत्तत अपेक्षाकृ त कम
• पसथनल कम्प्यटू र या P.C भी कहते हैं।
जैसे :- डेस्कटॉप कम्प्यटू र, लैपटॉप, पामटॉप, नोटबक ु , टेबलेट आत्तद।
एबं ़ेि़ेि कम््यूटर - त्तवद्यतु ीय उपकरण के सार् जुडा हुआ ऐसा कम्प्यटू र, जो त्तवशेष उद्देश्यों हेतु त्तनदेत्तशत होता है। 'माइरो कम््यूटर'
भी कहते हैं।
उदाहरण - एटीएम (ATM), माइिोवेव ओवन, सेलफोन, रोबोट, पॉइटं ऑ़ि सेल (POC) मशीन आत्तद।
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(ii) वमनी कम््यूटर : मध्यम आकार के सामान्य उद्देश्य वाले कम्प्यटू र
• संग्रहण क्षमता एवं कायथ करने की गत्तत अपेक्षाकृ त अत्तधक
• एक से अत्तधक सी.पी. यू होते हैं।
• प्रायः बडे कायाथलयों, बेंको में उपयोग ।
उदाहरण- HP 3000, NOVA
(iii) म़ेनफ़्ऱेम कम््यूटर : वे कम्प्यटू र त्तजनकी गणना या कायथ क्षमता 500 मेगा फ्लॉ्स | (Floating Point operations Per Second
FLOPS) से अत्तधक हो और स्मृत्तत भण्डारण क्षमता 52 मेगावाट से अत्तधक हो।
• इनमें समानांतर प्रोसेत्तसंग तकनीक का प्रयोग त्तकया जाता है, त्तजसके तहत बहुत से माइिोप्रोसेसर को समानांतर िम में जोडा जाता
है, त्तजससे कायथक्षमता में अत्यत्तधक वृत्तद्ध (समस्या को मांगों के अनरू
ु प त्तवभात्तजत कर, एक सार् कायथ करते हैं)
• अत्तधक जत्तटल एवं उच्च कोत्तट की शद्ध ु ता वाली गणनाएं इनसे ही सम्पभव है। उदाहरण - परम, CRAY, प्रत्यषू , परम त्तसत्तद्ध AI
उदाहरण- वैज्ञात्तनक अनसु ंधान संगठनों, मौसमी भत्तवष्यवाणी करने, अन्तररक्ष अनसु ंधान प्रयोगशालाओ,ं नात्तभकीय संयंत्रों के त्तनयंत्रण
आत्तद में उपयोग।
राष्रीय सपु र कम््यूवटंि वमशन
• राष्रीय सपु रकं्यत्तू टंग त्तमशन (NSM) की स्र्ापना देश को सपु रकं्यत्तू टंग इफ्र
ं ास्रक्ट्चर प्रदान करने के त्तलए की गई है, तात्तक त्तशक्षात्तवदों,
शोधकताथओ,ं एमएसएमई और स्टाटथअप की बढ़ती कम्प्यटू ेशनल मांगों को परू ा त्तकया जा सके ।
• यह देश की कं्यत्तू टंग शत्तक्त को बढ़ावा देने का अपनी तरह का पहला प्रयास है। राष्रीय सपु र कं्यत्तू टंग त्तमशन को त्तवज्ञान और
प्रौद्योत्तगकी त्तवभाग (DST) और इलेक्ट्रॉत्तनक्ट्स और आईटी मत्रं ालय (MeitY) द्वारा सयं क्त ु रूप से सचं ात्तलत त्तकया जाता है।
• सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑ़ि एडवास्ं ड कं्यत्तू टंग (C-DAC), पणु े और भारतीय त्तवज्ञान सस्ं र्ान (IISc), बेंगलरुु द्वारा कायाथत्तन्वत त्तकया
जाता है।
• तकनीकी सलाहकार सत्तमत्तत और कायथकारी बोडथ की मंजरू ी के सार्, खरीद-त्तनमाथण-दृत्तष्टकोण पर आधाररत एक संशोत्तधत योजना लागू
की गई। स्वदेशी रूप से त्तनत्तमथत पहला सपु रकं्यटू र, त्तजसे परम त्तशवाय कहा जाता है, आईआईटी (बीएचय)ू में स्र्ात्तपत त्तकया गया र्ा
और इसका उद्घाटन माननीय प्रधान मंत्री द्वारा त्तकया गया र्ा। इसी तरह, 14 वीं मशीन को भारत के माननीय राष्रपत्तत द्वारा आईआईटी
गवु ाहाटी में राष्र को समत्तपथत त्तकया गया। माचथ 2023 तक परू ा होने वाले इस्ं टॉलेशन और उनका त्तववरण नीचे त्तदया गया है। वे सभी
मौसम और जलवाय,ु कम्प्यटू ेशनल द्रव गत्ततकी, जैव सचू ना त्तवज्ञान और सामग्री त्तवज्ञान जैसे डोमेन को परू ा करने के त्तलए अनप्रु योगों से
ससु त्तज्जत हैं।
कं्यूवटंि शवि चालू की िई प्रर्ावलयों की सख्ं या
त्तनचली सीमा (≥ 50TF, < 500TF) 13
मध्य-सीमा (500 TF से ऊपर, लेत्तकन < 1 पेटा फ्लॉप) 8
बडे पैमाने पर (> 1 पेटा फ्लॉप में GPU शात्तमल है) 7
I-एनएसएम वसस्टम्स
रमांक सस्ं र्ान का नाम एचपीसी वसस्टम का नाम कं्यूवटंि शवि
1 आईआईटी(बीएचय)ू , वाराणसी परमत्तशवाय 13
2 आईआईएसईआर, पणु े परमिह्म 8
3 आईआईटी, खडगपरु परमशत्तक्त 7
6 विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
रमांक सस्ं र्ान का नाम एचपीसी वसस्टम का नाम कं्यूवटंि शवि
4 जेएनसीएएसआर, बैंगलोर परमयत्तु क्त 1.8पीएफ
5 ईटकानपरु परमसंगनक 1.66पीएफ
6 सी-डैक, पणु े परमत्तसत्तद्ध-एआई 5.2पीएफ/210पीएफ(एआई)
7 आईआईटी, हैदराबाद परमसेवा 838टीएफ
8 नबी, मोहाली परमस्मृत्तत 838टीएफ
9 आईआईएससी, बैंगलोर परमप्रवेश 3.3पीएफ
10 सी-डैक, बैंगलोर परमउत्कषथ 838टीएफ
11 आईआईटी, रुडकी परमगगं ा 1.66पीएफ
12 आईआईटी, गांधीनगर परमअनंत 838टीएफ
13 एनआईटी, त्तत्रची परमपोरुल 838टीएफ
14 आईआईटी, गवु ाहाटी परमकामरूप 838टीएफ
15 आईआईटी, मडं ी परमत्तहमालय 838टीएफ
II - अनुसध
ं ान एिं विकास और अनुप्रयोि विकास प्रर्ावलयाँ
रमांक सस्ं र्ान का नाम एचपीसी वसस्टम का नाम कं्यूवटंि शवि कमीशवनंि का िषथ
16 सी-डैक, पणु े सगं मटेस्टबेड 150 टीएफ 2017
17 सी-डैक, पणु े परमश्रेष्ठ 100 टीएफ 2018
18 सी-डैक, पणु े परमभ्रणू 100 टीएफ 2020
19 सी-डैक, पणु े परमनील 100 टीएफ 2020
20 सेट्स, चेन्नई परमस्फूत्ततथ 100 टीएफ 2020
21 सी-डैक, पणु े जैवसचू नात्तवज्ञानअनसु ंधानएवं त्तवकाससत्तु वधा 230 टीएफ 2021
22 सी-डैक, बैंगलोर त्तसस्टमसॉफ्टवेयरलैब 82टीएफ 2020
23 सी-डैक, पणु े परमसम्पपणू थ 27 टीएफ 2020
III - एनएसएम एचआरिी क़े तहत परम विद्या (वशिा और प्रवशिर् क़े वलए)
रमांक सस्ं र्ान का नाम एचपीसी वसस्टम का नाम कं्यूवटंि शवि कमीशवनंि का िषथ
24 सी-डैक, पणु े परमत्तवद्या1 52.3 टीएफ 2022
25 आईआईटी, खडगपरु परमत्तवद्या2 52.3 टीएफ 2022
26 आईआईटी, पलक्ट्कड परमत्तवद्या3 52.3 टीएफ 2022
27 आईआईटी, चेन्नई परमत्तवद्या4 52.3 टीएफ 2022
28 आईआईटी, गोवा परमत्तवद्या5 52.3 टीएफ 2022
7 विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
• एनएसएम ने देश भर में 24.83 पीएफ एचपीसी मशीनें सफलतापवू थक स्र्ात्तपत की हैं, जबत्तक मूल रूप से 15-20 पीएफ की कल्पना की
गई र्ी। इसके अलावा, 41.17 पीएफ की कुल क्षमता वाली 12 और मशीनें एक साल में चालू होने वाली हैं। आने वाली नई स्र्ापनाएँ
भारत में त्तनत्तमथत स्वदेशी रुद्र सवथर ्लेट़िॉमथ पर आधाररत होंगी। इससे कुल 66 पीएफ की कं्यत्तू टंग शत्तक्त त्तमलेगी, जो इत्तच्छत कं्यत्तू टंग
क्षमता से 4.5 गनु ा अत्तधक है।
• स्वदेशी प्रयासों के पररणामस्वरूप त्तत्रनेत्र हाई-स्पीड इटं रकनेक्ट्ट और डायरे क्ट्ट त्तलत्तक्ट्वड कूत्तलंग यत्तू नट का त्तनमाथण हुआ। हमारे पास इटं ेल
कै स्के ड ्लेटफॉमथ पर आधाररत अपना स्वयं का सवथर है त्तजसे रुद्र कहा जाता है। ये त्तसस्टम संचालन में लागत कुशल और त्तबजली
कुशल हैं।
• एनएसएम की प्रमुख उपलवधधयां इस प्रकार हैं:
❖ कुल 24.83 पीएफ एचपीसी मशीनें स्र्ानीय स्तर पर त्तनत्तमथत की गई हैं और परू े देश में चालू की गई हैं।
❖ रुद्र सवथर बोडथ 1.0, त्तत्रनेत्र एचपीसी इटं रकनेक्ट्ट, एचपीसी त्तसस्टम सॉफ्टवेयर स्टैक 1.1 और त्तवत्तभन्न बेंचमाकथ (क्ट्लाउड, एचपीसी)
अनप्रु योगों का त्तवकास।
❖ अब तक 17500 लोगों को हाई परफॉरमेंस कं्यत्तू टंग में प्रत्तशत्तक्षत त्तकया जा चक ु ा है
❖ 100 से अत्तधक संस्र्ानों के 5930 से अत्तधक त्तवशेषज्ञ उपयोगकताथ त्तनयत्तमत रूप से सत्तु वधाओ ं का उपयोग कर रहे हैं
❖ हाल ही तक 73,25,604 उच्च त्तनष्पादन कम्प्यटू ेशनल क्ट्वेरीज़ त्तनष्पात्तदत की गई हैं।
• राष्रीय सपु रकं्यूवटंि वमशन (NSM) क़े तीन चरर् हैं:
चरर् 1: इस चरण में, सपु र कं्यटू रों को असेंबल त्तकया जाता है.
चरर् 2: इस चरण में, देश के भीतर कुछ घटकों के त्तनमाथण पर त्तवचार त्तकया जाता है.
चरर् 3: इस चरर् में, सपु रकं्यूटर को भारत द्वारा विजाइन वकया जाता है.
सपु रकं्यूवटंि िमता का विस्तारीः स्िद़ेशी तकनीक का विकासीः
NSM ने देश भर में 24.83 पीएफ एचपीसी मशीनों की स्र्ापना NSM के प्रयासों से स्वदेशी रुद्र सवथर ्लेट़िॉमथ और त्तत्रनेत्र हाई-
की, जो मल
ू रूप से 15-20 पीएफ की कल्पना की गई र्ी। स्पीड इटं रकनेक्ट्ट का त्तवकास हुआ, जो भारत में असेंबली और
मैन्यफ
ु ै क्ट्चररंग के सार् सपु रकं्यत्तू टंग इफ्र
ं ास्रक्ट्चर स्र्ात्तपत करने में
मदद करता है।
मौसम और जलिायु अनुसध
ं ान क़े वलए HPC प्रर्ालीीः
प्रधानमंत्री ने मौसम और जलवायु अनसु ंधान के त्तलए एक उच्च-प्रदशथन कं्यत्तू टंग (HPC) प्रणाली का उद्घाटन त्तकया, जो मौसम संबंधी
अनप्रु योगों के त्तलए भारत की कम्प्यटू ेशनल क्षमताओ ं में एक महत्वपणू थ छलांग है।
कम््यूटर क़े पीव़ियाँ (Computer Generation) :
1. प्रर्म पी़िी क़े कम््यूटर (1942 स़े 1955) 2. वद्वतीय पी़िी (1955 स़े 1964)
• वैक्ट्यमू ट्यबू का उपयोग । • रात्तं जस्टरों का उपयोग।
• आकार बहुत बडा • अपेक्षाकृ त अत्तधक तीव्र गत्तत
• कायथ करने की दर धीमी • त्तवद्यतु खपत कम ।
• आन्तररक मैमोरी के त्तलए चम्पु बकीय ड्रम प्रयक्त
ु । • मैमोरी के त्तलए चम्पु बकीय टेप और त्तडस्क प्रयक्त
ु ।
• मशीनी भाषा तर्ा असेम्पबली भाषा प्रचत्तलत उदाहरण - IBM -70 सीरीज, IBM-1600 सीरीज, सीडीसी - 3600
उदाहरण – एत्तनएक(ENIAC), एडवेक(EDVAC)
3. तृतीय पी़िी (1964 स़े 1975) • रात्तं जस्टर का स्र्ान एकीकृ त पररपर् (Integrated Circuit) ने त्तलया।(IC)
• कम्प्यटू रों का आकार छोटा, गत्तत तीव्र, मैमोरी अत्तधक, लागत में कमी आई।
• उदाहरण - IBM-360, LCL-1900
8 विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
4. चतुर्थ पी़िी (1975 स़े 1989) 5. पंचम पी़िी (1989 स़े ितथमान)
• बडे पैमाने के एकीकृ त पररपर् (Very Large Scale • अभी त्तवकास की अवस्र्ा में है।
Integrated Circuits VLSI) प्रयक्त ु हुए। • इनमे तकथ करने, सोचने, समझने, त्तनणथय लेने आत्तद बौत्तद्धक
• उन पररपर्ो को माइिोत्तचप कहा गया। (पहला माइिोत्तचप - क्षमताओ ं का त्तवकास करने का प्रयास ।
Intel 4004) • ये मानवीय भाषा तर्ा व्यवहार को समझेंगे
• इन छोटे से त्तचप को माइिोप्रोसेसर कहा गया। • जत्तटल तर्ा त्तवषम पररत्तस्र्त्ततयों में भी कायथ करने में सक्षम ।
• माइिो कम्प्यटू र, त्तमनी कम्प्यटू र, मेनफ्रेम कम्प्यटू र तर्ा सपु र
कम्प्यटू र आत्तद।
कम््यूटर तंत्र
वसस्टम यूवनट इनपुट यूवनट वनिथम इकाई
यहकम्प्यटू रकामख्ु य भागहै, कम्प्यटू र (त्तसस्टम यत्तू नट) में डाटा कम्प्यटू र (त्तसस्टम यत्तू नट) से प्राप्त
त्तजसमेंके न्द्रीयससं ाधनइकाई तर्ा प्रोग्राम त्तववरणों की प्रत्तवत्तष्ट के त्तनष्कषों को त्तलखने तर्ा उन
(सी.पी.य.ू ) होताहै। त्तलए प्रयक्त
ु की जाने वाली यत्तु क्तयाँ । त्तनष्कषों को मानवीय भाषा में
जैस-े की-बोडथ, माउस, फ्लॉपी प्रयक्त
ु करने वाली यत्तु क्तयाँ
त्तडस्क, स्कै नर, टच स्िीन, काडथ (Devices)
ररडर आत्तद। जैस:े - मॉनीटर, त्तप्रन्टर आत्तद।
क़े न्रीय सस
ं ाधन इकाई (CPU)
• कम्प्यटू र का त्तदमाग
• यह त्तनदेशों का त्तियान्वयन (Execution) करने के त्तलये उन्हें पढ़ता है, व्याख्या करता है, त्तनयंत्रण करता है और संगणना
(calculation) करता है।
• हम जो भी त्तनदेश कम्प्यटू र को देते हैं, वो पहले सी.पी.यू में जाते हैं और सी.पी.यू त्तनष्कषथ मॉनीटर पर त्तदखाता है।
• C.P.U कम्प्यटू र के शेष सभी भागों जैसे- मैमोरी, इनपटु व आउटपटु त्तडवाइसेज आत्तद के कायों पर त्तनयंत्रण रखता है और उनसे कायथ
करवाता है।
• C.P.U. क़े तीन भाि होत़े हैं :-
1. वनयंत्रर् इकाई (Control Unit ICU)
❖ कम्प्यटू र की समस्त आंतररक त्तियाओ ं का संचालन करती है।
❖ यह मैमोरी से प्रोग्राम पढ़ती है, उनकी व्याख्या करती है तर्ा ए.एल. य.ु व मैमोरी में वांत्तछत त्तिया सम्पपन्न करने के त्तलए तदानसु ार
त्तनदेश देती है।
2. अंकिवर्तीय तावकथ क इकाई (Arithmetic Logic Unit-ALU)
❖ यह यत्तू नट अक ं गत्तणतीय त्तियाएँ तर्ा तात्तकथक त्तियाएँ करती है।
❖ यह सी. य.ू की त्तनगरानी में कायथ करता है। यह मैमोरी में डाटा प्राप्त करता है, उस पर गणनाएँ करता है और पररणाम पनु ः मैमोरी को
ही लौटा देता है। या त्तफर प्रदशथन के त्तलए आउटपटु उपकरणों में भेज त्तदया जाता है।
3. मैमोरी (Memory):
❖ कम्प्यटू र की मैमोरी वह इलेक्ट्रॉत्तनक स्र्ान है, जहाँ डाटा, सचू ना और प्रोग्राम संग्रत्तहत रहते हैं और आवश्यकता पडने पर तत्काल
उपलब्ध हो सकते हैं।
❖ मैमोरी में संग्रह के त्तलए अनेक स्र्ान होते हैं, प्रत्येक स्र्ान की एक पहचान संख्या होती है, त्तजसे एड्रेस कहते हैं।
9 विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
म़ेमोरी
मुख्य म़ेमोरी वद्वतीयक म़ेमोरी
मख्ु य मेमेारी/प्रार्त्तमक मेमोरी/ आंतररक मेमोरी बाह्य मेमोरी/त्तद्वतीयक मेमोरी
यह CPU का भाग होती है। डाटा को स्र्ायी रूप से सगं त्तृ हत करने के त्तलए चम्पु बकीय
तीव्र गत्तत होती है। अर्वा प्रकाशीय मेमोरी होती है
इसके 2 प्रकार है – संगहृ ीत डाटा हमेशा सरु त्तक्षत रहता है तर्ा कं्यटू र को
1. RAM 2. ROM बदं करने पर भी नष्ट नहीं जैसे – हाडथ त्तडस्क, फ्लॉपी
त्तडस्क, मैग्नेत्तटक टेप
RAM(क़े न्रीय एकस़ेस म़ेमोरी) ROM(रीि ओनली म़ेमोरी)
• अस्र्ायी मेमोरी • स्र्ायी मेमोरी
• की बोडथ अर्वा अन्य त्तकसी इनपटु त्तडवाइस से इनपटु डाटा • इस मेमोरी का उपयोग मल
ू भतू त्तनदेशों के संग्रहण के त्तलए
सबसे पहले RAM में सग्रं त्तहत होता है त्तकया जाता है
• इसमें संग्रत्तहत डेटा या त्तनदेश कभी भी एक्ट्सेस, कभी भी पढ़ा • इसमें संग्रत्तहत प्रोग्राम पररवत्ततथत अर्वा नष्ट नहीं त्तकया जा
एवं पनु ः त्तलखा जा सकता है। सकता
• RAM में डाटा या प्रोग्राम - अस्र्ाई रूप से संग्रत्तहत
• कम्प्यटू र को बन्द करने अर्वा त्तवद्यतु आपत्तू तथ बन्द हो जाने पर • डाटा नष्ट नहीं होते। अतः नॉन - वोलेटाइल मेमोरी कहते है
RAM संग्रत्तहत डाटा त्तमट जाता है। अतः वोलेटाइल मैमोरी • उदाहरण - PROM
कहते हैं। - EPROM
• Static RAM, Dynamic RAM - EEPROM
• गत्तत तीव्र • RAM की तल
ु ना में गत्तत कम
अन्य म़ेमोरी
Cache Memory (कै श मैमोरी)
• अत्यत्तधक तीव्र गत्तत की कम संग्रहण क्षमता वाली अस्र्ायी मैमोरी है, त्तजसको CPU एवं RAM के मध्य लगाया जाता है।
• इसका प्रयोग प्रोसेत्तसंग के दौरान बार-बार उपयोग में आने वाले डेटा व त्तनदेगों को, अस्र्ायी तौर पर Load करने के त्तलए त्तकया जाता है।
रवजस्टर मैमोरी - प्रोसेसर के भीतर एक स्र्ायी मेमोरी है जो उन डेटा या त्तनदेशों को रखता है त्तजन पर तरु ं त कायथ करना होता है।
• प्रोसेसर की गत्तत बढ़ाने के के त्तलए Register memory का उपयोग त्तकया जाता है।
• रत्तजस्टर का उपयोग CPU में डाटा व त्तनदेशों को store करने तर्ा उन्हें Access करने के त्तलए त्तकया जाता है।
धलू ऱे विस्क - ऑत्तटकल त्तडस्क का नवीनतम प्रारूप ।
• - 100 GB से अत्तधक डेटा संग्रहण क्षमता
• - इसमें 405 नैनोमीटर तरंगदैध्यथ की नीली लेज़र का प्रयोग, त्तजसके कारण उसकी भण्डारण क्षमता अत्यत्तधक ।
हािथि़ेयर एिं सॉफ्टि़ेयर सॉफ्टि़ेयर
हािथि़ेयर कम्प्यटू र त्तसस्टम के वे सभी भौत्ततक एवं मतू थ (Tangible) सॉफ्टवेयर से तात्पयथ कम्प्यटू र प्रोग्राम्पस के ऐसे समहू से है,
भाग त्तजन्हें हम देख सकते हैं तर्ा छू भी सकते हैं। जो कम्प्यटू र को त्तनदेश प्रदान करता है। इसी के माध्यम से
उदाहरण - CPU, की-बोडथ, माउस, त्तप्रन्टर आत्तद । कम्प्यटू र का त्तनयंत्रण होता है।
10 विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
सॉफ्टि़ेयर क़े प्रकार
वसस्टम सॉफ्टि़ेयर ए्लीक़े शन सॉफ्टि़ेयर यूटीवलटी सॉफ्टि़ेयर
कम्प्यटू र की सम्पपणू थ
ऐसे सॉफ्टवेयर त्तवशेष
व्यवस्र्ा का संचालन जत्तटल समस्या के समाधान
उद्देश्यों हेतु त्तडजाइन त्तकय
त्तसस्टम सॉफ्टवेयर द्वारा ही हेतु त्तनत्तमथत त्तकए जाते हैं।
जाते हैं।
त्तकया जाता है।
(i) वसस्टम सॉफ्टि़ेयर
• कम्प्यटू र को उपयोग में लेना, उसका त्तनयमन करना आत्तद सभी कायथ त्तसस्टम सॉफ्टवेयर द्वारा ही सम्पपन्न त्तकए जाते हैं। यह कम्प्यटू र
त्तनमाथता द्वारा ही उपलब्ध करा त्तदया जाता है। त्तसस्टम सॉफ्टवेयर त्तनम्पन प्रकार के होते हैं- (a) ऑपऱेवटंि वसस्टम (b) वििाइस
ड्राइिसथ (c) भाषा अनुिादक (d) मोबाइल ऑपऱेवटंि वसस्टम
(a) ऑपऱेवटंि वसस्टम - ये सॉफ्टवेयर उपयोगकताथ तर्ा कम्प्यटू र हाडथवेयर में इटं रफे ज समन्वय स्र्ात्तपत करते हैं। जैसे -
• माइिोसॉफ्ट त्तवण्डोज जैसे त्तवण्डोज 10, त्तवण्डोज-XP व त्तवण्डोज त्तवस्टा
• यत्तू नक्ट्स - इनमें डाटा प्रबंधन कनेल द्वारा त्तकया जाता है।
• लाइनक्ट्स यह एक ओपन सोसथ सॉफ्टवेयर है। यह सवथर हेतु प्रयक्त ु होता है।
• मैत्तकण्टोश (ए्पल) इसे मैक OS भी कहा जाता है।
• भारत ऑपरे त्तटंग त्तसस्टम सोल्यश ू न (BOSS) - CDAC द्वारा त्तवकत्तसत है। यह एक ओपन सोसथ सॉफ्टवेयर है।
• यत्तू नक्ट्स त्तसस्टम को मल्टीटात्तस्कंग व मल्टी यजू र आवश्यकताओ ं (यर्ा-सवथर वकथ स्टेशन) हेतु ज्यादा प्रयक्त ु त्तकया जाता है। इसे
बेल प्रयोगशाला में डेत्तनस ररची व के न र्ॉम्पपस ने त्तवकत्तसत त्तकया र्ा। यह यत्तू न्लेक्ट्स इन्फ्रेंमेशन कम्प्यटू र त्तसस्टम का ही सत्तं क्षप्त
रूप है।
❖ कनेल से तात्पयथ CPU (त्तनयंत्रण इकाई) के कायों को त्तनदेत्तशत करने वाले भाग से है।
❖ ए्पल का मैक OS भी यत्तू नक्ट्स पर आधाररत होता है।
❖ लाइनक्ट्स को लीनस टोरवाल्ड्स द्वारा त्तवकत्तसत त्तकया गया र्ा।
(b) वििाइस ड्राइिसथ -ये त्तवशेष व त्तवत्तशष्ट सॉफ्टवेयर है, जो त्तडवाइस के प्रचालन हेतु प्रयक्त ु होते हैं। जैसे-मॉत्तनटर, माऊस, त्तप्रंटर आत्तद
के उपयोग हेतु ऐसे ही सॉफ्टवेयर प्रयक्त ु होते हैं।
एन्ड्रॉइड आई.ओ.एस. (IOS) त्तसत्तम्पबयन
(c) भाषा अनुिादक - ये त्तवत्तभन्न प्रोग्राम्पस को मशीनी भाषा में बदलने हेतु होते हैं, जैसे असेम्पबलर, इन्टरप्रेटर व कम्पपाइलर आत्तद।
(d) मोबाइल ऑपऱेवटंि वसस्टम -
• गगू ल द्वारा 2007 में • ए्पल आई फोन, आई • ओपन सोसथ सॉफ्टवेयर है।
त्तवकत्तसत त्तकया गया। पैड व आई पॉड में प्रयक्त ु • त्तनमाथता - त्तसत्तम्पबयन
लाइनक्ट्स पर आधाररत होता है। कम्पपनी सोनी, नोत्तकया,
होता है। • सवाथत्तधक सरु त्तक्षत मोटोरोला मोबाइल आत्तद
• वतथमान में सवाथत्तधक सॉफ्टवेयर माना जाता है। में यही प्रयक्त
ु होता है।
लोकत्तप्रय ।
11 विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
(ii) ए्लीक़े शन सॉफ्टि़ेयर
• त्तवत्तशष्ट उद्देश्यों यर्ा रे लवे आरक्षण सॉफ्टवेयर, कमथचाररयों की सैलरी बनाने, डॉक्ट्यमू ेंट तैयार करना आत्तद इस प्रकार के सॉफ्टवेयर के
अतं गथत ही आते हैं। ये दो भागों में त्तवभात्तजत त्तकए जाते हैं-
सामान्यउद्देश्यसॉफ्टवेयर त्तवत्तशष्टउद्देश्यसॉफ्टवेयर
(General Purpose) (Specific Purpose)
• डेटाबेसमैनेजमेंटत्तसस्टम(MS-Access) • इनकाके वलएकउद्देश्यहोताहै।
• वडथप्रोसेत्तसंगसॉफ्टवेयर(MS-Word) • यर्ा- पेरोलमैनेजमेन्टत्तसस्टम
• प्रेजेन्टेशनसॉफ्टवेयर(MS-PowerPoint) • परचेंत्तजगं त्तसस्टमआत्तद
(iii) यूवटवलटी सॉफ्टि़ेयर
त्तकसी जत्तटल व त्तवशेष समस्या के समाधान हेतु इस प्रकार के सॉफ्टवेयर त्तवकत्तसत त्तकए जाते हैं। ये कम्प्यटू र के रखरखाव से संबंत्तधत होते हैं।
जैसे -
एंटीवायरस सॉफ्टवेयर बैकअप सॉफ्टवेयर
त्तडस्क कम्पप्रेशन सॉफ्टवेयर त्तडस्क क्ट्लीनसथ सॉफ्टवेयर आत्तद
कम््यूटर भाषाएँ
• कम्प्यटू र से कायथ कराने के त्तलए त्तजस भाषा का उपयोग त्तकया जाता है, यजू र भाषा या कम्प्यटू र भाषा कहलाती है
• कम्प्यटू र मशीन त्तजस भाषा को समझती है, उसे बाइनरी या मशीन भाषा कहते हैं।
• यजू र भाषा को मशीन भाषा में बदलने के त्तलए त्तजस सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होती है उसे रासं लेटर कहते हैं।
1. वनम्न स्तरीय या मशीन भाषा (प्रर्म पी़िी भाषा)
कम्प्यटू र भाषा होती है, त्तजसे कम्प्यटू र समझता है।
• इसे बाइनरी भाषा (0,1) भी कहा जाता है
2. असेंबली भाषा या दूसरी पी़िी की भाषा
• मशीनी भाषा की कत्तमयों को दरू करने के त्तलए असेम्पबली भाषा का त्तवकास ।
• इसमें 0/1 बाइनरी भाषा के स्र्ान पर सांकेत्ततक भाषा त्तनमोत्तनक कोड (Mnemonic code) प्रयोग त्तकया जाता है
• इस कोड को मशीन भाषा में बदलने के त्तलए असेम्पबलर का प्रयोग त्तकया जाता है।
3. उच्च स्तरीय भाषा या तीसरी पी़िी स़े भाषा (HLL)
• एसेम्पबली भाषा की कत्तमयों को दरू करने के त्तलए
• इसमें कोड के स्र्ान पर अग्रं जे ी भाषा में त्तनदेश
• की- वडथ का त्तनमाथण त्तकया गया, त्तजसे आसानी से याद रखा जा सकता है।
• HLL से मशीनी भाषा में बदलने के त्तलए कम्पपाइलर एवं इन्टरप्रेटर का उपयोग त्तकया जाता है। जैसे:- C, C++, Java
4. चौर्ी पी़िी की भाषा
• ऐसी भाषा जो मानवीय भाषा के अत्तधकात्तधक करीब हो
• त्तियात्तन्वत करने के त्तनदेशों की सख्ं या कम । जैसे: SQL - Structured Query Language
12 विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
5. पाँचिी पी़िी की भाषा
इसका उपयोग कृ त्तत्रम बत्तु द्धमता में हो रहा है। जैसे: Prolog, Opss
अन्य प्रमुख वबन्दु
सी-िैक (C-DAC)
(Centre for Development of Advanced Computing)
• पणु े में वषथ 1988 में सपु र कम्प्यूटरों के त्तनमाथण हेतु स्र्ापना इलेक्ट्रॉत्तनकी और सचू ना प्रौद्योत्तगकी मंत्रालय के अतं गथत मख्ु य अनसु ंधान
तर्ा त्तवकास संगठन है।
• परम श्रृंखला समेत कई उच्च स्तरीय सपु र कम्प्यटू रों का त्तनमाथण ।
वग्रि कम््यूवटंि
कम्प्यटू र द्वारा त्तकये जाने वाले कायों का त्तवतरण करने से है।
• त्तजसमें त्तवत्तभन्न स्र्ानों पर मौजदू कम्प्यटू रों के समहू और उनके संसाधनों (सवथर, नेटवकथ , स्टोरे ज आत्तद) को त्तकसी एक लक्ष्य को हात्तसल
करने के त्तलए एक दसू रे से जोडा जाता है।
िरुड पहल
Global Access to Resources using distributed Architecture - GARUDA
• भारत में राष्रीय स्तर पर उच्च क्षमता के कम्प्यटू रों का वृहद आधारभतू त्तग्रड ढाँचा खडा करने के त्तलये आरंभ की गई पहल ।
• इस भारतीय राष्रीय त्तग्रड कम्प्यत्तू टंग पहल के जररये देश के सत्रह अलग - अलग शहरों के अकादत्तमक और शोध सस्ं र्ानों को राष्रीय
नॉलेज नेटवकथ से जोडा जाएगा।
13 विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
02
1
नेटिवकिं ि और प्रकार
कम्प्यूटर नेटिकक
• डाटा संचरण के लिए जब कई स्वतंत्र कंप्यटू रो को लकसी माध्यम से एक साथ जोड़ा जाता है तो यह व्यवस्था कम्पप्यटू र नेटवकक कहिाती
है।
• कम्पप्यटू र नेटवकक में कम्पप्यटू रों के साथ-साथ अन्य यलु िया व उपकरण जैसे लरटं सक, प्िॉटर आलि भी जड़ु े हो सकते हैं।
• नेटवकक में जड़ु े सभी कम्पप्यटू र व उपकरणों के बीच के संचार माध्यम को लिंक कहते हैं।
कम्प्यूटर नेटिकक के उद्देश्य
1. साधनों का विलकर उपयोि करना : इसका मख्ु य उद्देश्य इसमें उपिब्ध सभी साधनों जैसे कम्पप्यटू र, उपकरण, डाटा व रोग्रामों को
लमि जि ु कर कर काम िेना
जैसे:- नेटवकक के जररये अन्य कम्पप्यटू र से डाटा राप्त करना
2. सच ं ार िाध्यिों के रूप िें:- नेटवकक से जड़ु े कम्पप्यटू रो के माध्यम से उपयोिा परस्पर बड़ी आसानी और तीव्र गलत से संचार कर
या सभी रकार के डाटा व सचू ना को आिान –रिान कर सकते है
3. विश्वसवनयता ि उपलब्धता:- महत्वपणू क डाटा को एक से अलधक कम्पप्यटू रो पर संगहृ ीत लकया जा सकता है, लजससे लकसी एक
कंप्यटू र का नेटवकक से सपं कक टूट जाने पर अन्य कम्पप्यटू रो से डाटा राप्त लकया जा सकता है
4. लाित िें किी
कं्यूटर नेटिकक के उपयोि / अनुप्रयोि
1. दूर दराज की सच ु ना तक पहुच:- उपयोिा अपने कंप्यटू र के माध्यम से नेटवकक से जुड़े कम्पप्यटू रो पर उपिब्ध डाटा को राप्त कर
सकता है
2. फै क्स:- नेटवकक से जड़ु े लकसी भी कंप्यटू र पर फै क्स भेजा जा सकता है और राप्त लकया जा सकता है
3. इलेक्रॉवनक िेल अथिा ई-िेल:- इसके जररये संिश े , अटैचमेंच के रूप में फाइि भेजी जा सकती है। िस्तावेज ऑलडयो-वीलडयो
फाइि भेजी जा सकती है
4. िीवियो कॉन्फ्रेंवसिं :- इसके जररये िरू िराज लस्थत िोग आपस में सम्पपकक स्थालपत कर सकते हैं।
5. ऑनलाइन सेिाएँ:- ऑनिाइन ट्रेलडंग, शॉलपगं , ऑनिाईन बैंलकंग, एजक ु े शन आलि में
भाषा सस
ं ाधक (Language Translator)
ये ऐसे रोग्राम है जो एक भाषा में लनिेश स्वीकार कर अन्य भाषा में उसके समतल्ु य लनिेश तैयार करते हैं। कम्पपाइिर (Compiler), इन्टररेटर
(Interpreter), असेम्पबिर (Assembler) भाषा संसाधक के कुछ उिाहरण हैं ।
• कम्पपाइिर यह एक लसस्टम सॉफ्टवेयर है लजसका उपयोग उच्च स्तरीय रोग्रालमंग भाषा को मशीनी भाषा में पररवलतकत करने के लिये लकया
जाता है। कम्पपाइिर परू े रोग्राम को एक साथ कम्पपाइि करता है तथा लवलभन्न त्रलु टयों को उनके िाइन नम्पबर के साथ रिलशकत करता है।
कम्पपाइिर द्वारा रोग्राम लनष्पािन के समय रोग्राम का मैमोरी में होना जरूरी नहीं है।
• इन्टररेटर वे भाषा रोसेसर जो उच्च स्तरीय रोग्रालमगं भाषा को पलं ि िर पलं ि मशीनी भाषा में पररवलतकत करते हैं इन्टररेटर कहिाते हैं।
लकसी भी पलं ि में त्रलु ट होने पर वह तत्काि रिलशकत कर िेता है। इन्टररेटर द्वारा रोग्राम लनष्पािन के समय रोग्राम का मैमोरी में होना
आवश्यक है।
• असेम्पबिर यह असेम्पबिी भाषा में लिखे रोग्राम को मशीन भाषा में पररवलतकत करता है। यह एक लसस्टम सॉफ्टवेयर है। असेम्पबिर एक
बार में एक पंलि को मशीन भाषा में पररवलतकत करता है।
2 विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
कम्प्यूटर नेटिवकिं ि और इसके प्रकार
एक कप्यटू र से िसू र कंप्यटू र तक सचू नाओ ं एवं डाटा के आिान-रिान को डाटा संचार (Data Communication) कहते है।
डाटा सचं रण के लिए जब कई स्वतन्त्र कंप्यटू रों को लकसी माध्यम से एक साथ जोड़ा जाता है तो यह व्यवस्था कंप्यटू र नेटवकक कहिाती है।
कंप्यटू र नेटवकक में कंप्यटू रों के साथ-साथ अन्य यलु ियााँ (Devices) व उपकरण जैसे लरंटसक, प्िॉटर आलि भी जड़ु े हो संकेते हैं। कंप्यटू र
नेटवकक में जड़ु े सभी कंप्यटू र व उपकरणों के बीच के सचं ार माध्यम को लिकं (Link) कहते हैं।
कं्यूटर नेटिकक के प्रकार
कंप्यटू र नेटवकक को िरू ी के आधार पर तीन रकारों में वगीकृ त लकया जाता है-
1. पसकनल एररया नेटिकक (Personal Area Network)
• यह एक व्यलिगत कंप्यटू र नेटवकक है, लजसकी सीमा कुछ मीटर तक ही होती है तथा यह एक रूम या संस्थान के कंप्यटू र उपकरणों के
बीच संचार को सक्षम बनाता है।
• यह तार सलहत हो सकता हैं जैसे USB या फायरवायर या बेतार हो सकता हैं जैसे इन्रारे ड, ब्िटू ू थ और अल्ट्रा वाइड बैंड
2. लोकल एररया नेटिकक (Local Area Network)
• इस नेटवकक को िेन की संज्ञा िी जाती है। यह सीलमत भौगोलिक क्षेत्र जो सामान्यतः कुछ लकिोमीटर का हो सकता है, में फै िा होता
है। ये लकसी कायाकिय, बड़े संस्थान अथवा कारखाने के लवलभन्न कंप्यटू रों द्वारा सचू ना एवं संसाधनों के आिान-रिान के काम आता
है।
• LAN में एक मास्टर कंप्यटू र होता है लजसे सवकर (Server) कहते हैं तथा शेष डम्पब कंप्यटू र (Dumb Computer) होते हैं लजन्हें
टलमकनि (Terminal) कहा जाता है। सवकर सभी टलमकनिों पर लनयंत्रण रखता है। LAN में सभी कंप्यटू र कोएलक्शअि के बि द्वारा
जोडे जाते हैं।
• इसमें डाटा संचरण की गलत तीव्र (10 से 100 मेगाबाइट रलत सेकंड तक) होती है, जो इसकी मुख्य लवशेषता है। इस रकार के नेटवकक
में काफी िचीिापन होने के कारण इसमें लबना सभी नेटवकक को बाधा पहचं ाए. और अलधक कंप्यटू रों का जोड़ा जा सकता है अथवा
हटाया जा सकता है।
3. िेरोपोवलटन एररया नेटिकक (Metropolitan Area Network MAN)
• यह नेटवकक अपेक्षाकृ त बड़े भौगोलिक क्षेत्रों (िगभग 100 km.) में फै िा होता है। इसकी भौगोलिक सीमा सामान्यतः एक शहर तक
होती है। यह वास्तव में LAN का ही बड़ा रूप है क्योंलक यह LAN द्वारा काम में िी जाने वािी तकनीक का ही उपयोग करता है।
4. िाइि एररया नेटिकक (Wide Area Network -WAN)
• इसकी भौगोलिक सीमाएाँ सभी रकार के नेटवकक में सवाकलधक लवस्तृत होती है। यह परू े िेश, रायद्वीप अथवा समचू े लवश्व में फै िा हो
सकता है। WAN में िेशों अथवा रायद्वीपों के सभी कम्पप्यटू र एक िसू रे से जड़ु े होते हैं। ये कम्पप्यूटर डाटा का आिान-रिान एवं के न्र
लनयंलत्रत रसारण भी कर सकते हैं। इस नेटवकक के कुछ भाग के बि से जड़ु े हो सकते है तो कुछ टेिीफोन िाईनो, ऑलप्टकि फाइबर
के बि, माइक्रोवेव या उपग्रह से भी जड़ु े हो सकते हैं।
• इनकी डाटा संचरण गलत भी अन्य नेटवकों की ति ु ना में कुछ कम होती है। इन्टरनेट WAN का ही एक उत्तम उिाहरण है –
िचकुअल प्राइिेट नेटिकक (VPA)
• यह एक व्यलिगत नेटवकक है लजसमें नेटवकक के कुछ उपकरणों के बीच संचार इटं रनेट के माध्यम से स्थालपत लकया जाता है
जबलक शेष उपकरण लवशेषीकृ त िाइनों द्वारा जड़ु े होते हैं। इसमें सचू ना की गोपनीयता बनाये रखने के लिए कोलडंग तकनीक
का रयोग लकया जाता है।
सस्ं थाओ ं िें प्रयोि के आधार पर नेटिकक
• इरं ानेट (Intranet)- लकसी संस्था के लनयंत्रण के भीतर स्थालपत कम्पप्यटू र नेटवकक लजसमें इटं रनेट पर रयि ु हाडकवेयर, सॉफ्टवेयर तथा
इटं रनेट रोटोकाि का रयोग लकया जाता हैं, इट्रं ानेट कहिाता है।
• एक्स्रानेट (Extranet)- लकसी संस्था के लनयंत्रण में लस्थत नेटवकक जो लकसी अन्य नेटवकक तथा इटं रनेट से भी जड़ु ा होता है,
एक्स्ट्रानेट कहिाता है। एक्स्ट्रानेट अन्य नेटवकक से जड़ु े उपयोगकताकओ ं को अपने नेटवकक के सीलमत उपयोग का अलधकार िेता है। इस
तरह एक्स्ट्रानेट एक िोकि एररया नेटवकक है जो लकसी अन्य नेटवकक जैसे लक इटं रनेट से जड़ु ा है।
3 विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
• ईथरनेट (Ethernet) - वतकमान समय में कम्पप्यटू रों को आपस में जोड़ने के लिए नेटवकक कॉडक का रयोग करते हैं। उसे ईथरनेट कॉडक
कहते हैं। इस कॉडक के कारण से नेटवलकिं ग को ईथरनेट नेटवलकिं ग कहा जाता है।
• इरनेट (Ernet) - यह लशक्षा व अनसु ंधान नेटवकक का संलक्षप्त रूप है। यह िेश के मख्ु य शैक्षलणक संस्थान व अनसु ंधान के न्र को
जोड़ती है।
क्लाउि कम्प्यूवटंि नेटिकक
बािि के आकार का एक ऐसा नेटवलकिं ग क्षेत्र है लजसमें एक पसकनि कम्पप्यटू र या एक मोबाइि अन्य हजारों या िाखों मोबाइि व पसकनि
कम्पप्यटू रों से इटं रनेट के द्वारा जड़ु ा होता है। जब कई पसकनि कम्पप्यटू र अन्य कई पसकनि कम्पप्यटू रों से जड़ु जाते हैं। तो यह क्िाउड कम्पप्यलू टंग
नेटवकक कहिाता है।
नेटिकक टोपोलॉजी (Network Topology)
लकसी नेटवकक के नोडस को परस्पर जोड़ने के तरीके को टोपोिॉजी कहते हैं।
1. रेखीय या बस टोपोलॉजी
• इसमें सभी कम्पप्यटू र एक के बि से जड़ु े होते हैं।
• कम्पप्यटू रों को जोड़ने के लिए सामान्यतः कोएलक्शअि के बि काम में
लिया जाता है।
• यह सबसे सरि रकार की टोपोिोजी है।
• कम्पप्यटू र के खराब हो जाने पर भी शेष नेटवकक कायक करता है।
• इस टोपोिॉजी में नेटवकक का लनयंत्रण कें रीयकृ त नहीं होता है, अतः कहीं भी कोई खराबी आ जाने पर उसे ढूंढना मलु श्कि हो जाता
है।
2. िृत्ताकार या िलय टोपोलॉजी (सककु लर और ररंि टोपोलॉजी) Device 3
• सभी नोडस एक विय में जड़ु े रहते है
• नोडस को परस्पर जोड़ने के लिए टलवस्टेड पेयर कोएलक्सअि के बि
अथवा ऑलप्टकि फाइबर के बि काम में लिए जाते है Device 2 Device 4
• रत्येक नोड अपने समीपवती िो नोडस से जड़ु ा रहता है व एक नोड से
डाटा राप्त करता है तथा िसू रे नोड को डाटा संचाररत करता है।
• इसमें यलि कोई भी एक कम्पप्यटू र ठीक से कायक न करे तो परू ा नेटवकक फे ि Device 1
हो सकता है।
3. स्टार टोपोलॉजी
• इस टोपोिोजी में सभी नोडस एक के न्रीय कम्पप्यटू र से जड़ु े होते है लजसे
हब (Hub) या होस्ट (Host) कहा जाता है।
• कोई भी िो नोडस सीधे नहीं जड़ु े होते ।
Hub
• नोडस के मध्य संचार के न्रीय कम्पप्यटू र के माध्यम से ही होता है ।
• एक नोड ख़राब होने पर शेष नेटवकक पर रभाव नहीं। परंतु के न्रीय नेटवकक
के फे ि होने पर परू ा नेटवकक बंि हो जाता है।
Central hub
4. िृक्ष टोपोलॉजी (Tree Topology)
• इस टोपोिॉजी में नोडस को पिानक्र ु म (Hierarchical) तरीके से जोड़ा
जाता है।
Secondary hub Secondary hub
• पिानक्र
ु म में सबसे ऊपर वािे नोड को रूट नोड कहते है ।
• रूट नोड के उपनोड होते हैं जो रूट नोट से पिानक्र
ु म में जड़ु े होते है ।
• इस टोपोिोजी में डाटा संचरण बस टोपोिॉजी की तरह होता है ।
4 विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
5. ग्राफ या जाल टोपोलॉजी (Graph or िेस topology)
• इसमें सभी कम्पप्यटू र एक के बि से जड़ु े होते हैं।
• कम्पप्यटू रों को जोड़ने के लिए सामान्यतः कोएलक्शअि के बि काम में लिया
जाता है।
• यह सबसे सरि रकार की टोपोिोजी है।
• कम्पप्यटू र के खराब हो जाने पर भी शेष नेटवकक कायक करता है।
Network Devices (नेटिकक युविया)
वे उपकरण या इकाई जो कम्पप्यटू र नेटवकक में डाटा का आिान रिान करने के लिए रयि ु होती है, नेटवकक उपकरण भी कहते है
1. िॉिेि (Modem)
• इसका मख्ु य उद्देश्य ऐसे सक ं े त (signals) उत्पन्न करना है, लजन्हें एक कम्पप्यटू र से िसू रे कम्पप्यटू र तक आसानी से कम व्यय में
भेजा जा सके ।
• लडलजटि सक ं े तों को एनािॉग में बििना मोडयि ु ेशन तथा इसका लवपरीत करना लडमोडयि ु ेशन कहिाता है।
2. पुनराितकक (Repeater)
• सभी सचं रण माध्यमों में सक ं े त कुछ िरू चिने के पश्चात कमजोर जाते है ।
• इन कमजोर संकेतों को पररवलधकत करने वािी यलु ि को ही ररपीटर कहते हैं।
3. विज
लिज एक ऐसी यलु ि है जो अिग- अिग संचार माध्यम रयि ु करने वािे नेटवको को आपस में जोड़ने का काम करते है ।
जैसे :- नोडस की सख्ं या बढ़ने पर अिग-अिग LAN को आपस में जोड़ना
• यह भी लसग्नल्स को एक भाग से िसू रे भाग में भेजने का कायक करता है ।
4. राऊटर (Router) :- राउटर इससे जड़ु े सभी नेटवकों से डाटा राप्त करता है । वह पहचं ने के पते के आधार पर इन्हें आगे रेलषत कर
िेता है ।
5. िेटिे :- यह भी लिज पर राउटर की तरह अिग-अिग नेटवकों को परस्पर जोड़ने वािी यलु ि है ।
• इसकी सहायता से िो एकिम लभन्न रकार के नेटवकक को जोड़ा जा सकता है ।
• गेटवे डाटा को आगे मागक रिान करने के अिावा यह डाटा को एक नेटवकक से िसू रे नेटवकक में भेजने से पहिे उसका आवश्यक
रूपांतरण भी करता है ।
6. होस्ट :- लकसी एक कंप्यटू र को होस्ट तभी कहा जा सकता है ।
• जब वह कुछ ऐसी सेवाएं रिान करता हो, लजनका उपयोग नेटवकक से जड़ु े िसू रे कंप्यटू र या उपकरण कर सकें ।
7. आरजे 45 सयं ोजक :- यह के बि जैसी लिखती है ।
• इसका उपयोग स्थानीय या िरू स्थ स्थानों पर लस्थत लवलभन्न िरू संचार और डाटा उपकरणों को परस्पर जोड़ने के लिए लकया
जाता है
• इसमें आठ लपने होती है ।
8. इथरनेट कािक :- इसे नेटवकक इटं रफे स काडक भी कहा जाता है
• यह एक LAN अनक ु ू िक है ।
• लकसी कंप्यटू र को LAN से जोड़ने के लिए इसे मिरबोडक के स्िॉट में िगाया जाता है।
• इस काडक से के बि को जोड़ने पर कंप्यटू र LAN से जड़ु जाता है
9. नोि :- LAN से जड़ु ी कोई भी यलु ि या उपकरण जैसे- कंप्यटू र, लरटं र, प्िॉटर, मॉडेम आलि नोड कहिाते हैं ।
10. हब :- यह LAN में एक कें र लबंिु का कायक करता है ।
• LAN के सभी नोडस के बि द्वारा हब से जड़ु े होते हैं ।
• एक LAN के लकसी िो नोडस के बीच होने वािे संचार में समस्त डाटा संकेत हब के माध्यम से ही होकर गजु रते हैं ।
11. बैकबोन:- यह एक उच्च बैंड लवडथ सयं ोजक है, लजससे अनेक नोड व हब जोड़े जा सकते हैं ।
• इसके माध्यम से बहत सा डाटा एक साथ गजु र सकता है ।
5 विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
12. वस्िच :- लस्वच हब की तरह एक ऐसी नेटवकक यलु ि है जो लवलभन्न नोडस को परस्पर जोड़ने का कायक करती है ।
• हब में एक स्रोत से राप्त डाटा या सचू ना हब से संबंलधत सभी यलु ियो को भेजी जाती है ।
• वही लस्वच में स्रोत से राप्त डाटा या सचू ना गंतव्य पते के अनसु ार के वि गंतव्य कंप्यटू र या गंतव्य यलु ि को ही रेलषत की जाती
है ।
इन्फ्टरनेट टे क्नोलॉजी Internet Technology :
इन्फ्टरनेट : इन्टरनेट कंप्यटू रो का एक लवशाि नेटवकक है, जो लवश्व भर में फै िे हए छोटे बड़े कंप्यूटरों को आपस में जोड़ता है । यह एक ऐसा
जाि है जो टेिीफोन िाइनों के वि अथवा लवलभन्न बेतार माध्यमों से िलु नया भर के कंप्यटू रों को परस्पर सम्पपलकक त करता है ।
इटं रनेट के िो मानक रोटोकॉि है:-
1. TCP ( रांसविशन कंरोल प्रोटोकॉल) 2. IP (इटं रनेट प्रोटोकॉल)
उपयोगकर्त्ाक को इन्टरनेट सेवाएाँ िेने के लिए सामान्यत: 2 रकार के कनेक्शन लमिते हैं-
1. िायल-अप 2. िायरेक्ट
1. िायल अप कनेक्शन में उपयोगकताक अपने कंप्यटू र से अपने ISP (इटं रनेट सेवा रिाता) का एक लवशेष नंबर डायि कर इटं रनेट से
जड़ु ता है । यह एक अस्थाई कनेक्शन होता है ।
2. िायरेक्ट कनेक्शन में उपयोगकर्त्ाक ISP से सीधे एक के बि या समलपकत फोन िाइन से जड़ु ा होता है
िर्लिक िाइि िेब (www)
• यह मि ू रूप से एक सचू ना संग्रह करने का स्थान है जहां िस्तावेज और वेब संबंलधत संसाधनों को यलू नफॉमक ररसोसक िोके टर द्वारा
पहचाना जा सकता है ।
• इन िस्तावेजों पर हाइपरलिंक के द्वारा इटं रनेट के माध्यम से पहचं ा जा सकता है ।
िेब िाउजर
• कंप्यटू र पर एक रकार का सॉफ्टवेयर जो इटं रनेट तक पहचं उपिब्ध करवाता है । जैसे:- इटं रनेट एक्स्प्िोरर, मोलजिा फायर फोक्स,
गगू ि क्रोम, सफारी आलि।
िेब सिकर
• वेब सवकर, िाउज़र को वेब पेज और वेबसाइटस उपिब्ध कराने में अहम भलू मका लनभाता है।
• यह लवश्व भर के वेब िाउज़र से आने वािे अनरु ोध को उर्त्र िेने के लिए उर्त्रिायी होता है ।
िेब प्रोटोकॉल
• वेब पर सचू नाओ ं के आिान-रिान के लिए लजन रोटोकॉि का उपयोग लकया जाता है, उन्हें वेब रोटोकॉि कहते हैं ।
• इन रोटोकॉि से लवलभन्न वेब पेज, वेब सवकर से िाउज़र तक भेजे जाते हैं । जैसे :- TCP/IP, HTTP, FTP आलि ।
HTTP (हाइपर टे क्स्ट रान्फ्सफर प्रोटोकॉल)
• यह एक तकनीक है, जो यजू र के द्वारा लकसी हाइपरटेक्स्ट लिंक को सेिेक्ट लकए जाने पर संबंलधत डॉक्यमू ेंट को खोिता है, चाहे वह
कहीं भी हो ।
URL Address (URL पता)(यूवनफािक ररसोसक लोके टर)
• यह एक वेब पता है लजसे लकसी वेबसाइट तक पहचं ाने के लिए िाउज़र पर लिखा जाता है।
• रत्येक वेबसाइट का एक यआ ू रएि होता है ।
जैसे :- [Link] - रत्येक URL का एक IP पता (Address) भी होता है ।
IP (Internet Protocol) (इटं रनेट प्रोटोकॉल)
• IP पता संख्याओ ं की एक श्ृंखिा है, जो कप्यटू र को यह बताती है लक जो जानकारी ढूंढी जा रही है, वह कहां लमिेगी।
6 विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
हाईपर टे क्स्ट िाकक अप लैंग्िे ज (HTML)
• िैंग्वेज वेब पेजों को लवकलसत करने में काम आती है, HTML कहिाती है।
• HTML ही वह िेंग्वेज है, जो िाउजर द्वारा समझी जाती है।
• वेब पेजों को HTML डॉक्यमू ेंट भी कहते हैं।
िेबपेज (Webpage)
• लकसी वेबसाइट का सबसेट होता है अथाकत लवलभन्न वेबपेजो से लमिकर एक वेबसाइट बनती है।
िोिेन नाि
• यह एक ऐसा तरीका है लजससे लक इन्टरनेट पर काम कर रहे कम्पप्यटू रों को पहचाना और ढूंढा जाता है। लकसी भी संस्था के िो डोमेन
नाम नहीं हो सकते हैं।
• डोमेन नेम की कुछ श्ेलणयााँ -
(i) .com - व्यावसालयक सस्ं था (ii) .edu – शैक्षलणक सस्ं था (iii) .gov – सरकार अथवा सरकारी सस्ं था
DNS (िोिेन नेि वसस्टि)
• DNS डोमेन नेम तथा आईपी पिों को लमिाने का कायक करता है । यह डाटा का एकत्रीकरण करता है ।
• यह पद्धलत इटं रनेट रयोगकताकओ ं को एक आसान डोमेन नेम रयोग करने की सलु वधा िेता है । लजससे लक उन्हें तरह-तरह के आईपी
नंबरों को याि न रखने पड़े ।
खोज इजं न (Search Engine)
• ऐसे कंप्यटू र रोग्राम जो लकसी कंप्यटू र लसस्टम पर भंडार सचू ना में से वांलछत सचू ना को ढूंढ लनकािते हैं, जैस:े Google, YAHOO,
bing आलि ।
इटं रनेट प्रोटोकॉल िजकन 6(IPv6):
• यह ipv4 का उन्नत रूप है ।
• इटं रनेट रोटोकॉि एक रकार का संचार रोटोकॉि होता है लजसका इस्तेमाि नेटवकक पर डाटा पैकेट भेजने के लिए होता है ।
• ipv4 में पतों के लिए 32 बीट की जगह थी लजसकी वजह से िगभग 4.3 अरब आईपी एड्रेस संभव ।
• परंतु मोबाइि, इटं रनेट, िॉडबैंड सेवाओ ं की वजह से अलधक पतों के लिए ipv6 का उपयोग, लजसमें 128 बीट की जगह ।
• इसमें असीलमत आईपी एड्रेस है ।
MAC Address (Media Access Control Address)
• इसे physical address या hardware address भी कहते है।
• यह एक तरह से आईडेंलटलफके शन रूप में 12 अक
ं ों का नम्पबर होता है।
• शरू
ु के 3 अक ं ों को OUI (Organisation Unique Identifier) कहते हैं, लजनकी सहायता से मेन्यफ
ु े क्चरर की आईडेंलटटी की
जाती है।
नेट वनरप्रेक्षता या नेट न्फ्यूरेवलटी
• शब्ि का सवकरथम रयोग कोिंलबया लवश्वलवद्यािय में रोफे सर ‘टीम व’ू ने लकया ।
• इसे नेटवकक तटस्थता/ इटं रनेट लनरपेक्षता/ नेट सामान्य भी कहते हैं ।
• इस लसद्धांत के तहत रत्येक व्यलि को इटं रनेट पर उपिब्ध सामग्री वेबसाइट तथा एप्स तक समान रूप से पहचं हेतु स्वतंत्र होना
चालहए ।
• यह पहचं स्रोत के आधार पर अिग नहीं होनी चालहए ।
• इटं रनेट सेवा रिाताओ(ं ISPs) द्वारा ऑनिाइन सेवा एप या वेबसाइट के साथ भेिभाव नहीं करना चालहए अथाकत इटं रनेट से जोड़ने
वािी कंपनी का लनयंत्रण इस पर नहीं होना चालहए लक उपभोिा इटं रनेट पर क्या करते हैं ।
7 विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
िीप नेट/ िाकक नेट
• इटं रनेट पर ऐसी कई वेबसाइट है जो सामान्यतः उपयोग में आने वािे गगू ि, लबगं जैसे सचक इजं नों और सामान्य िाउलजगं के िायरे से
परे होती है ।
• सामान्य वेबसाइटों की लवपरीत यह एक ऐसा नेटवकक होता है लजस तक िोगों के चलु नंिा समहू की पहचं होती है और इस नेटवकक तक
लवलशष्ट ऑथराइजेशन रलक्रया सॉफ्टवेयर और कंफीग्रेशन के माध्यम से ही पहचं ा जा सकता है।
पहुंच के आधार पर इटं रनेट
1. सतही िेब (surface web) :- यह इटं रनेट का वह भाग है, लजसे सामान्य लिन-रलतलिन के कायों में रयोग करते हैं ।
2. िीप िेब (Deep web) :- इसमें लकसी डॉक्यमू ेंट तक पहचं ने के लिए उसके यआू रएि एड्रेस पर जाकर िोग इन करना होगा, लजसके
लिए पासवडक और यजू र नेम का रयोग करना होगा । जैसे -जीमेि अकाउंट, अकािमी डाटाबेस ।
3. िाकक िेि/िाकक नेट :- इटं रनेट का वह भाग, लजसे सामान्यतः रयिु लकये जाने वािे सचक इजं न से एक्सेस नहीं लकया जा सकता।
• आमतौर पर मानव तस्करी मािक पिाथों की खरीि और लबक्री, हलथयारों की तस्करी जैसी अवैध गलतलवलधयों में लकया जाता है।
विवजटल वििाइि
लडलजटि लडवाइड, इटं रनेट और संचार रौद्योलगलकयों के उपयोग और रभाव के संबंध में एक आलथकक और सामालजक असमानता है। अथाकत
लडलजटि लडवाइड उन िोगों के बीच का अतं र है लजनके पास तकनीक, इटं रनेट और लडलजटि साक्षरता रलशक्षण तक पहचं है और लजनके
पास नहीं है।
8 विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
03
1
एनालॉि और विविटल दूरसच
ं ार
सचू ना तकनीक में डाटा सचं रण के लिए सामान्यतः लिद्यतु सक
ं े तों का उपयोग लकया जाता है और इसी से सचं ार सम्भि हो पाता है।
यह सचं ार दो प्रकार का होता है- 1. एनालॉि सच
ं ार 2. विविटल सच ं ार
1. एनालॉि सच ं ार में, डाटा को ट्ांसमीटर और ररसीिर के मध्य एनािॉग लसग्निस की सहायता से स्थानांतररत लकया जाता है। इसमें
समय के साथ िगातार आयाम पररिलतित होता रहता है। सभी प्रकार के डाटा जैसे आिाज, ध्िलन आलद को एनािॉग लसग्नि के माध्यम
से स्थानांतररत लकया जा सकता है।
2. विविटल सच ं ार िह है जो ट्ांसमीटर और ररसीिर के मध्य सचू ना प्रसाररत करने के लिए लडलजटि संकेतों का उपयोग करता है।
लडलजटि संकेतों को एक िगि तरंग द्वारा दर्ािया जाता है। इस लसग्नि में लनरंतर मानों के बजाय असतत मान होते हैं।
कंप्यटू र लडलजटि डाटा काम में िेता है। कंप्यटू र डाटा सचं रण के लिए भी लडलजटि लसग्नल्स काम में लिए जाते हैं। लकंतु दो कंप्यटू रों के
बीच डाटा संचरण में सिािलिक प्रयक्त
ु होने िािा माध्यम (टेिीफोन िाइन) एनािॉग लसग्नि ही संचररत कर पाता है।
अतः डाटा सचं रण से पहिे कंप्यटू र द्वारा भेजे गए लडलजटि सक ं े तों को एनािॉग संकेतों में बदिना पड़ता है लजसे मोड्यि ू ेर्न
(Modulation) कहते हैं। इसी प्रकार टेिीफोन िाइन में संचररत एनािॉग संकेतों को सीिा कंप्यटू र को नहीं भेजा जा सकता है। कंप्यटू र को
भेजने से पिू ि एनािॉग सक
ं े तो को लडलजटि संकेतों में बदिना पडता है लजसे लडमोडयि ू ेर्न (Demodulation) कहा जाता है। मोड्यि ू ेर्न
(Modulation) एिं लडमोडयि ू ेर्न (Demodulation) का काम मॉडेम (Modem) द्वारा लकया जाता है।
एनालॉि सच
ं ार विविटल सच
ं ार
• यह एनािॉग लसग्नि का उपयोग करता है। • यह लडलजटि लसग्नि का उपयोग करता है।
• एनािॉग संकेतों को रे खीय तरंगों द्वारा लनरूलपत लकया जाता है। • लडलजटि संकेतों को िगािकार तरंगों द्वारा लनरूलपत लकया जाता
है।
• एनािॉग लसग्नि में लनरंतर मान होते हैं। • लडलजटि संचार संकेतों में असतत मान होते हैं।
• ये संचार र्ोर से प्रभालित होते हैं। • ये संचार र्ोर से प्रभालित नहीं होते हैं।
• लिचिन के कारण एनािॉग लसग्नि में त्रलु ट की सभं ािना • लडलजटि लसग्नि पर लिचिन का कोई प्रभाि नहीं होता है।
अलिक होती है।
• एनािॉग संचार के लिए जलटि हाडििेयर, कम बैंडलिड्थ और • लडलजटि संचार के लिए कम जलटि हाडििेयर, उच्च
उच्च र्लक्त की आिश्यकता होती है। बैंडलिड्ध और कम र्लक्त की आिश्यकता होती है।
• एनािॉग संचार अपेक्षाकृ त सस्ता है। • लडलजटि संचार प्रकृ लत में महगं ा है।
उदाहरण - ध्िलन सचं ार उदाहरण - कंप्यटू र सचं ार
2 विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
04
1
आिवृ ि स्पैक्टरम
आिृवि स्पैक्टरम
विद्यतु चम्ु बकीय तरंगों का समहू आिृवत स्पैक्टरम कहलाता है।
• ‘स्पैक्टरम’ इलेक्टरोमैग्नेविक स्पैक्टर म का एक लघु रूप होता हैा यह ऊर्ाा का एक प्रकार है र्ो पृिी को चारों ओर से घेरे हुए है। इसका
प्रमख
ु स्रोत ‘सयू ा’ है।
• विद्यतु चम्ु बकीय तरंगों (अयावं िक तरंगें) र्ो आिृवत और तरंगदैर्धया के क्रम में िगीकरण विद्यतु चम्ु बकीय स्पैक्टरम कहलाता है।
• विद्यतु चम्ु बकीय स्पैक्टरम का िह भाग र्ो सचं ार हेतु प्रयक्टु त होता है एक राष्टरीय ससं ाधन के रूप में उल्लेवखत वकया र्ाता है।
• स्पैक्टरम का व्यािसावयक इस्तेमाल करने के वलए तरंग की लम्बाई, तरंग की आिृवत, ऊर्ाा िहन क्षमता ि दरू ी पर वनभार करता है।
• सबसे लम्बी तरंगें रे वियो िेि स्पेक्टरम की होती है वर्सका इस्तेमाल िेलीकॉम सेक्टि र में वकया र्ाता है।
• भारत में 5G को छोिकर स्पेक्टरम नीलामी िाली आिृवतयााँ-
700 MHz 800 MHz 900 MHz 1800 MHz 2100 MHz 2300 MHz 2500 MHz
• स्पेक्टरम नीलामी अिवध- 20 िर्ा
• 5G के वलए 3500 MHz (3.5 GHz) बैंि को आदशा माना र्ाता है-
• नीलामी हेतु मल्ू य आरवक्षत मल्ू य से अवधक रखा र्ाता है। इसकी वसफाररश भारतीय दरू संचार आयोग करता है।
• आरवक्षत मल्ू य- िह न्यनू तम मल्ू य वर्से एक विक्रेता, खरीददारो से स्िीकार करने के वलए तैयार करता है। यवद मल्ू य आरवक्षत मल्ू य से
कम होता है विक्रेता स्पैक्टरम बेचने हेतु बार्धय नहीं होगा।
• िायरलेस संचार के वलए 3KHz से लेकर 900 THz तक की आिृवत परास में चार प्रकार की विद्यतु चम्ु बकीय तरंगे सवम्मवलत की
र्ाती है- • दृश्य तरंगे – 400 GHz – 800 THz
दृश्यतरंगे अिरक्टततरंगे सक्ष्ू मतरंगे रे वियोतरंगे • अिरक्टत तरंगे – 300 GHz – 400 GHz
(VR) (IR) (MW) (RW) • सक्ष्ू म तरंगे – 1 GHz – 300 GHz
(400-800 THz) (300-400 GHz) (1 GHz-300 GHz) (3 KHz-1 GHz) • रे वियो तरंगे – 3 KHz – 1 GHz
रेवियो िरंिें सक्ष्ू म िरंिें
आिृवि परास 3KHz -1GHz आिृवि परास 1 GHz -300 GHz
• इस प्रकार की EMR सभी वदशाओ ं में गवत करने • के िल एक ही वदशा में गवतमान हो सकती है इसके वलए
में सक्षम होती है। इनकी तरंगदैर्धया की लम्बाई आिश्यक है वक रासं मीिर ि ररसीिर िाले एिं ीना को एक ही
सिाावधक होती है, इसवलए ऊर्ाा सबसे कम होती वदशा में होना आिश्यक है।
है अत: स्िास््य के वलए हावनकारक स्तर नहीं • यह अिरोधों (दीिार, पहाि, पिातों) को भेदने में सक्षम नहीं
होता है। • हालांवक बिी मािा में सचू ना का िहन करने की क्षमता इसकी
• इनका उपयोग AM ि FM रे वियो िेलीविर्न ि िायरलेस फोन विशेर्ता है।
में वकया र्ाता है। • इसका उपयोग रिार ि उपग्रहों में वकया र्ाता है। Point to
अिरक्टि िरंिें Point Communication (यवू नकास्ि संचार)
आिवृ ि 300 GHz -400 GHz
• उच्च आिृवि तरंगे
• ठोस िस्तओ ु ं को भेदने में सक्षम नहीं
• छोिी दरू ी के सचं ार हेतु उपयक्टु त-Point to point Communication यथा-
✓मोबाइल से मोबाइल ✓ मोबाइल से वप्रंिर ✓ ररमोि कंरोल से TV ✓ ब्लिू ू थ वििाइस-माउस, की-बोिा
2 विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
दृश्यमान िरंिें
आिवृ ि 400 - 800 THz
विविन्न आिृवि बैण्ि िथा उनके अनुप्रयोि
बैण्ि का नाम ITU बैण्ि विक्टिेंसी अनप्रु योि
अत्यंि कम विक्टिेंसी (ELF) 1 3-30 Hz अतं र्ालीय संचार (पाइप लाइन, पनिुवब्बयो में)
सपु र लॉ विक्टिेंशी (SLF) 2 30-300 Hz पनिुब्बी संचार, विद्यतु वग्रि संचार
अल्टरा लॉ विक्टिेंशी (ULF) 3 300 Hz-3KHz पनिुब्बी संचार ि खनन संचार
िेरी लॉ विक्टिेंशी (VLF) 4 3KHz-30KHz नेिीगेशन, िाईम वसग्नल, िायरलेस हािा मॉवनिररंग
भ-ू भौवतकी अनप्रु योग
लो विक्टिेंशी (LF) 5 30-300KHz RFID, िाइम वसग्नल
मीवियम विक्टिेंसी (MF) 6 300 KHz – 3 MHz AM ब्रोिकावस्िंग, ति से समद्रु ी संचार (दीघातरंग)
इमरर्ेंसी विस्रेस वसग्नल
रे वियो
हाई विक्टिेंसी (HF) (लघु 7 3MHz-30MHz लघु तरंग ब्रोिकास्ि, FRID, सामदु ावयक तथा
िरंि बैण्ि) मोबाइल रे वियो संचार, विमानन संचार, मौसम संचार
िेरी हाई विक्टिेंसी (VHF) 8 30 MHz-300 MHz MRI, एनालॉग िेलीविर्न प्रसारण, समद्रु ी संचार,
एयरक्राफ्ि संचार
अल्टरा हाई विक्टिेंसी (UHF) 9 300 MHz-3GHz उपग्रह िेलीविर्न, wifi, GPS, ब्लिू ू थ, GSM,
CDMA, LTE (मोबाइल)
सपु र हाई विक्टिेंसी (SHF) 10 3GHz-30GHz रे वियो एस्रोनोमी, आधवु नक संचार उपग्रह, DTH
सेिाएाँ, TV प्रसारण उपग्रह माइक्रोिेि उपकरण
अत्यंि हाई विक्टिेंसी (EHF) 11 30GHz-300GHz ररमोि सेंवसंग, रे वियो खगोल विज्ञान, वनदेवशत ऊर्ाा
शास्ि
अिीि उच्च विक्टिेंसी (THF) 12 300GHz-3THz मेविकल इमेवर्ंग स्पेक्टरोस्कोपी, सदु रू संिेदन, AM
रे वियो (एमेचर रे वियो)
लोकवप्रय प्रसारण एिं आिृवि बैण्ि
मानकAM प्रसारण 540 KHz – 1600 KHz 106 संभावितबैंि
FM प्रसारण 88 – 108 MHz 100 संभावितबैंि
िेलीविर्न 54-72 MHz VHF
76-88 MHz TV
174-216 MHz UHF
420-890 MHz TV
मोबाइल 896-901 MHz मोबाइल से आधार स्िेशन
रे वियो 840-935 MHz आधार स्िेशन से मोबाइल
उपग्रह संचार 5.925-6.425 GHz Uplink
3.7-4.2 GHz Downlink
3 विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
आिृवि स्पैक्टरम की विशेतिाए
(i) यह अतं ररक्ष में ऊर्ाा के संचार को समझने में मदद करता है।
(ii) यह परमाणु और आवविक संरचनाओ,ं खगोलीय घिनाओ ं और संचार, इमेवर्ंग प्रौद्योवगकी के अर्धययन में मदद करता है।
(iii) यह EMR की भौवतकी घिनाओ ं को व्यिवस्थत करने और मानवचिण करने में मदद करता है।
सच
ं ार स्पैक्टरम
ऐसी EMR तरंगे वर्नके समहू का संचार के वलए उपयोग में लाया र्ाता है उसे संचार स्पैक्टरम की संज्ञा दी र्ाती है।
संचारस्पैक्टरम
IR SR LR
रे वियोिेिस्पैक्टराम
वनयरकम्यवू नके शन शॉिारे वियो िेि लोंगरे वियो िेि
Remote
दरू संचारहेतु
नोिावमसाइल
हेवलनामाइक्रोिेि
ओिेन
4 विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
06
1
सूचना और सच
ं ार प्रौद्योविकी
सच
ू ना
• अर्थपर्ू थ आँकड़ों के समहू को सचू ना कहा जाता है।
यर्ा
✓ लिलित टेक्स्ट ✓ लचत्र आँकडे ✓ ध्वलन आँकडे
✓ चिलचत्र आँकडे ✓फोटो आँकडे ✓ 3D डाटा आँकडे
✓ वीलडयो आँकडे
• सचू ना के उपयोग से सबं लं ित प्रौद्योलगकी को सचू ना प्रौद्योलगकी की सज्ञं ा दी जाती है। सचू ना प्रौद्योलगकी वह टेक्सनोिॉजी है, जो
सचू ना को तीव्र, त्रलु टरलहत व उपयक्त
ु तरीके से संसालित, संचाररत कर उपयोगी बना सकती है।
सच
ू ना प्रौद्योविकी: कम्प्यूटर हार्डिययर सफ्टिययर ंटं रनयट
सच
ं ार
• सच ं ार एक प्रकार का माध्यम होता है, इसकी सहायता से सूचनाओ ं को एक ्र्ान से दसू रे ्र्ान पर भेजा जाता है। संचार के
माध्यम कई प्रकार के होते हैं; यर्ा इिेक्सरीकि माध्यम, इिेक्सरॉलनक माध्यम एवं ऑलटटकि माध्यम।
• संचार के लिए एक व्यवल्र्त संचार तंत्र होता है। इसके लनम्नलिलित अवयव होते हैं-
(i) सचू ना
(ii) लसग्नि भेजने का स्त्रोत - रांसमीटर
(iii) संचरर् का माध्यम
(iv) लसग्नि प्राप्त करने का स्रोत (गंतव्य) ररसीवर
अर्ाथत्
सच ू ना → वसग्नल स्रोत → ट्ांसमीटर
ितं व्य ←ररसीिर ←सच ं ार माध्यम
• ट्ांसमीटर : सचू ना को लवद्यतु तरंग़ों में बदिता है।
• ररसीिर : लवद्यतु तरंग़ों को सचू ना के रूप में पनु ः प्राप्त करता है।
• भारत सचू ना एवं सचं ार प्रौद्योलगकी में अग्रर्ी देश है अतः भारत को 'सच
ू ना अर्डव्यिस्र्ा' या 'ज्ञान अर्डव्यिस्र्ा' कहा जाने
िगा है।
o आिलु नक यगु में संचार को संचार क्ांलत की संज्ञा दी जाने िगी है। यह बहुत गहराई से सचू ना प्रौद्योलगकी से जुडा हुआ प्रतीत
होता है। शायद इसीलिए इसे सचू ना एवं सचं ार प्रौद्योलगकी (ICT) कहा जाने िगा है।
o सचं ार प्रौद्योलगकी के माध्यम से सचू नाओ ं को अल्प समय में बहुत दरू तक भेजा जा सकता है। इसीलिए सचं ार प्रौद्योलगकी को
दरू -संचार प्रौद्योलगकी भी कहा जाता है।
सच ं ार की विवियााँ
संप्रेषर् को आिार बनाकर इन्हें दो भाग़ों में लवभालजत लकया जाता है-
विन्दु सय विन्दु तक सच
ं ारण
इसमें सचू ना एक लनलित ्र्ान से दसू रे लनलित ्र्ान पर भेजी जाती है। इस प्रकार के सचं ार में सचू ना एक लनलित ्र्ान से ही भेजी जाती है।
इसलिए इस संचार लवलि में एक रांसमीटर व एक ही ररसीवर का प्रयोग परन्तु उसे एक सार् अनेक़ों गंतव्य़ों पर प्राप्त लकया जाता है। इसलिए
लकया जाता है उदाहरर् के लिए िैंडिाइन फोन, मोबाइि फोन संचार। इसमें रांसमीटर तो के वि एक ही होता है परन्तु ररसीवर अनेक होते
हैं। उदाहरर् के लिए-रे लडयो व टेिीफोन संचार।
2 विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
सचं ार कय माध्यम
वृहत् ्तर पर इन्हें दो भाग़ों में बाँटा जाता है-
(I) तार सच
ं ार माध्यम (II) ियतार सच
ं ार माध्यम
I. तार सवहत सच ं ार माध्यम
• इस प्रकार के संचार के लिए अलनवायथ रूप से भौलतक तार का प्रयोग लकया जाता है। यह प्रमि
ु रूप से तीन प्रकार का होता है-
(1) खलु य तार युग्म (Open Wire Pair)
इसे Two Wire Transmission Line भी कहा जाता है। इसमें ताँबे के दो तार प्रयक्त
ु होते हैं तर्ा इस पर कुचािक पदार्थ की
परत चढी रहती है।
इसका प्रयोग सामान्यतः टेिीफोन िाइन के ताऱों में होता है।
सकारात्मक पक्ष नकारात्मक पक्ष
• यह व्यव्र्ा तुिनात्मक रूप से स्ती है। • इसकी क्षमता तुिनात्मक रूप से कम होती है।
• इसे इ्ं टॉि करना आसान है। • सचू ना संप्रेषर् दर अत्यंत िीमी होती है।
(2) को-एवससयल कय िल (Co-Axial Cable)
इस सच
ं ार कय िल कय कय न्र में तााँिें का तार चालक कय रूप में अवल्र्त होता है। इसके चाऱों ओर एक शील्ड होती है जो ताऱों
की एक जािी जैसी संरचना होती है।
सच
ं ार की विवियााँ तकनीकी वगीकरर्
सच
ं ार की विवियााँ
वसम्प्लयसस विवि र्ु्लयसस विवि अर्द्ड र्ु्लयसस विवि
(Simplex Method) (Duplex Method) (Half Duplex Method)
इस विवि में सच ू नाओ ं आाँकड़ों ि इस लवलि में सचू नाओ,ं आँकड़ों व इस लवलि में आँकड़ों, सचू नाओ ं व
र्ाटा को कय िल एक ही वदशा में डाटा को दोऩों वदशाओ ं में सप्रं यवित डाटा को दोऩों लदशा में भेजना सभं व
भेजा जाना सभं व हो पाता है। लकया जा सकता है। है परन्तु एक बार में एक ही वदशा में
उदाहरर् के लिए-टी.िी. ि रयवर्यो यर्ा सप्रं ेषर् हो पाता है।
का प्रसारण मोिांल ि टय लीफोन पर िाताड यर्ा
रयवर्यो, िफकी-टफकी पर िाताड
• इस शील्ड व ताँबें के तार के बीच टेिीफोन की एक कुचािक परत होती है।
• इस के बि का प्रयोग टी.वी. लसग्नि़ों में लकया जाता है।
सकारात्मक पक्ष नकारात्मक पक्ष
• ििु े तार यग्ु म में लनलहत कलमय़ों का समािान कर लिया गया। • प्रकाशीय तन्तु की तुिना में सचू ना संचरर्की गलत कम होती है।
• संकेत़ों की हालन कम होती है। • िि ु े तार यग्ु म की तुिना में काफी महगं े होते है।
• बाह्य वातावरर् के प्रलत कम संवेदनशीि होता है। • लनलित आवृलि पर प्रयोग में नहीं िाया जा सकता है।
(3) प्रकाशीय तंतु (Optical Fiber)
• आिलु नक समय में प्रकाशीय तन्तु सवाथलिक महत्त्वपर्ू थ संचार माध्यम है। यहाँ तक लक इसे 'िाइफ िाइन ऑफ टेिीकॉम सेक्सटर' कहा
जाता है। ये काँच अर्वा लसलिका के बहुत पतिे तन्तु या रे शे होते हैं। यह एक तीव्र संचार माध्यम है। यह तन्तु 'पर्ू थ आंतररक परावतथन'
के लसद्धान्त पर आिाररत है।
3 विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
सकारात्मक पक्ष नकारात्मक पक्ष
• इसमें प्रलतरोि की सभं ावना नहीं रहती है। • इसके लनमाथर् में अलत शद्ध
ु तम काँच की जरूरत रहती है तर्ा ऐसे
• ऊजाथ की िपत कम होती है। काँच की उपिब्िता दि ु थभ होती है।
• संचार क्षमता बहुत अलिक । • रिरिाव भी चनु ौतीपर्ू थ है।
• इसमें न तो जंग िगता है और न ही शॉटथ सलकथ ट होता है। • इसके संचािन के लिए दक्ष, कुशि व उच्च प्रबंिन क्षमता की
• भार में हल्के अतः लबछाना सरि है। जरूरत रहती है जो लक एक महगं ी प्रलक्या है।
• प्रसारर् तीव्र क्सय़ोंलक प्रकाश की गलत लवद्यतु व ध्वलन से काफी अलिक
होती है।
Diagram
• इसमें प्रकाश को लडकोलडंग प्रलक्या के द्वारा लवद्युत संकेत़ों में बदि कर उपिब्ि करवा लदया जाता है तालक कम्टयटू र लस्टम या अन्य
उपकरर् संदश े को समझ सकें ।
• प्रकाशीय तन्तु के प्रत्येक कय िल में 24 तन्तु होतय हैं और हल्के तन्तु हजाऱों प्रसारर् चैनि उपिब्ि करवा देते हैं।
• इसमें प्रयक्त ु तार 55°C सय 400°C तक का तापमान सहने में सक्षम होता है।
• यह तन्तु अमवणय वसवलका कााँच से बना होता है।
• भारत में इस संचार व्यव्र्ा का पहिा उपयोग 1979 में पर्ु े (महाराष्ट्र) में लकया गया र्ा।
• मध्यप्रदयश दयश का पहला राज्य है जहााँ प्रकाशीय तन्तु या ऑव्टकल कय िल का व्यािसावयक उत्पादन हो रहा है।
• मुख्य उत्पादक ंकांयााँ
o लहन्द्ु तान के बल्स लिलमटेड, नैनी, इिाहाबाद (UP)
o ऑलटटकि टेिीकम्यलू नके शन लिलमटेड (OTL), मडं ीदीप, भोपाि (MP)
ऑव्टकल फांिर का महत्त्ि
(1) फोन टेलपंग व हैलकंग असंभव हो जाती है।
(2) सचू नाओ ं की क्षलत नहीं होती है।
(3) ऊजाथ िपत कम होती है।
(4) रे लडय़ों तरंग़ों व अन्य लवलकरऱ्ों का कोई प्रभाव नहीं होता है।
(5) सम्प्रेषर् अत्यलिक तीव्र होता है।
(6) बैण्डलवड्र् बहुत अलिक अतः अलिक मात्रा में सचू नाओ ं को भेजा जाना संभव
II तार रवहत सच
ं ार (Wireless Communication)
• तार रलहत संचार हेतु अतं ररक्ष को माध्यम के रूप में प्रयक्त
ु लकया जाता है।
• इसके लनम्न प्रकार प्रचलित हैं-
भौम तरंि/भू-तरंि (ग्राउण्र् ियि) अंतररक्ष तरंिय (स्पयस ियि) आकाशीय तरंिय (स्काई ियि)
(1) भौम तरंि/भ-ू तरंि/ग्राउण्र् ियि
• जब भी पृथ्वी के नजदीक संचार ्र्ालपत करना होता है तो कम आवृलत वािी रे लडयो तरंगे प्रयोग में िाई जाती हैं इन्हें भौम तरंग/भ-ू
तरंग कहा जाता है। इनकी तरंगदैध्यथ अलिक होती है तर्ा ये पृथ्वी की वक्ता के अनसु ार ही गमन करती हैं।
4 विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
• यह संचार लवलि अलिक दरू ी वािे संचरर् हेतु उपयोगी नहीं होती है।
(पृथ्वी के नजदीक तरंग से ऊजाथ का अवशोषर् अलिक होने के कारर्
तरंग कमजोर पड जाती है)
• ये तरंगें न्यनू आवृलि परास 550 KHz से 1500 KHz के लिए उपयोगी
रहती है।
(2) अंतररक्ष तरंिय (Space Waves)
• संचार में संचरर् की इस लवलि में संचार तरंगे क्षोभ मण्डि या रोपो्फीयर में गलत करती है और ररसीवर तक पहुचँ ती है। इसमें अलत
उच्च आवृलि वािी इिेक्सरोमेग्नेलटक वेव्स या लवद्यतु चम्ु बकीय तरंगें उपयोग में िी जाती हैं। इससे िम्बी दरू ी का संचार ्र्ालपत लकया
जाता है।
• एंलटना की ऊँचाई बढाकर इसका दायरा भी बढाया जा सकता है।
• इन संचार तरंग़ों की आवृलि अलत उच्च होती है इसलिए इनके लिए कम
िम्बाई के पैराबोलिक एंलटना का प्रयोग लकया जाता है।
• सैटेिाइट संचार, दरू दशथन व आकाशवार्ी संचार व सक्ष्ू म तरंग संचार
(माइक्ोवेव संचार) में अतं ररक्ष तरंग़ों का ही प्रयोग लकया जाता है।
• क्षोभमण्डि सचं रर् के कारर् इसे रोपो्फे ररकि प्रोपेगेशन भी कहा जाता है।
• सचं रर् की इस लवलि में 100-200 MHz की आवृलिय़ों का प्रयोग
लकया जाता है।
(3) आकाशीय तरंि (Sky Waves)
• आकाशीय तरंग रांसलमट होने के पिात् आयनमण्डि में प्रवेश करती हैं
तर्ा आयनमण्डि से परावलतथत होकर पृथ्वी पर पनु ः िौटती हैं।
• इनका प्रयोग उच्च आवृलि की तरंग़ों की प्रसारर् सेवाओ ं हेतु लकया जाता
है।
• ये तीव्र सचं ार के लिए उपयक्त
ु सचं ार तरंगें हैं।
• 40 MHz तक की तरंगें ही आयन मण्डि से परावलतथत होती हैं। इससे
ज्यादा आवृलि की तरंगें आयनमण्डि से बाहर लनकि जाया करती हैं।
सयटयलांट सच
ं ार/उपग्रह सच
ं ार
• जब उपग्रह़ों के माध्यम से संचार होता है, तो यह उपग्रह संचार कहिाता
है। इसके लिए प्रयक्त
ु उपग्रह, सचं ार उपग्रह कहिाते हैं।
• इस सचं ार हेतु पृथ्वी पर टावर बनाए जाते हैं तर्ा उपग्रह पर भी रासं मीटर
व ररसीवर िगाए जाते हैं। उपग्रह पर इस कायथ हेतु प्रयोग लकए जाने वािे
उपकरर् को रे लडयो रांसपोण्डर (Tran-sponder) कहा जाता है।
• अपवलक ं व्यिस्र्ा-पृथ्वी पर ल्र्त रांसमीटर से उपग्रह के ररसीवर से ्र्ालपत लिकं , अपलिंक कहिाता है।
• र्ाऊन वलंक व्यिस्र्ा-उपग्रह के रांसमीटर से पृथ्वी के ररसीवर से ्र्ालपत लिक ं , डाऊन लिंक कहिाता है।
(उपग्रह संचार में अपलिंक व डाऊनलिंक की आवृलियाँ लभन्न-लभन्न होती हैं इसीलिए ये आपस में लमि नहीं पाती हैं)
सामान्यतः अपलिक ं आवृलि, डाऊनलिक ं आवृलि से अलिक होती है।
5 विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
सच
ं ार सयिा प्रयुक्त आिृवि िैण्र् विशयिता
AM रे लडयो संचार 540-1600 KHz 106 बैण्ड
FM रे लडयो संचार 88-108 MHz 100 बैण्ड
टेिीलवजन 54-72 MHz अलत उच्च आवृलि टी.वी. परा उच्च आवृलि
76-88 MHz टी.वी.
174-216 MHz
420-890 MHz
मोबाइि 896-901 MHz मोबाइि से आिार ्टेशन आिार ्टेशन से
840-935 MHz मोबाइि
उपग्रह संचार 5.9-6.4 GHz अपलिंक
3.7-4.2 GHz डाऊनलिंक
ितडमान समय की कुछ प्रचवलत ियतार सच
ं ार प्रौद्योविवकयााँ
(i) ब्लूटूर् (Bluetooth)
• यह कम दरू ी पर अवल्र्त दो उपकरऱ्ों के मध्य संचार ्र्ालपत करने हेतु प्रयोग लकए जाने वािी एक वायरिेस लडवाइस है।
• इसके माध्यम से ध्वलन व डाटा दोऩों को रांसफर लकया जा सकता है।
• इसमें रे लडय़ों तरंग़ों की आवृलि 2.4 GHz होती है।
• इस तकनीक की सहायता से िगभग 10 मीटर या 33 फीट की रें ज तक डाटा व ध्वलन का ्र्ानान्तरर् संभव बनता है।
• इसके द्वारा एक सार् कई उपकरऱ्ों को जोडना संभव होता है अर्ाथत् इस पर लदशा का कोई प्रभाव नहीं पडता है।
• प्रत्येक ब्िटू ू र् में तीन अवयव अलनवायथ रूप से होते हैं-छोटा एंलटना, बैण्ड प्रोसेसर एवं लचप ।
• वतथमान में इस तकनीक की अलिकतम रें ज 100 मीटर होती है।
• इसे IEEE 802.15.1 के नाम से जाना जाता है।
(ii) िाई -फाई (Wi-Fi)
• इसका परू ा नाम 'वायरिेस लफडेलिटी' होता है तर्ा इसे हॉट ्पॉट भी कहा जाता है।
• इसे IEEE 802.11 के नाम से भी जाना जाता है।
• यह भी ब्िटू ू र् की तरह 2.4 GHz से 5GHz बैण्ड पर कायथ करती है।
• यह दो प्रकार का होता है-
• ओपन एररया वाई-फाई सकता है। इसका इ्तेमाि कोई भी कर
• क्सिोज एररया वाई-फाई इसका इ्तेमाि करने के लिए पासवडथ का इ्तेमाि लकया जाता है।
• वाई-फाई 'वाई-फाई एिायसं ' के ्वालमत्व वािा एक ब्राण्ड है तर्ा यह एक गैरिाभकारी सगं ठन है।
• इसकी रें ज सामान्यतः 100 मीटर तक होती है िेलकन आजकि 150 से 200 मीटर तक भी सलु विाएँ प्रदान की जाने िगी हैं।
(iii) ब्लूफाई (BlueFi)
• यह एक नवीन वायरिेस सचं ार तकनीक है। इसमें ब्िटू ू र् व वाई-फाई को सयं क्त
ु रूप से प्रयोग लकया जाता है। यह सलु विा बेंगिरू
ु
लसटी रे िवे ्टेशन पर प्रारम्भ की गई।
• यह सरु लक्षत व तीव्र तकनीक है। इसकी रें ज िगभग 200 से 300 मीटर तक होती है।
6 विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
(iv) व्हांट फाई तकनीक (White-Fi Technology)
• यह तकनीक टेिीलवजन प्रसारर् के लिए प्रयक्त
ु होने वािे ्पैक्सरम की अप्रयक्त
ु आवृलिय़ों का प्रयोग करती है।
• इस तकनीक को व्हाइट-फाई की संज्ञा देने का कारर् है लक इन अप्रयक्त
ु ्पेक्सरम को तकनीकी शब्दाविी में व्हाइट ्पेस या टी.वी.
व्हाइट ्पेस टेक्सनोिॉजी कहा जाता है।
• माइक्ोसॉफ्ट भारत में इस तकनीक पर काम कर रही है।
• इसके माध्यम से लडलजटि इलण्डया को बढावा लदया जाएगा।
• इस तकनीक को िगभग 10 लकिोमीटर तक प्रयोग में िाया जा सकता है।
• यह 200 से 300 MHz आवृलिय़ों पर कायथ करती है।
(v) िाई मैसस (Wi-Max)
(इसमें माइक्ोवेव का इ्तेमाि लकया जाता है।)
• यह 'वल्डथवाइड इटं रऑपरे लिलवटी फॉर माइक्ोवेव एक्ससेस' का सलं क्षप्त रूप है।
• यह एक अत्यलिक तीव्र लडलजटि वायरिेस संचार प्रर्ािी है।
• यह तकनीक 75 Mbps तक की ्पीड प्रदान कर सकती है।
• इसकी सहायता से िगभग 25 लकिोमीटर की रें ज तक सेवाएँ प्रदान की जा सकती हैं।
• BSNL ने यह प्रर्ािी जयपरु से प्रारम्भ की र्ी।
(vi) लाई -फाई (Li-Fi) तकनीक
• यह 'िाइट लफडेलिटी' का संलक्षप्त रूप है।
• इसकी िोज 2011 में लब्रटेन के एलडनबगथ यलू नवलसथटी में हेराल्ड हाप द्वारा की गई र्ी।
• इसे VLC (लवलजबि िाइट कम्यलू नके शन टेक्सनोिॉजी) की संज्ञा भी दी जाती है।
• यह वाई-फाई तकनीक की ति ु ना में एक अत्यलिक सरु लक्षत तकनीक है।
• यह Wi-Fi से िगभग 100 गर्ु ा तेज कनेक्सटीलवटी वािी तकनीक है।
• इसकी ्पीड िगभग 1 Gbps दजथ की गई है।
• इस तकनीक का एक नकारात्मक पक्ष है लक यह पर्ू तथ ः अिं ेरी जगह पर काम नहीं कर पाती है।
7 विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
48
04 अंतरिक्ष प्रौद्योविकी
• भारत में अतं ररक्ष प्रौद्योगिकी एक दोहरा उपयोि प्रौद्योगिकी है, गिसका उपयोि नािरिक तथा सैन्य दोनों उद्देश्यों के गिए गकया िाता
है। भाित के अंतरिक्ष काययक्रम के दो मख् ु य उद्देश्य है –
1. बाह्य अतं ररक्ष का शांगतपर्ू ण उपयोि करना।
2. अतं ररक्ष प्रौद्योगिकी में आत्मगनभणरता हागसि करके इसका उपयोि राष्ट्र के सामागिक आगथणक गिकास में करना।
• अंतरिक्ष अनुसध
ं ान के क्षेत्र में मुख्य रूप से तीन प्रकाि की िवतविवधयााँ की जाती है, यथा -
1. पृथ्िी पर रहते हुए अनसु ंधान करना।
2. अतं ररक्ष से आते हुए गपण्ड अथिा गिगकरर् का अध्ययन करना।
3. अतं ररक्ष में उपकरर् या मनष्ट्ु य भेिकर अध्ययन करना।
अंतरिक्ष प्रौद्योविकी का तवतहास
• आधगु नक अतं ररक्ष प्रौद्योगिकी का प्रारम्भ 50 के दशक से माना िाता है, िब सिणप्रथम सोगियत संघ ने 1957 में 'स्पुतवनक 1'
नामक कृ गिम उपग्रह का सफि प्रक्षेपर् गकया।
• इसी िर्ण (1957) 'िाइका' नामक कुगतया को 'स्पतू गनक-2’ के माध्यम से अतं ररक्ष में सफितापिू णक भेिा िया।
• 1958 में अमेररका ने अपना पहिा कृ गिम उपग्रह 'मैसेंिर' को सफितापिू णक अतं ररक्ष में भेिा।
• भारतीय अतं ररक्ष कायणक्रम का आधार डॉ. एस. के . गमिा के आयनमण्डि से संबंगधत अनसु ंधान ि शोध को माना िाता है।
• इस कायणक्रम का शरुु आती चरर् दो महान िैज्ञागनकों डॉ. होमी िहााँिीर भाभा ि डॉ. गिक्रम साराभाई की दरू दृगि से आिे बढा और
इन्होंने दो महत्त्िपर्ू ण अनसु धं ान सस्ं थानों की स्थापना की –
(i) गफगिकि ररसचण िेबोरे टरी, अहमदाबाद -1947 (PRL) (डॉ. गिक्रम साराभाई)
(ii) टाटा इस्ं टीट्यटू ऑफ फण्डामेंटि ररसचण, मम्ु बई - 1945 (होमी िहााँिीर भाभा)
• 1950 में भाितीय पिमाणु ऊजाय विभाि की स्थापना की िई।
• परमार्ु ऊिाण गिभाि के अतं िणत 1962 में इन्कोस्पार (INCOSPAR) (इगण्डयन नेशनि कमेटी ऑन स्पेस ररसचण) की स्थापना की
िई। िो गक इसरो का पिू णिामी था।
• 1963 में थम्ु बा इक्िेटोररयि रॉके ट िॉगन्चंि स्टेशन (TERLS) से अमेररका से आयागतत एक साउंगडंि रॉके ट 'नाइक अपाचे’ का
सफितापिू णक परीक्षर् गकया िया।
• इस चरर् में 15 अिस्त, 1969 को 'इगण्डयन स्पेस ररसचण ऑिेनाइिेशन (ISRO)' की स्थापना की िई। इसका प्रथम अध्यक्ष डॉ.
गिक्रम साराभाई को गनयक्ु त गकया िया। इसरो को अतं ररक्ष गिभाि के अतं िणत रखा िया है तथा अतं ररक्ष गिभाि प्रत्यक्ष रूप से भारत
के प्रधानमंिी कायाणिय के नेतत्ृ ि में कायण करता है।
• 1972 में भारत सरकार द्वारा 'अंतरिक्ष विभाि' तथा 'अंतरिक्ष आयोि' की स्थापना की िई।
• 'अतं ररक्ष आयोि' भारत के अतं ररक्ष कायणक्रम से संबंगधत नीगतयां बनाता है, गिनका गक्रयान्ियन 'अतं ररक्ष गिभाि' के द्वारा गकया
िाता है।
• इसरो का अध्यक्ष अतं ररक्ष आयोि का पदेन अध्यक्ष होता है तथा अतं ररक्ष गिभाि का सगचि भी होता है तागक अतं ररक्ष अनसु ंधान के
क्षेि में काम करने िािी संस्थाओ ं के मध्य समन्िय स्थागपत गकया िा सकें ।
49 विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
अंतरिक्ष विभाि के कायय
1. अतं ररक्ष आयोि द्वारा बनाई िई नीगतयों का गक्रयान्ियन करना।
2. अतं ररक्ष अनसु धं ान के क्षेि में कायण करने िािी गिगभन्न सस्ं थाओ ं के मध्य समन्िय स्थागपत करना।
3. उपयणक्त
ु संस्थाओ ं को गित्तीय संसाधन उपिब्ध करिाना।
अंतरिक्ष अनुसध
ं ान में काययित सस्ं थान
1. भौवतकी अनस
ु ध
ं ान लैब (PRL) - 2. अर्द्यचालक अनस
ु ध
ं ान लैब (SCL)
• अहमदाबाद में गस्थत इस प्रयोिशािा की स्थापना 1947 में की • गस्थगत - मोहािी (चंडीिढ़)
िई तथा यह भौगतकी, अतं ररक्ष एिं िायमु ण्डिीय गिज्ञान, • इसमें माइक्रो इिेक्रोगनक्स के क्षेि में अनसु ंधान ि गिकास कायण
खिोि भौगतकी एिं सौर भौगतकी तथा ग्रहीय एिं भ-ू गिज्ञान के गकया िाता है।
क्षेिों में अनसु ंधान कायण करता है।
• इसके दो उपके न्र है – (a) सौर िैधशािा, फतेह सािर (उदयपरु )
(b) अिरक्त अनसु ंधानशािा, मांउट आबू
3. िाष्ट्रीय िायमु ण्डलीय अनस
ु ध
ं ान प्रयोिााला (NARL) 4. उत्ति-पिू ी (पिू ोत्ति) अंतरिक्ष अनप्रु योि के न्द्र (NE-SAC)
• गस्थगत िंडकी (गतरूपगत आंध्रप्रदेश) • गस्थगत गशिोंि (मेघािय)
• इसमें िायमु ण्डिीय अनसु धं ान, िायमु ण्डिीय अन्िेर्र् एिं • इसमें सदु रू सिं ेदन, भौिोगिक सचू ना प्रर्ािी ि उपग्रह सचं ार के
मौसम तथा िििायु पररितणन सम्बन्धी कायण गकए िाते है। प्रयोि के अिािा अतं ररक्ष गिज्ञान अनसु ंधान के कायण गकए िाते
है।
5. भाितीय अंतरिक्ष विज्ञान औि प्रौद्योविकी सस्ं थान (IIST) 6. अंतरिक्ष कॉपोिेान वलवमटड (ACL)
• गस्थगत - गतरूिनंतपरु म (के रि), इसमें एयरोस्पेश इिं ीगनयररंि • गस्थगत –बैंििरू ु , यह इसरो की िागर्ज्य एिं गिपर्न शाखा है।
एिं भौगतकी (Physics) में गिशेर्ज्ञता सगहत एयरोस्पेश • यह परू ी दगु नया में अपने अन्तराणष्ट्रीय ग्राहको को अतं ररक्ष उत्पाद
प्रौद्योगिकी में स्नात्तक, परस्नात्तक तथा Ph. D की उपागध प्रदान और सेिाएाँ उपिब्ध करा रही है।
की िाती है। नोट :- इसका प्रशासगनक गनयंिर् अतं ररक्ष गिभाि, भारत सरकार
के पास है। 'एगं रक्स' को भारत सरकार द्वारा 2008 में 'िघरु त्न
कम्पनी' का दिाण गदया िया।
7. न्यूस्पेस तवं डया वलवमटे ड (NSIL) 8. तसिो (Indian Space Research Organization)
• स्थापना – 06 माचण, 2019 • स्थापना - 15 अिस्त 1969
• मख्ु यािय – बैंििरू ु • मख्ु यािय - बैंििरू
ु
• यह इसरो की िागर्ज्य एिं गिपर्न शाखा है। • कायण - भारत के गिए अतं ररक्ष संबंधी तकनीकी उपिब्ध
• इसका मख्ु य उद्देश्य- भारतीय अतं ररक्ष कायणक्रमों में गनिी क्षेि करिाना।
की भािीदारी बढ़ाना ।
50 विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
तसिो के अधीन सस्ं थाएं
1. विक्रम सािाभाई स्पेस • मख्ु यािय- गतरूिनतं परु म(के रि)।पिू णनाम:- TERLS
सेंटि (VSSC) • यहााँप्रक्षेपर्यानोंकागनमाणर्गकयािाताहै।
2. तसिो सेटेलातट सेंटि • मख्ु यािय– बेंििरुु , यहााँउपग्रहोंकागनमाणर्गकयािाताहै।
(ISAC) नोट:- इसकाितणमानमेंनामय.ू आर. रािउपग्रहके न्रहै।
• आंध्रप्रदेश की पिु ीकट झीि में श्री हररकोटा एक द्वीप है, इस के न्र से उपग्रहों को प्रक्षेगपत गकया िाता
है। भारत की गमसाइिों का परीक्षर् भी यहीं से होता है।
3. सतीा धिन अंतरिक्ष
• इसका परु ाना नाम Shri Harikota High Altitude Rang (SHAR) था। 2002 में इसरो के पिू ण
के न्द्र (SDSC)
चेयरमैन और िैज्ञागनक सतीश धिन के मरर्ोपरान्त SHAR का नाम बदिकर 'सतीश धिन अंतररक्ष
के न्र' कर गदया िया।
4. द्रि प्रणोदन प्रणाली • मुख्यालय - वतरूिंतपुिम
के न्द्र (LPSC) • यहााँप्रर्ोदकों(ठोस+ रि(ईधनऑक्सीकारक)
ं कागनमाणर्गकयािाताहै।
• मुख्यालय - महेन्द्रवििी (कन्याकुमािी तवमलनाडु), यहााँक्रायोिेगनकईधनकागनमाण
ं र्कायणगकया
5. तसिो नोदन कॉम्प्लेक्स
िाताहै।
(IPRC)
• यहााँरॉके ट(PSLV) तथाउपग्रहोंदोनोंके गिएरिईधनके
ं गिकासहेतु अनसु धं ानगकयािाताहै।
• मख्
ु यालय - हासन (कनायटक), यहााँभ-ू गस्थर/भ-ू तल्ु यकागिकउपग्रहो(िैसेइन्सैट, िीसैटतथा
6. मुख्य वनयंत्रण सवु िधा
आई.आर.एन.एस.एसश्रृख
ं िाके उपग्रह) कागनयिं र्िगनिरानीकाकायणगकयािाताहै।
(MCF)
• MCF-B- यहएम.सी.एफ. कीभोपािमेंगस्थतशाखाहै।
• मख्
ु यालय - हासन (कनायटक), यहााँ भ-ू गस्थर/भ-ू तल्ु यकागिक उपग्रहो (िैसे इन्सैट, िीसैट तथा
7. Indian Deep Space
आई.आर.एन.एस.एस श्रृंखिा के उपग्रह) का गनयंिर् ि गनिरानी का कायण गकया िाता है।
Network – IDSN
• MCF-B- यह एम.सी.एफ. की भोपाि में गस्थत शाखा है।
ISRO Telemetry & Tracking Command Network - ISTRAC
• मुख्यालय – बैंििरुु , यह छोटी दरू ी के ध्रिु ीय तथा ररमॉट सेंगसि (सदू रू संिेदी) उपग्रहों को गनयगं ित
8. तसिो दूिवमवत अनिु तयन
करने तथा उनके साथ सम्पकण स्थागपत करने के गिए कायण करता है।
औि आदेा नेटिकय
• भारत के इसके पांच के न्र है कार-गनकोबार, श्रीहररकोटा, गििेन्दरम, बैंििरुु , िखनऊ।
• भारत से बाहर के न्र गबआसण िेक (रूस), मॉरीशस, गबअक - (इडं ोनेगशया), नािे (यरू ोप)।
9. अंतरिक्ष अनुप्रयोि • मुख्यालय – अहमदाबाद, प्रमख
ु कायण - सदु रू संिेदन, दरू संचार, मौसम गिज्ञान, िििायु पररितणन।
के न्द्र (SAC) • इसकी एक शाखा – िोधपरु
• मख्ु यािय - हैदराबाद ।
10. National Remote • यह सदु रू सिं ेदी उपग्रहों से प्राप्त सचू नाओ ं का प्रसस्ं करर् करता है तथा गिगभन्न सस्ं थाओ ं के साथ
Sensing Agency – साझा करता है।
NRSA Note - IIRS - Indian Institute Remote Sensing
• भारतीय सदु रू संिेदी संस्थान मख्ु यािय देहरादनू (गिद्यागथणयों की गशक्षा के गिए)।
51 विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
तसिो से संबंवधत महत्िपूणय संस्थाएं उत्तिाखंड
• भारतीयररमोटसेंगसंिसंस्थान(IIRS) - देहरादनू
िुजिात • एगशया-प्रशातं मेंअतं ररक्षगिज्ञानऔर प्रौद्योगिकी
• भौगतकअनसु ंधानप्रयोिशािा(PRL) - अहमदाबाद गशक्षाकें र(CSSTEAP) - देहरादनू
• अतं ररक्षअनप्रु योिकें र(SAC) - अहमदाबाद
मेघालय
बैंिलोि • उत्तर-पिू ीअंतररक्षअनप्रु योिकें र
• यू आररािउपग्रहकें र (URSC) (NE-SAC) - उगमयम
आंध्र प्रदेा
के िल • सतीशधिनअतं ररक्षकें र(SDSC) - श्रीहररकोटा
• भारतीयअंतररक्षगिज्ञानएिंप्रौद्योगिकीसंस्थान
(IIST) - गतरुिनंतपरु म तवमलनाडु
• तरिप्रर्ोदनप्रर्ािीकें र(LPSC) - गतरुिनंतपरु म • इसरोप्रोपल्सनकॉम््िेक्स - महेंरगिरी
• गिक्रमसाराभाईअतं ररक्षकें र(VSSC) - गतरुिनतं परु म
भारत की अन्य स्पेस सस्ं थाएं स्काईरूट एयिोस्पेस
IN - SPACe • स्थापना:- 12 िनू , 2018
• स्थापना:- िनू 2020 • यहहैदराबादगस्थतस्टाटणअपहै।
• यहअंतररक्षगिभािके अंतिणत • अतं ररक्षमेंरॉके टप्रक्षेगपतकरनेिािीपहिीगनिी
एकस्िायत्तएिेंसी हैिोइसरो कम्पनीहै।
औरगनिीक्षेिके बीचएकि • इसनेISRO के श्रीहररकोटािॉन्चपैडसेअपना
गखडकीइटं रफे सके रूपमें स्िदेशीरूपसेगिकगसत‘गिक्रम- एस रॉके ट’
कायणकरतीहै। अक्टूबर2022 मेंप्रक्षेगपतगकया था।
अवननकुल कॉसमॉस
• इसकीशरू ु आतिर्ण2017 मेंहुई।
ISRO • यहचेन्नईगस्थतस्टाटणअप है।
• स्थापना:- 15 अिस्त, 1969 • अगननकुिकॉसमॉसअंतररक्षमेंअपना
• ितणमानअध्यक्ष:- डॉ. एस सोमनाथ रॉके टप्रक्षेगपतकरनेिािीदसू रीभारतीय
• HQ :- बैंििरू ु गनिीकम्पनीबनिईहै।(पहिी गनिी
कम्पनीस्काईरूटएयरोस्पेसहै।)
NSIL : New Space India
ANTRIX ISRO के अध्यक्षों की सच
ू ी
Limited
• प्रबंध गनदेशक :- बी.एस. हेिडे
• स्थापना:- 6 माचण, 2019 क्र. अध्यक्ष काययकाल अिवध
• स्थापना :- 28 गसतम्बर, 1992
• यहभारतसरकारकाएकसािणिगनक
• यह इसरो की िागर्गज्यक शाखा 1. गिक्रमसाराभाई 1963-1971 8 िर्ण
उपक्रमहैिोइसरोकीिागर्गज्यक
एिं माके गटंि है । 2. प्रो. एम.िी.के . मेनन िनिरी-गसतम्बर, 1972 9 माह
शाखाहै।
• यह भारत सरकार की परू ी तरह
• कायण: प्रक्षेपर्िाहनों काउत्पादन, 3. प्रो. सतीशधिन 1972-1984 12 िर्ण
से स्िागमत्ि िािी कम्पनी है
संयोिनऔरएकीकरर्, उपग्रहोंका 4. प्रो. यू.आर. राि 1984-1994 10 िर्ण
और इसका प्रशासगनक गनयिं र्
गनमाणर्तथाअतं ररक्षआधाररतसेिाएं
अंतररक्ष गिभाि (DOS) के 5. प्रो. डॉ. कस्तरू ी रंिन 1994-2003 9 िर्ण
प्रदनकरताहै।
पास है ।
• इसने2026 मेंऑग्टमसअंतररक्षयान 6. डॉ. िी. माधिननायर 2003-2009 6 िर्ण
• उद्देश्य :- भारत में अतं ररक्ष से
कोिॉन्चकरनेके गिएस्पेसमशीन 7. डॉ. के . राधाकृ ष्ट्र्न 2009-2015 5 िर्ण
िडु ी औद्योगिक क्षमताओ ं को
कम्पनीके साथसहयोिगकयाहै। 8. डॉ. ए.एस. गकरर्कुमार 2015-2018 3 िर्ण
बढ़ाना है ।
• NSIL ने‘’मनु ािसैटेिाइट’’ को
• यह दुगनयाभर के ग्राहकों को 9. डॉ. के . गसिन 2018-2022 4 िर्ण
िॉन्चकरनेके गिएनेपाि एके डमी
अंतररक्ष से िडु े उत्पादन और
ऑफसाइसं एंडटेक्नोिॉिीके साथ 10. डॉ. एस. सोमनाथ 2023-2025 3 िर्ण
सेिाएं उपिब्ध कराती है ।
िॉन्चसेिासमझौतेपरभी हस्ताक्षर 11. डॉ. िी. नारायर्न 14 फरिरी2025 सेितणमान
गकएहैं।
52 विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
उपग्रह (Satellite)
• उपग्रह आकाशीय गपण्ड होते हैं िो गनगित कक्षाओ ं में ग्रह के चारों ओर घमू ते रहते हैं। ये दो प्रकार के होते हैं-
• (i) प्राकृ गतक उपग्रह िैसे चन्रमा पृथ्िी का एक प्राकृ गतक उपग्रह है।
• (ii) कृ गिम उपग्रह-िैसे पृथ्िी के चारों ओर चक्कर ििाने िािे मानि गनगमणत उपग्रह यथा-ओसेनसेट, आयणभट्ट आगद ।
कािमन लातन :
• समन्ु र ति से औसतन 100 गकमी. की ऊाँचाई पर अिगस्थत एक काल्पगनक सीमा रे खा िो पृथ्िी के िायमु ण्डि ि बाहरी अतं ररक्ष
की सीमा का प्रगतगनगधत्ि करती है, कारमान िाइन/रे खा कहिाती है। कारमन िाइन से अतं ररक्ष का प्रारम्भ माना िाता है। कारमन
िाइन से ऊपर अतं ररक्ष को सम्पर्ू ण मानि िागत के गिए संपगत्त माना िाता है अथाणत् इससे ऊपर गकसी एक देश का आगधपत्य नहीं है
हािागं क कारमन िाइन से नीचे का क्षेि सबं गं धत राष्ट्र का हिाई क्षेि या रािनैगतक सीमा माना िाता है।
उपग्रह के घटक
(i) बस-यह पेिोड ि अन्य उपकरर्ों के गिए िाहक का कायण करता है।
(ii) पेिोड-एटं ीना, कै मरा, राडार िैसे उपकरर् पेिोड कहिाते हैं।
(iii) रासं पोण्डर-यह एक गिशेर् उपकरर् है िो गिगभन्न आिृगत्त बैंडों पर कायण करता है।
(iv) ऊिाण तंि-सोिर सेि पैनि
(v) ऊाँचाई गनयंिर् तंि- गिस क्षेि को ध्यान में रखकर उपग्रह प्रक्षेगपत गकया िाता है उस पर के गन्रत रहता है।
(vi) िायरोस्कोप-यह गकसी िस्तु की कोर्ीय गस्थगत को ज्ञात करने का कायण करता है।
(vii) टेिीमेरी और गनदेश तंि- पृथ्िी पर उपग्रह द्वारा भेिी िई सचू नाएाँ टेिीमेरी के रूप में पररभागर्त की िाती है।
उपग्रहों के प्रकाि
उपयोगिता के आधार पर उपग्रहों के गनम्न प्रकार हैं-
(i) सच ं ाि उपग्रह - इस प्रकार के उपग्रह भ-ू स्थैगतक उपग्रह होते हैं िो 36000 गकमी. की ऊाँचाई पर स्थागपत गकए िाते हैं। ये 24 घण्टे
में पृथ्िी की पररक्रमा एक बार करते हैं। भारत की INSAT श्रेर्ी के उपग्रह इसी ििण में आते हैं।
(ii) भू-अिलोकन उपग्रह- इस प्रकार के उपग्रह 200 से 2000 गकमी. की ऊाँचाई पर स्थागपत गकए िाते हैं। भारत के ररमोट सेंगसंि
उपग्रह इसी ििण में आते हैं। सयू ण तल्ु यकागिक कक्षा (500 से 1000 गकमी.) में भी ये स्थागपत गकए िाते हैं।
(iii) पिीक्षणात्मक उपग्रह - प्रयोि करने के उद्देश्यों से भी कुछ छोटे उपग्रह प्रक्षेगपत गकए िाते है। िैसे RLV उपग्रह यान।
(iv) नौिहन उपग्रह - िैगिक ि क्षेिीय नौिहन प्रर्ागियों के उपग्रह इस श्रेर्ी में होते हैं। िैसे अमेररकी िी.पी.एस. गसस्टम या भारतीय
क्षेिीय नौिहन प्रर्ािी 'नागिक' इस प्रकार के ही उपग्रहों पर आधाररत है।
उपग्रह की कक्षा
गकसी गपण्ड (पृथ्िी) की कक्षा िह बंद पथ है गिस पर प्राकृ गतक उपग्रह (चन्रमा) या
कृ गिम उपग्रह (GSAT-7) गनरंतर चक्कर ििाता है।
उपग्रह की कक्षा के प्रकार - इनका ििीकरर् गनम्न प्रकार से गकया िा सकता है-
(1) गिके गन्रयता के आधार पर गिभािन
(2) ऊाँचाई के आधार पर गिभािन
(3) खिोिीय गपण्ड के आधार पर
(4) झक ु ाि कोर् ि आकृ गत के आधार पर
53 विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
(1) विके वन्द्रयता के आधाि पि गिभािन तीन प्रकारों में बांटा िाता है-
• िृत्ताकाि कक्षा (Circular Orbit)
✓ इस प्रकार की कक्षा में उपग्रह की दरू ी पृथ्िी के के न्र से प्रत्येक समय समान रहती है।
• अवतपििलयाकाि कक्षा (Hyperbolic Orbit)
✓ इस कक्षा में उपग्रह का िेि पिायन िेि से अगधक होता है। इसमें गिके गन्रयता का मान 1 से अगधक होता है।
• दीघयिृत्ताकाि कक्षा (Eleptical Orbit)
✓ इस कक्षा में उपग्रह की दरू ी पृथ्िी के के न्र से गनरंतर पररिगतणत होती रहती है।
िृत्ताकार कक्षा दीघणित्ृ ताकार कक्षा अगतपरिियाकार कक्षा
(2) ऊाँचाई के आधाि पि कक्षाओ ं का विभाजन
अवत वनम्पन भू-कक्षा 200 km सेनीचेकीकक्षा
वनकटतम कक्षा यह400 गकमी. तकहोतीहै।
ISS (अन्तराणष्ट्र ीयस्पेसस्टेशन) इसीकक्षामेंगस्थतहै।
वनम्पन भू-कक्षा (LEO) यहििभि200 से2000 गक.मी. तकहोतीहै।
Low Earth Orbit) इसकक्षामेंसदु रू सिं ेदीउपग्रह(ररमोटसेंगसिं उपग्रह) स्थागपतगकएिातेहै।
मध्यम भू-कक्षा (MEO) यहििभि2000 से20000 गक.मी. तकहोतीहै।
(Middle Earth Orbit) इसमेंनौिहनउपग्रहोंकोस्थागपतगकयािाताहै।(िैगिकनौिहनप्रर्ािी)
उच्च भू-कक्षा (HEO) इसकीऊाँचाईििभि36000 गक.मी. होतीहै।
(High Earth Orbit) इसकक्षामेंमौसमउपग्रह, संचारउपग्रहिक्षेिीयनौिहनप्रर्ागियााँस्थागपतकीिातीहै।
जक
ं /वडस्पोजेबल ग्रेियाडय कक्षा 36050 गक.मी. कीऊाँचाईपरअतं ररक्षकचरा
1. वनम्पन भू - कक्षा (A) ध्रुिीय कक्षा (Polar Orbit)
• ऊंचाई 400-2000 गकमी. तक। • यह गनम्न भ-ू कक्षा का ही एक प्रकार है -
• एक गदन में पृथ्िी के 14 से 16 चक्र। • िे कक्षाएं गिनका पथ उत्तर से दगक्षर् ध्रिु में होता है ध्रगु िय कक्षाएं
• पृथ्िी के ििभि सभी भािों से सम्पकण । कहिाती है। अथाणत् यह कक्षा पृथ्िी के ध्रिु ीय अक्ष के समान्तर होती है।
• इस कक्षा में सदु रू सिं ेदी उपग्रह प्रक्षेगपत गकए िाते है। • पृथ्िी प्रेक्षर्, टोही उपग्रह एिं मौसम उपग्रह यहााँ छोडे िाते है।
उपयोि:- ✓सदु रू संिेदन करने में। ✓ िाससू ी करने में। ✓ मौसम ि
िििायु पररितणन करने में।
(B) सयू य तुल्यकावलक कक्षा (Sun Synchronous Orbit)
• यह ध्रिु ीय कक्षा का एक गिशेर् प्रकार है, गिसमें कोई उपग्रह गकसी एक स्थान पर एक गनगित स्थानीय समय पर ही हमेशा पहुचं ता है।
• ऐसा इसगिए गकया िाता है, तागक उपग्रह को उस स्थान पर सयू ण की समान प्रदीगप्त गमिे।
• पृथ्िी प्रेक्षर्, टोही उपग्रह एिं मौसम उपग्रह यहााँ छोडे िाते है। उपयोि:-
✓ सदु रू सिं ेदन करने में। ✓ िाससू ी करने में। ✓ मौसम ि िििायु पररितणन करने में। ✓ पृथ्िी की मैगपिं करने में।
54 विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
2. मध्य भू- कक्षा (Middle Earth Orbit)
• ऊंचाई 2000 से 35786 गकमी. तक िभणकेगन्रत कक्षा।
• इसमें 20,200 गकमी. की ऊाँचाई पर िी.पी.एस. प्रर्ािी आधाररत उपग्रह प्रक्षेगपत गकए िाते है।
• कक्षीय अिगध 12 घंटे।
• इस कक्षा में स्थागपत उपग्रह एक गदन में पृथ्िी के 2 चक्र परू े करते है।
• िी.पी.एस. उपग्रहों को इसी कक्षा में स्थागपत गकया िाता है।
• य.ू एस.ए. के NAVSTAR तिं के उपग्रह इसी कक्षा में स्थागपत गकए िए है। (िी.पी.एस. के 24 उपग्रहों का तिं NAVSTAR है।)
• इस क्षेि में घमू रहे उपग्रहों का मख्ु य कायण पथ प्रदशणन, सचं ार और अतं ररक्षीय िायमु ण्डि का अध्ययन करना है।
• उत्तर ओर दगक्षर् ध्रिु तक सचं ार सगु िधाएं पहुचं ाने िािे उपग्रहों को इसी कक्षा में स्थागपत गकया िाता है।
Note:- Telstar, GPS, Glonass, Galileo िैसे नेगििेशन प्रर्ागियों में प्रयक्त ु उपग्रह इसी कक्षा में स्थागपत है।
3. भू-तुल्यकावलक कक्षा (Geosynchronous Earth - GEO)
• ऊंचाई 36000 गकमी. (35786 गकमी.) िभणकेगन्रत कक्षा।
• कक्षीय अिगध 24 घटं े (23 घटं े 56 गमनट 4 सैकेण्ड) पृथ्िी के घर्ू नण काि के बराबर।
• इन उपग्रहों का पररक्रमर् काि उतना ही है गितना पृथ्िी का घर्ू नण काि (पररभ्रमर्), इसगिए इन्हें भ-ू तल्ु यकागिक उपग्रह कहा िाता है।
• इसी कक्षा का एक गिशेर् प्रकार भ-ू गस्थर कक्षा (Geo Stationary Orbit) होती है, िब यह उपग्रह गिर्िु त रे खा के ऊपर/ति में गस्थत
हो।
• भ-ू गस्थर कक्षा की ऊंचाई भी 36000 गकमी. होती है तथा इसमें उपग्रह भी एक गदन में एक चक्र परू ा करते है। भ-ू गस्थर कक्षा का उपग्रह
के िि गिर्िु त रे खा पर ही गस्थत होता है,
• िबगक भ-ू तल्ु यकागिक कक्षा का उपग्रह कहीं पर भी गस्थत हो सकता है।
• भ-ू तल्ु य कागिक कक्षा गिर्िु त रे खीय ति से गकसी कोर् पर गस्थत होती है।
• सभी भ-ू गस्थर उपग्रह भ-ू तल्ु य उपग्रह होते है िेगकन सभी भ-ू तल्ु य उपग्रह भगू स्थर उपग्रह नहीं होते है।
भू-वस्थि स्थानान्तरित कक्षा (GSTO - Geo Stationary Transfer Orbit)
• िह कक्षा गिसमें भ-ू गस्थर उपग्रहों को भ-ू गस्थर कक्षा में भेिने से पहिे स्थागपत गकया िाता है।
• इसकी ऊंचाई भ-ू गस्थर कक्षा से 200 गकमी. कम होती है। एक बार उपग्रह को यहााँ स्थागपत करने के बाद उसकी िगत में पररितणन
करके उसे भ-ू गस्थर कक्षा तक पहुचं ाया िाता है।
कविस्तान कक्षा (Graveyard Orbit/Junk/Disposal Orbit)
• भगू स्थर कक्षा में उपग्रहों की संख्या ििातार बढ़ने के कारर् अतं ररक्ष कचरे की समस्या उत्पन्न हो िई है तथा नये उपग्रहों के गिए इस
कक्षा में कम ही स्थान बचा है।
• इस समस्या से गनिात पाने के गिए उपग्रहों को उनके अगं तम गदनों में (10-12 साि बाद) कुछ िगत देकर उन्हें एक बाह्य कक्षा में भेिा
िाता है िहााँ िे गनगष्ट्क्रय होने के पिात् पृथ्िी का पररक्रमर् करते रहते है।
• इस उच्च कक्षा को Graveyard कक्षा कहा िाता है।
Note:-
✓ इस कक्षा में सभी रे गडयो और टी.िी. के सेटेिाइट छोडे िाते है।
✓ इस कक्षा में मौसम संबंगध उपग्रह छोडे िाते है।
✓ INSAT तथा GSAT श्रृख ं िा के उपग्रह भ-ू स्थैगतक कक्षा में स्थागपत गकए िाते है।
(3) खिोलीय वपण्डों के आधाि पि विभाजन
भक
ू ें गरत चरं सयू णके गन्रत मंिि शक्र
ु शगन बृहस्पगत
कक्षा कक्षा कक्षा कक्षा कक्षा कक्षा कक्षा
पृथ्िीग्रहकीकक्षा चन्रमाकीकक्षा सयू णकीकक्षा मंििग्रहकीकक्षा शक्र
ु ग्रहकी कक्षा शगनग्रहकीकक्षा बृहस्पगतग्रहकी कक्षा
55 विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
भाित में प्रक्षेपणयान प्रौद्योविकी का विकास
• िे यान गिनका उपयोि करके उपग्रहों को उनकी कक्षाओ ं तक भेिा िाता है, प्रक्षेपर् यान कहिाते है।
• प्रक्षेपर् यान प्रर्ोदन के कारर् न्यटू न के तीसरे गनयम का उपयोि करते हुए ऊपर की और प्रक्षेगपत हो िाता है।
• दहन के गिए ऑक्सीिन आिश्यक होती है, िो गक अतं ररक्ष में उपिब्ध नहीं होती है। इसगिए प्रर्ोदन तिं में ईधन ं के साथ-साथ
ऑक्सीकार एिेंट का उपयोि गकया िाता है।
प्रणोदक • यह ईधन ं तथा ऑक्सीकारक का गमश्रर् होता है, गिसके कारर् रॉके ट पृथ्िी के िरुु त्िाकर्णर् बि के गिपरीत कायण
करता है या िगत करता है।
प्रक्षेपण यान तकनीक के विकास के चिण
प्रारगम्भकचरर् प्रयोिकाचरर् उपयोगिताचरर्याप्रदशणनचरर् गिगशिताका चरर्
(Learning Phase) (Experimental Phase) (Demostration Phase) (Speciality Phase)
• साउगण्डंिराके ट (1967) • ASLV (1987) • PSLV (1993)
• SLV (1979) • GSLV (2001)
सेटेिाइट्स को कक्षाओ ं में स्थागपत करने के गिए रॉके ट या • ऑपरे शनिसाउंगडंिरॉके ट
प्रक्षेपर् यान की िरूरत पडती है। इसके गिए प्रक्षेपर् स्थि िैस-े RH-100, RH-200
का चयन करता होता है। आगद
तसके अलािा भाित के प्रमोचन यानों को वनम्पनवलवखत प्रकाि से विभावजत वकया जाता है-
(i) प्रथम पीढी के प्रमोचन यान - उदाहरर् पररज्ञापी रॉके ट, SLV, ASLV आगद ।
(ii) प्रचलनात्मक प्रमोचन यान - उदाहरर् PSLV ि GSLV आगद।
(iii) अिली पीढी के प्रमोचन यान - उदाहरर् RLV, SSLV, LMV-3 आगद ।
साउवण्डिं िॉके ट (परिज्ञापी िॉके ट)
• ऐसे अतं ररक्ष रॉके ट गिन्हे िायमु ण्डि के अध्ययन ि अन्िेर्र् के गिए प्रयक्त
ु गकया िाता है, साउगण्डंि रॉके ट कहिाते हैं।
• भारत में 1963 में थबु ा से 'नाइक अपाचे' नामक साउगण्डंि रॉके ट प्रक्षेगपत कर भारतीय अतं ररक्ष यिु की शरुु आत की िई थी।
• ये एक या दो चरर् िािे ठोस ईधन ं रॉके ट होते हैं।
• ितणमान में गनम्नगिगखत साउगण्डंि रॉके ट प्रचिनात्मक रूप में है-
RH-200 RH-300 माकय -2 RH-560 माकय – 3
• यहााँ RH रोगहर्ी रॉके ट का संकेत है, िबगक गदए िए अक ं रॉके ट के व्यास के द्योतक हैं।
• भारत का पहिा साउंगडंि रॉके ट RH-75 था।
• डॉ. साराभाई ने भारत में साउगण्डंि रॉके ट के गिकास का प्रगतगनगधत्ि गकया था।
SLV (सेटेलातट लॉन्च व्हीकल)
• कम ििन िािे उपग्रहों को उनकी कक्षा में स्थागपत करने के उद्देश्यों के साथ भारत ने SLV के
गिकास पर ध्यान देना प्रारम्भगकया।
• SLV-3 की सहायता से रोगहर्ी उपग्रह RS-1 को स्थागपत गकया िया था।
• यह चार चरर्ों िािा ठोस प्रर्ोदक (ईधन)ं यक्त
ु भारत का पहिा िॉगन्चंि रॉके ट था।
• इसका नेतत्त्ृ ि महान िैज्ञागनक APJ अब्दि
ु किाम ने गकया था।
• SLV-3 40 गकग्रा ििण के पेिोड को गनम्न भ-ू कक्षा में स्थागपत करने में सक्षम था।
56 विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
ASLV (ऑनमेन्टे ड सेटेलातट लॉन्च व्हीकल) (सिं वर्द्यत उपग्रह प्रमोचन यान)
• यह एक पााँच चरर्ों िािा ठोस ईधन ं यक्त
ु प्रमोचन यान था। इसकी क्षमताएाँ SLV-3 से अगधक थी।
• यह 150 गकग्रा ििन के उपग्रहों को गनम्न भ-ू कक्षा में 400 गकमी. की ऊाँचाई तक पहुचाँ ाने में सक्षम था।
• इसे 1987 में प्रयोि में िाना प्रारम्भ गकया िया था
PSLV (पोलि सेटेलातट लॉन्च व्हीकल) ( ध्रुिीय उपग्रह प्रमोचन यान)
• यह अब तक का सिाणगधक सफि ि उच्च प्रौद्योगिकी उपग्रह प्रक्षेपर् यान है। इसका
सफि प्रयोि 1994 से प्रारम्भ गकया िया था। PSLV-D2 पहिा सफि प्रक्षेपर् यान
था। (PSLV-D1 असफि)
• PSLV चार चरर्ों िािा प्रक्षेपर् यान है। इसके पहिे ि तीसरे चरर् में ठोस ईधन
ं ि
दसू रे ि चौथे चरर् में तरि ईधन
ं का प्रयोि गकया िाता है। तरि ईधन
ं की ज्ििन क्षमता
ठोस ईधन ं से बेहतर होती है।
तसके प्रमुख प्रकाि हैं-
PSLV-G PSLV-CA PSLV-XL
• PSLV 1750 गकग्रा पेिोड को सयू ण तल्ु यकागिक कक्षा ि ध्रिु ीय कक्षा में 600 गकमी. की ऊाँचाई पर स्थागपत कर सकता है।
• यह इतना महत्त्िपर्ू ण है गक इसे 'िकण फोसण ऑफ इसरो' की भी सज्ञं ा दी िाती है।
• भारत के दो सिाणगधक प्रगसद्ध अतं ररक्ष अगभयान चन्रयान-1 ि मंिि (MOM) गमशन भी PSLV रॉके ट से ही प्रक्षेगपत गकए िए थे-
चन्द्रयान-1 मंिल वमान
PSLV-C11 (2008) PSLV-C25 (2013)
GSLV (वजयो स्टे ानिी/वजयो वसक्र
ं ोनस सेटेलातट लॉन्च व्हीकल )
• भारी उपग्रहों को प्रक्षेगपत करने के गिए GSLV प्रमोचन यानों का गिकास गकया िा रहा है। कुछ समय पहिे तक भारत अगधक ििन
िािे उपग्रहों के गिए दसू रे देशों पर गनभणर था िेगकन GSLV के गिगभन्न प्रमोचन यानों के गिकास से भारत प्रमोचन यानों के गिकास में
काफी आिे बढ़ िया है। ितणमान में GSLV के माध्यम से 5 टन तक के उपग्रहों को कक्षा में स्थागपत गकया िा सकता है।
• यह तीन चरर्ों िािा एक अगत उन्नत रॉके ट है-
(1) ठोस ईधन
ं िाला चिण (2) तिल ईधन
ं िाला चिण (3) क्रायोजेवनक ईधन
ं िाला चिण
(HTPB) (UDMH) द्रि ऑक्सीजन ि (-183°C)
(N2O4) द्रि हातड्रोजन (-253°C)
GSLV MK-3 (बाहुबली ) के यि वमान (CARE) (मानि अंतरिक्ष वमान के वलए)
• सफि प्रक्षेपर् गदसंबर, 2014 में गकया िया था।
• यह ISRO का एक प्रायोगिक परीक्षर् यान है।
• भारत के भारी ििन िािे संचार उपग्रहों का प्रक्षेपर् GSLV MK-3
से संभि हो सका है। CARE का पर्ू ण रूप क्रू मॉड्यिू एट्मॉस्फे ररक रर-
• यह भी तीन चरर् िािा (गिस्तरीय रॉके ट प्रर्ािी) एक शगक्तशािी एन्री एक्सपेररमेंट होता है। ISRO ने इसका
प्रेक्षपर्/प्रमोचन यान है। सफितापिू णक िॉन्च गदसम्बर 2014 में गकया था।
• इसकी सहायता से ििभि 4 टन तक के पेिोड को भ-ू तल्ु यकागिक • यह तकनीक ISRO के भगिष्ट्य के अतं ररक्ष गमशनों
रासं फर कक्षा में स्थागपत गकया िा सकता है।
• इसमें क्रायोिेगनक ईिन गिशेर् रूप से मानि गमशनों में अत्यंत उपयोिी गसद्ध
ं CE-20 का इस्तेमाि गकया िाता है।
• इसका इस्तेमाि भारतीय गमसाइि गिकास कायणक्रम गिशेर्कर होिी।
अन्तरमहाद्वीपीय बैगिगस्टक गमसाइिों के गनमाणर् में गकया िा सके िा। • इस गमशन को बंिाि की खाडी में सफितापिू णक प्राप्त
• चन्रयान-2 को भी GSLV MK-3 के माध्यम से िॉन्च गकया िया कर गिया िया था।
था।
57 विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
पनु रूपयोिी प्रक्षेपण यान (RLV) (Reusable Launch Vehicle)
• ये गिगशि प्रक्षेपर् यान है, इन्हें अतं ररक्ष में कायण परू ा कर िेने के बाद, िापस पृथ्िी पर सफितापिू णक उतारा िा सकता है। इन्हें बार-
बार प्रयोि में िाया िाना संभि होता है।
• इस प्रकार के िॉन्च व्हीकि का गिकास भगिष्ट्य में अतं ररक्ष गमशनों का खचण अत्यंत कम कर देिा है अथाणत् इससे सस्ती अतं ररक्ष
पररिहन प्रर्ािी का गिकास होिा।
• भारत ने इसका पहिा प्रदशणन RLV-TD (टेक्नोिॉिी डेमोस्रेशन) के रूप में गकया था। मई, 2016 में इसका सफितापिू णक परीक्षर्
गकया िया।
RLV के लाभ RLV की चुनौवतयााँ
• अतं ररक्ष में तकनीकी प्रौद्योगिकी का गिकास • प्रारंगभक चरर् में िाित अगधक
• भारत की तकनीक का गिि के समक्ष प्रदशणन • भारत के तटीय क्षेि दतं रु रत है और िम्बे रनिे की उपिब्धता
• अतं ररक्ष गमशनों का खचण अत्यंत कम को सीगमत करता है।
• अतं ररक्ष पयणटन संभि होिा • िैगिक प्रगतस्पधाण अगधक स्पेस-X का फाल्कन 9 रॉके ट
(RLV) ब्िू ओररगिन का न्यू शैफडण रॉके ट (RLV)
(a) अिताि अंतरिक्ष यान (AVATAR) (एिोवबक व्हीकल फॉि एडिांस रांस एटमोवस्फरिक रिसचय)
इसरो अितार को गिकगसत करने का प्रयास कर रहा है। यह भगिष्ट्य का RLV है। इसे ििभि 100 बार प्रयोि में िाना सभं ि होिा।
(b) एकीकृत प्रक्षेपण यान (Unified Launch Vehicle, ULV)
एक ही प्रक्षेपर्/प्रमोचन यान से इसरो के सभी प्रकार के अतं ररक्ष गमशन को सफितापिू णक परू ा करना सभं ि होिा। यह भी ISRO का
भगिष्ट्य का RLV है। (10 टन से अगधक ििन िािे उपग्रहों हेत)ु
स्मॉल सैटेलातट लॉन्च व्हीकल (SSLV)
• SSLV एक तीन चरर् िािा प्रक्षेपर् यान है। यह 2 मीटर व्यास और 34 मीटर िम्बाई िािा ि 120 टन
ििन का एक छोटय प्रक्षेपर् यान है। इसकी सहायता से 500 गकमी. तक की ऊाँचाई तक 500 गकिो. के
उपग्रह को प्रक्षेगपत गकया िा सके िा।
• यह उभरते िघु (नैनो-माइक्रो-गमनी) उपग्रह िागर्गज्यक बािार को आकगर्णत करने के गिए गिकगसत गकया
िया है। इसका सफि प्रक्षेपर् 10 फरिरी, 2023 को गकया िया था।
• इसके गिए तगमिनाडु के कुिसेकरपट्टनम में नया स्पेस पोटण बनाया िया है।
लॉन्च व्हीकल माकय -III (LVM-III)
• यह इसरो का सिाणगधक शगक्तशािी रॉके ट है। इसी से चन्रयान-3 को िॉन्च गकया िया था। इसमें तीन
चरर् होते है।
• LVM-III से प्रक्षेगपत मख्ु य गमशन :- िनिेब इगण्डया गमशन 1 ि 2, चन्रयान-2, GSAT-29 ि 19,
के यर गमशन
नेक्स्ट जनिेान लॉन्च व्हीकल (NGLV)
• गनम्न पृथ्िी कक्षा में 30 टन की पेिोड क्षमता ।
• अधण-क्रायोिेगनक प्रर्ोदन (ईधन ं के रूप में पररष्ट्कृत के रोगसन और ऑक्सीकारक के रूप में तरि
ऑक्सीिन)
• अििी पीढ़ी का प्रक्षेपर् यान (NGLV) को गिकगसत करने हेतु के न्रीय मंगिमंडि ने मंिरू ी दी है ।
• NGLV की पेिोड क्षमता LVM 3 की ति ु ना में 3 िनु ा होिी िबगक इसकी िाित 1.5 िनु ा होिी ।
• NGLV को गनम्न पृथ्िी कक्षा (Low Earth Orbit) में अगधकतम 30 टन पेिोड तथा भगू स्थर
स्थानांतरर् (GTO) में 10 टन पेिोड क्षमता के गिए गडिाइन गकया िया है ।
58 विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
क्रायोजेवनक तज
ं न प्रौद्योविकी क्रायोजेवनक तज
ं न के लाभ
• क्रायो शब्द का शागब्दक तात्पयण 'अत्यंत गनम्न ताप’ से होता है। सामान्यतः
• भारत अब स्ियं भारी उपग्रहों को प्रक्षेगपत कर
-150°C से कम तापमान को क्रायोिेगनक ताप की संज्ञा दी िाती है।
सके िा, गिससे अन्य अतं ररक्ष एिेगन्सयों पर
• क्रायोिेगनक ईधन ं में प्रमख ु रूप से तरि हाइड्रोिन (-253°C) ि तरि
हमारी गनभणरता कम हुई है।
ऑक्सीिन (-183°C) होता है। (ईधन ं के रूप में : तरि हाइड्रोिन, • गिदेशी मरु ा भण्डार पर दबाि भी कम होिा।
ऑक्सीकारक के रूप में : तरि ऑक्सीिन प्रयक्ु त होती है।) ईधन ं के रूप में • अब भारत अपने स्तर पर अतं ग्रणहीय अगभयान
तरि हाइड्रोिन अगधक प्रर्ोद उत्पन्न करती है गिसमें प्रक्षेपर् यान की पेिोड
चिा सकता है।
िहन क्षमता ि िंबी दरू ी तय की क्षमता बढ़ िाती है।
• भारत अब अन्य गिकासशीि देशों के िीसेट
• भारत ने अपनी क्रायोिैगनक इिं न प्रौद्योगिकी का गिकास स्िदेशी रूप से गकया
उपग्रहों को कम कीमतों पर स्थागपत कर सके िा।
है। इसका प्रयोि GSLV माकण -2, GSLV माकण -3, LVM-3 आगद प्रक्षेपर्
िो भारत के गिदेशी मरु ा भण्डारों को बढ़ायेिा
यानों के तीसरे चरर् में होता है।
तथा अन्य गिकासशीि देशों का सहयोि भी
• क्रायोिेगनक इिं न में ईधन
ं के गिए गिगशि गमश्रधातु से बने टैंक की िरूरत पडती है। भारत को अतं राणष्ट्रीय रािनीगत में प्राप्त होिा।
• भारत में क्रायोिेगनक ईिनों
ं का गनमाणर् स्िदेशी तकनीक से रि प्रर्ोदन प्रर्ािी इसी से अतं ररक्ष बािार में गिकगसत देशों का
के न्र (Liquid Propulsion System Centre, LPSC) महेन्रगिरी,
एकागधकार भी समाप्त होिा।
तगमिनाडु द्वारा गकया िाता है।
• इसरो अब अनसु धं ान में अगधक गनिेश खचण कर
• अब तक गिकगसत गकये िए क्रायोिैगनक (i) क्रायोिेगनक इिं न-CE 7.5
सकता है तथा सरकारी खिाने पर दबाि कम
(2002 में गिकगसत) (ii) क्रायोिेगनक इिं न-CE 20 (2014 में गिकगसत) (iii)
होिा।
क्रायोिेगनक इिं न-CE 25 (2017 में गिकगसत)
• भारत अब िम्बी दरू ी की अतं र महाद्वीपीय
• CE 7.5 का सिणप्रथम प्रयोि GSLV-DS में गकया िया। CE 20 का सिणप्रथम
बेगिगस्टक गमसाइिों का गनमाणर् कर सकता है
प्रयोि GSLV माकण -2 में गकया िया। CE 25 का सिणप्रथम प्रयोि GSLV
िो हमें न्यनू तम गनिारर् क्षमता प्रदान करे िी।
माकण -3 में गकया िया।
• भारत अब अगधक उपग्रहों का प्रक्षेपर् कर
सकता है, गिससे यह आपदा प्रबंधन, संचार,
सचू ना, रक्षा आगद क्षेिों में अपनी क्षमताएं ओर
अगधक बढ़ा सकता है।
नौिहन प्रणाली (Navigation System)
• नौिहन प्रर्ािी – पृथ्िी पर सिीि और गनिीि की चि ओर अचि गस्थगत को ज्ञात करना नेिीिेशन कहिाता है।
• इसे गिकगसत करने के गिए उपग्रहों की एक श्रृंखिा प्रक्षेगपत की िाती है िो एक साथ गकसी स्थान या गकसी क्षेि गिशेर् का गचि
प्रस्ततु कर सकती है। िह नौिहन प्रर्ािी सबसे बेहतर मानी िाती है, गिसमें एक साथ तीन उपग्रह गकसी स्थान पर उपगस्थत होते है।
• नैिीिेशन कायणक्रम दो प्रकार का होता है-
1. िैविक
इसके द्वारा एक साथ परू ी पृथ्िी का गचि प्रस्ततु गकया िा सकता हैं। इस प्रकार के नेिीिेशन में अगधक उपग्रहों (ििभि-24) की
आिश्यकता होती है। कुि 24 उपग्रहों की श्रृंखिा।
िैविक नौिहन प्रणाली सबं ंवधत देा विाेषता
(i) निोनास रूस • मध्यम भ-ू कक्षा में स्थागपत, 2011 से सगक्रय, उपग्रहों की सख्ं या-27
(ii) िी.पी.एस. (निोबिपॉगिगशंिगसस्टम) सयक्ु तराज्यअमेररका • मध्यम भ-ू कक्षा में स्थागपत, 1994 से सगक्रय रूप से उपिब्ध, उपग्रहों की संख्या-32
(iii) बेइडु(कम्पास) चीन • मध्यम भ-ू कक्षा में स्थागपत, 2012 से सगक्रय, उपग्रहों की संख्या-30
(iv) िैिीगियो यरू ोपीयनयगू नयन • मध्यम भ-ू कक्षा में स्थागपत, 2019 से सगक्रय रूप से उपिब्ध, उपग्रहों की संख्या-30
59 विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
2. क्षेत्रीय नौिहन प्रणाली
• यह भारत की स्िदेशी स्िायत्त नौिहन उपग्रह प्रर्ािी है िो भारतीय स्थिीय सीमाओ ं से िेकर 1500 गकमी. के दायरे में अपनी
सेिाएाँ उपिब्ध करिाती है।
• इसमें 7 उपग्रहों की श्रृख
ं िा को सेिारत गकया िया है।
इनमें से 4 उपग्रह भ-ू स्थैगतक कक्षा में स्थागपत 3 उपग्रहों को भ-ू तल्ु यकागिक कक्षा में स्थागपत
गकये िए। (36000 गकमी. की ऊाँचाई) गकया िया है। (36000 गकमी. की ऊाँचाई)
• इसके माध्यम से दो प्रकार की सेिाएाँ प्रदान की िा रही हैं-
स्टैण्डडण पोगिशगनिं सगिणस प्रगतबगं धत सेिा
(िप्तु चर सेिा)
(आम नािररकों को गनःशल्ु क उपिब्ध) (राष्ट्रीय गहत के उद्दश्े यों की पगू तण हेत)ु
• इस प्रर्ािी को कारगिि यद्ध ु के बाद भारत की आिश्यकताओ ं को ध्यान में रखकर 2006 में मिं रू ी दी िई थी।
• इस प्रर्ािी को िल्डण िाइड रे गडयो नेगििेशन गसस्टम द्वारा भी मान्यता प्रदान की िई है।
• भारत के प्रधानमिं ी नरे न्र मोदी ने भारत के मछुआरों को समगपणत करते हुए इस प्रर्ािी का नाम 'नागिक' रखा है। इसका तकनीकी
नाम भी "Navigation with Indian Constellation (NaViC)" है।
'नाविक' प्रणाली के उपग्रहों का विििण -
IRNSS के कुछ अनुप्रयोि उपग्रह प्रक्षेपण का िषय प्रक्षेपण हेतु प्रयुक्त िाहन
1. स्थिीय, हिाई और समन्ु री 7. ड्राइिरों के गिए दृश्य और IRNSS1A िि
ु ाई, 2013 PSLVS-22
नेगििेशन में। आिाि नेिीिेशन में। IRNSS 1B अप्रैि, 2014 PSLVC-24
2. सटीक समय बताने में। 8. नक्शे बनाने में। IRNSS 1C अक्टूबर, 2014 PSLVC-26
3. आपदा प्रबंधन में। 9. मौसम गिज्ञान में। IRNSS 1D माचण, 2015 PSLVC-27
4. िाहन रैगकंि में। 10. यागियों के गिए स्थिीय IRNSS 1E िनिरी, 2016 PSLVC-31
5. खोि ि बचाि कायणक्रमों में। नेिीिेशन में। IRNSS 1F माचण, 2016 PSLVC-32
6. भिन गनमाणर् क्षेि में। IRNSS 1G अप्रैि, 2016 PSLVC-33
GAGAN (GPS Aided Geo Augmented Navigation) IRNSS 1I अप्रैि, 2018 PSLVC-41
IRNSS 1H अिस्त, 2017
• यह GPS आधाररत भ-ू सिं गधणत नौिहन प्रर्ािी है। (GPS PSLVC-39
असफिगमशन
Aided GEO Augmented Navigation, GAGAN)
• 'ििन' प्रर्ािी भारत की नािररक उड्डयन सेिाओ ं की िरूरी • ग्राउंड स्टे ान -
1. गदल्िी 2. िोिाहाटी
पररशद्ध
ु ता एिं गििसनीयता हेतु प्रयक्त
ु होती है तागक बेहतर िायु 3. गििेन्दरम् 4. बैंििोर
यातायात प्रबंधन उपिब्ध हो सके । इसे 'भारतीय गिमानपत्तन 5. अहमदाबाद 6. िम्मू
प्रागधकरर् (AAI)' ि ISRO ने गमिकर तैयार गकया है। 7. कोिकात्ता 8. पोटण ब्िेयर
• इस प्रर्ािी को भारतीय सचं ार उपग्रह GSAT-8, GSAT-10 • इसका मख्ु यािय बैंििोर में गस्थत है।
ि GSAT-15 पर उपिब्ध करिाया िा रहा है। • नोट :- इस प्रर्ािी का उपयोि करने िािी
• 2015 से इसे पर्ू ण रूप से सगक्रय कर गदया िया है। पहिी एयरिाइन - Indigo
भाित के अंतरिक्ष अन्िेक्षण वमान
• इस प्रकार के गमशन अन्तररक्ष शगक्त के रूप में स्थागपत देश अतं ररक्ष को िानने और उसके संबधं में िैगिक अनसु धं ान ि गिकास
को बढाने के गिए प्रक्षेगपत करते है। भारत भी एक बडी अन्तररक्ष शगक्त है। इसगिए समय समय पर गिगभन्न अन्तररक्ष अन्िेर्र्
गमशन प्रक्षेगपत गकये िये है।
60 विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
1. मंिल वमान
मंिलयान-1
• यह इसरो का प्रथम अन्तिग्रहीय अवभयान था। इसे आगधकाररक रूप से मंिल आवबयटि वमान (MOM) गमशन भी कहा िाता है।
इसका प्रक्षेपर् 5 निम्पबि, 2013 को PSLV-C-25 द्वारा गकया िया था तथा 24 वसतम्पबि 2014 को इसने मंिि की कक्षा में
सफितापिू णक प्रिेश गकया। पहिे प्रयास में ऐसा करने िािा भारत ऐसा पहिा देश है। इसके अिािा मंिि की कक्षा में पहुचने िािा
प्रथम एवायाई देा भी है। भारत यह उपिगब्ध हागसि करने िािा विि का चौथा देा था। (य.ू एस.ए., रूस, यरू ोपीयन स्पेस एंिेसी)
• भारत ने इस गमशन के गिए PSLV प्रक्षेपर् यान का प्रयोि इसगिए गकया क्योंगक यह ज्यादा गिश्िसनीय है।
उपलवधध :- इस गमशन में मंिि िृह के िायमु ण्डि सतह और गिकीरर् के बारे में महत्िपर्ू ण डेटा प्रा्त गकया िया, गिससे मंिि िृह के बारे
में िैगिक िैज्ञागनक समझ बढी, साथ ही भारत की प्रक्षेपर् और अन्तग्रहीय अगभयानों की क्षमताओ ं का प्रदशणन भी गकया िया।
मंिलयान-2
• यह मंिि पर भारत का भगिष्ट्य का गमशन है, इस गमशन में ओगबणटर के साथ साथ िैण्डर और रोिर भी भेिे िायेंिे। (मंिियान-1 में
के िि आगबणटर भेिा िया था।) यह गमशन भारत और फ्ांस संयक्ु त रूप से संचागित करें िे।
2. ाुक्र वमान
ाुक्रयान
• यह भी इसरो का भगिष्ट्य का गमशन है गिसे आगधकाररक रूप से शक्र ु आगबणटर गमशन (SOM/VOM) कहा िायेिा। इसे
मंिियान -2 के बाद प्रक्षेगपत गकये िाने की संभािना है।
3. सयू य वमान
आवदत्य L-1
• भारत के प्रथम सयू ण गमशन को आगदत्य L-1 की सज्ञं ा दी िई है। (भारतीय सदं भण में सयू ण को आगदत्य कहा िाता है। तथा इसे िैंग्रािे
पोइन्ट 1 पर स्थागपत होने के कारर् L-1 कहा िया है।) सयू ण का अध्ययन करने के गिए इसरो का यह पहिा गमशन है। इसका
प्रक्षेपर् PSLV-C57 के माध्यम से 2 गसतम्बर 2023 को सफितापिू णक गकया िया।
• PSLV गिमान की 59th सफि उडान की सहायता से श्रीहररकोटा के सतीश धिन अतं ररक्ष के न्र के दसू रे िॉन्ि पैड से
सफितापिू णक िॉन्च गकया िया।
आवदत्य L-1 वमान में 7 पेलोडस लिाये िये हैं जो वक वनम्पनवलवखत है -
i. VELC-Vissible Emission Line Cronograph. v. ASPEX-Aditya Solar Wind Particle Experiment
ii. SUFT- Solar Ultra- Violet Imaging Telescope vi. PAPA- Plasma Analyser Package for Aditya
iii. SOLEXS-Solar low energy X-ray spectrometer vii. MAG-Magnetometer
iv. HELIOS-High Energy LI orbiting X-Ray
spectrometer
आवदत्य L-1 वमान के उद्देश्य:- इस गमशन का मख्ु य उद्देश्य सयू ण और अतं ररक्ष के बीच सबं ंधों को समझने तथा इसका पृथ्िी पर होने िािे
प्रभाि का अध्ययन करना है। समग्रता में इसके उद्देश्य गनम्नगिगखत है-
(i) सौर कोरोना और क्रोमोस्फीयर की िगतशीिता का अध्ययन। (iv) सौर पिनों ि सयू ण के चम्ु बकीय क्षेि का अध्ययन।
(ii) कोरोनि मास इिं ेक्शन और सौर ज्िािाओ ं का अध्ययन। (v) सौर गिस्फोटों का अध्ययन।
(iii) सौर िगतगिगध का पृथ्िी के िातािरर् पर प्रभाि का अध्ययन।
लैंग्राजे वबन्दु
• िैंग्रिे गबन्दु िह गबन्दु होता है िहााँ 2 आकाशीय गपण्डों के मध्य िरुु त्िाकर्णर् बि सतं गु ित होता है तथा इस गबन्दु पर कोई भी
उपग्रह न्यनू तम ईधन उिाण का उपयोि करते हुए अपनी कक्षा में गनयगमत रूप से चक्कर ििा सकता है।
• सयू ण और पृथ्िी के मध्य ऐसे 5 गबन्दु L-1,L-2, L-3, L-4 और L-5 है, आने िािे समय में ISRO इनके गिए भी गमशन भेिेिा।
61 विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
4. एस्रोसेट
• यह इसरो का पहिा खिोिीय गमशन था। इसे भारत की पहली अंतरिक्ष िैधााला (मल्टी स्पक्ै र ि कै मरों से यक्ु त) भी कहा िाता
है। इसे वसतम्पबि 2015 में PSLV C-30 के माध्यम से प्रक्षेगपत गकया िया था।
• इसका मख्ु य उद्देश्य खिोिीय गपण्डों ि खिोिीय घटनाओ ं का अध्ययन करना है। इसके अिािा न्यूरॉन तािे, धलेक होल्स का
अध्ययन करना भी इसके उद्देश्यों में सगम्मगित है। ऐसे िेधशािा अतं ररक्ष में स्थागपत करने िािा भारत पहिा गिकासशीि देश है।
• इसका संभागित न्यनू तम िीिन ििभि 5 िर्ण था। ितणमान में भी यह गक्रयाशीि है। यह गनम्न भ-ू कक्षा में ििभि 650 गक.मी. की
ऊाँचाई पर स्थागपत है।
4. भाित की चन्द्रयान श्रंख्ला
चन्द्रयान - 1
• यह एक आगबणटर गमशन था गिसे 22 अक्टूबि 2008 को PSLV – C11 के माध्यम से सफितापिू णक प्रक्षेगपत गकया िया था।
• यह एक अन्िेर्र् गमशन था, गिसका उद्देश्य- चरं मा की सतह पर पानी और हाइड्रोगक्सि आयन का पता ििाने तथा चन्रमा की
सतह का एटिस गनगमणत करना और खगनि मानगचिर् था।
• चन्रयान-1 से एक मनू इम्पैक्ट प्रॉब चन्रमा की सतह पर गिराया िया था। तथा इसकी सहायता से भारतीय राष्ट्रीय ध्िि को
स्थागपत गकया िया।
• मनु इम्पैक्ट प्रॉब िहााँ गिरा था, उस ििह का नाम आगधकाररक रूप से ‘जिाहि पॉतटं ’ रखा िया।
• उपलवधध- चन्रमा की सतह पर पानी और हाइड्रॉगक्सि आयन का पता ििाया िया।
• चन्रयान-1 की उपिगब्धयों को अन्तररक्ष के इगतहास की सिाणगधक महत्िपर्ू ण 100 उपिगब्धयों में से एक माना िाता है।
चन्द्रयान - 2
• यह चन्रयान श्रृंखिा का दसू रा गमशन था इसे 22 जुलाई, 2019 को GSLV-MK-III-M1 की सहायता से प्रक्षेगपत गकया िया
था। चन्रयान-2 में एक आगबणटर, िैण्डर (गिक्रम) और रोिर (प्रज्ञान) शागमि थे। इसका मख्ु य उद्देश्य चन्रमा की सतह पर िैण्डर
और रोिर को उतारना तथा अपनी क्षमता का प्रदशणन करना था गकन्तु यह गमशन चन्रमा सतह पर दघु णटनाग्रस्त हो िया था।
• इस गमशन को आवं ाक सफल माना िाता है, क्योंगक रोिर और िैण्डर के नष्ट्ट होने के बाद भी इसके आगबणटर ने गनरन्तर कायण
करते हुए चन्द्रयान-3 की पृष्ट्टभूवम तैयाि की तथा चन्रमा की सतह की महत्िपर्ू ण िानकारीयााँ इसरो का उपिब्ध करिायी।
• चन्रमा की सतह पर िहां चन्रयान-2 दघु णटनाग्रस्त हुआ था उस साइट को आगधकाररक रूप से वतिंिा पॉतटं कहा िाता है।
चन्द्रयान - 3
• यह चन्रयान श्रृंखिा का तीसरा गमशन था और इसके माध्यम से चन्रमा की सतह पर िैण्डर (गिक्रम) और रॉिर (प्रज्ञान) की सॉफ्ट
िैंगडंि का सफि प्रदशणन गकया िया था। इसे 14 जुलाई, 2023 को LVM-III (M4) के माध्यम से िॉन्च गकया िया था।
• इसकी िैंगडंि साइट दगक्षर्ी ध्रिु के समीप है। 23 अिस्त, 2023 को चन्रयान – 3 चन्रमा की सतह पर िैण्ड हुआ।
• चन्रयान-3 गमशन का िीिनकाि (िैंडर और रोिर) एक चन्र गदिस (पृथ्िी के 14 गदन) था।
• ‘वाि ावि स्थान’ – चन्रमा पर िह स्थान िहााँ चन्रयान-3 िैंड हुआ था।
चन्द्रयान-III का उद्देश्य – भाित का िाष्ट्रीय अंतरिक्ष वदिस –
• रोिर को चन्रमा पर घमू ते हुए प्रदगशणत करना 23 अिस्त
• चन्रमा की सतह पर सरु गक्षत और सिु म िैंगडंि करना। • गिस गदन चन्रयान 3 चन्रमा की सतह
• यथा स्थान िैज्ञागनक प्रयोिों का संचािन यथा- सतह के तापीय िर्ु , चन्रमा की पर उतरा था, उस गदन को राष्ट्रीय
सतह पर भक ू ं पों का अध्ययन, सतह के पास ्िाज्मा में बदिाि का अध्ययन आगद। अतं ररक्ष गदिस के रूप में मनाया िाता है।
• चन्रयान-3 के प्रर्ोदन मॉडयि ू में एक गिशेर् प्रयोि – SHAPE (स्पेक्रो पोिीमेरी, • 2024 में थीम, “Touching Lives
ऑफ हैगबटेबि ्िेनेट अथण) गकया िया। while Touching the moon:
• इसका उद्देश्य ऐसे छोटे ग्रहों की खोि करना है िो रहने योनय है। India’s Space Saga”
62 विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
चन्द्रयान - 4
• भारत सरकार के अन्तररक्ष आयोि और इसरो ने चन्रयान 4 गमशन की अगधकाररक घोर्र्ा 18 गसतंबर, 2024 को की है तथा
इसके गिए बिट 2104.06 करोड रुपये का प्रािधान गकया िया है।
• इस गमशन का मुख्य उद्देश्य चन्रमा की सतह से गमट्टी ि चट्टानों (3 से 5 kg) के नमनू े धरती पर िाना है। इस गिशेर्ज्ञ गमशन में
िापान भी भारत की सहायता कर रहा है। इस स्पेसक्राफ्ट में 5 अिि-अिि माडॅयि ू होंिे ।
• इसे 2027 में प्रक्षेगपत करने की संभािना है। इस गमशन की घोर्र्ा राष्ट्रीय अतं ररक्ष गदिस (23 अिस्त) के अिसर पर ISRO के
तात्कागिक प्रमख
ु एस. सोमनाथ द्वारा की िई ।
चन्द्रयान - 5
• यह िापान (JAXA) ि भारत का संयक्ु त गमशन है। इसके गिए 2017 में समझौता गकया िया था तथा इसे LUPEX (िनू र पोिर
एक्स्िोरे शन) गमशन कहा िाता है। इसे ही हाि ही में आगधकाररक रूप से चन्रयान 5 की संज्ञा दी िई है।
• इस गमशन के गिए ISRO द्वारा िैंडर ि JAXA द्वारा रोिर गिकगसत गकया िायेिा तथा का गनमाणर् गकया िायेिा ।
• उद्देश्य- चंरमा के दगक्षर्ी ध्रिु पर पानी और अन्य मल्ू यिान संसाधनों की खोि करना ।
• अिगध - चंरमा की सतह पर 100 गदनों तक रह सकता है ।
चन्द्रमा के वलए मानि वमान
• यह इसरो का अत्यन्त महत्िाकांक्षी गमशन है। इसके तहत 2040 में चन्रमा पर मानि भेिने की योिना है।
वमान ििनयान
• यह इसरो का अतं ररक्ष में मानि भेिने का एक महत्िाकांक्षी गमशन है, इसके तीन चरर् है
प्रथम चिण वितीय चिण तृतीय चिण
यह मानि रगहत चरर् है। यह भी मानिरगहत चरर् यह मानि सगहत चरर्
इसके तहत िनिरी 2025 है। होिा। इसके तहत 3
में TD-1 (Technology इसके अन्तिणत TD-2 अतं ररक्ष यागियों को
Demonstration 1) को गमशन 2025 के अन्त में 2027 में अतं ररक्ष में
सफितापिू णक सम्पन्न सम्पन्न गकया िायेिा। भेिा िायेिा।
गकया िया।
• यह अतं ररक्ष गमशन गनम्न भ-ू कक्षा में ििभि 400 गकमी. पर स्थागपत गकया िाएिा।
• इसमें दो पेिोड होंिे- तसिो के प्रमुख के न्द्र –
1. समानि अतं ररक्ष उान के न्र
चयवनत चाि अंतरिक्ष यात्री (HSFC) –
1. शभु ांशु शक्ु िा इसे 30 िनिरी, 2019 में बैंििरू ु
क्रू मॉड्यि
ू सगिणस मॉड्यि ू में स्थागपत गकया िया। यह
2. प्रशांत नायर
3. अिं द प्रताप ििनयान पररयोिना के
मानि यागियों हेतु सहायता हेतु 4. अिीत कृ ष्ट्र्न कायाणन्ियन के गिए गिम्मेदार
होिा।
• यह गमशन GSLV MK-III (LVM-3) के द्वारा प्रक्षेगपत गकया िाएिा।
2. भारतीय सदु रू संिेदन सस्ं थान
• अतं ररक्ष यागियों का प्रगशक्षर्, बेंििरू
ु , फ्ासं ि रूस में सम्पन्न गकया िया है। (IIRS) – देहरादनू (उत्तराखण्ड)
• इस गमशन के दसू रे चरर् में एक अद्धण ह्यमू ेनोइड मगहिा रोबोट गिसे व्योमगमि नाम गदया
3. इसरो िड्त्िीय प्रर्ािी यगू नट
िया है, भेिा िाएिा।
(IISU) गतरुिनतं परु म (के रि)
• इसमें िर्ण 2025 में मानि भेिे िाने का प्रस्ताि है।
63 विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
भाित का सदु ू ि सिं ेदी उपग्रह काययक्रम (Indian Remote Sensing Satellite Programme)
• सदु रू संिेदन से तात्पयण है - अतं ररक्ष से गकसी िस्तु को स्पशण गकए गबना, उसके बारे में सचू नाओ ं का संग्रहर् • भारतीयसदु रू
करना सदु रू संिेदन कहिाता है। संिेदनके
• लॉयड एफ. सावबन्स (Floyd F. Sabin's) के मतानुसाि :- "सदु रू संिेदन का तात्पयण उन गिगधयों से है, गपता- प्रो.
गिनमें गकसी िक्ष्य को पहचानने तथा उसके िक्षर्ों को मापने के गिये गिद्यतु चम्ु बकीय ऊिाण िैसे प्रकाश, वपािोथ िामा
ऊष्ट्मा ि रे गडयो तरंिों को प्रयोि में िाया िाता है ।"
वपािोती को
• यह तकनीक दो प्रकार से कायण करती है-
(i) सिणप्रथम उपग्रह के माध्यम से िगक्षत स्थान की पहचान । मानािाता है।
(ii) इसके पिात् िगक्षत स्थान की गिशेर्ताओ ं ि आाँकडों का गिश्लेर्र् गकया िाता है।
• सदु रू सिं ेदन में गिद्यतु चम्ु बकीय गिगकरर्ों गिशेर् रूप से माइक्रोिैि इन्फ्ारे ड तथा रे गडयों िैि का इस्तेमाि होता है। 1988 में
भारतीय सदु रू संिेदी उपग्रह (IRS) कायणक्रम प्रारम्भ गकया िया।
• सदु रू संिेदन उपग्रहों को आमतौर पर 1000 गकमी. की ऊाँचाई पर पोिर आगबणट (ध्रिु ीय कक्षा) में स्थागपत गकया िाता है। ये
सेटेिाइट सयू ण तल्ु यकागिक होते हैं। इनका घर्ू नण काि 2 घण्टे होता है।
• ितणमान में IRS उपग्रहों को EOS (अथण आगबणट उपग्रह) की संज्ञा दी िाने ििी है।
सदु ू ि सिं ेदन के प्रकाि -
(a) वनवष्ट्क्रय सदु ू ि सिं ेदन - यह पृथ्िी की सतह से सयू ण के प्रकाश के पराितणन का अध्ययन करता है। यह के िि गदन में ही कायण कर
सकता है।
(b) सवक्रय सदु ू ि सिं ेदन- यह सक्ष्ू म तरंि पर आधाररत होता है। इनमें RADAR का प्रयोि गकया िाता है। गिशेर् रूप से गसंथेगटक
एपचणर राडार (SAR) का। यह गदन ि रात एिं सभी मौसमों में कायण कर सकता है।
सदु ू ि सिं ेदी उपग्रहों के उद्देश्य
(i) भौिोगिक सचू ना प्रर्ािी (GIS) :- सदु रू संिेदी उपग्रह भारत को भौिोगिक संरचना एिं गिस्तार से संबंगधत समग्र िानकारी
प्रदान करते हैं । िैस-े भारत का उत्तर एिं दगक्षर् तथा पिू ण एिं पगिम में अगधकतम गिस्तार की िानकारी इसी प्रकार भारत के
राज्यों में महत्िपर्ू ण आगद ।
(ii) राष्ट्रीय प्राकृ गतक ससं ाधन प्रबधं न प्रर्ािी (NNRMS) :- सदु रू सिं ेदी उपग्रह के आधार पर भारत सरकार ने NNRMS का
गिकास गकया है ।
(iii) गिगभन्न प्रकार के खगनि ससं ाधनों का मानगचिर्, खोिबीन इत्यागद िानकारी उपिब्ध कराना ।
(iv) फसि कटाई पिू ण क्षेि एिं उत्पादन का अनमु ान तथा िनस्पगत दशाओ ं के आधार पर िर्ाण एिं सख ू े की गस्थगतयों का आाँकिन ।
(v) भारत के तटीय क्षेिों का सिेक्षर् और िहााँ मत्स्य पािन के बारे में िानकारी और मैंग्रोि िनस्पगत एिं आरण भगू म क्षेिों का
मानगचिर् उपिब्ध कराना।
(vi) भारत के ििीय संसाधनों िैस-े निेगशयर, सतही िि, भगू मित िि तथा मौसम की िानकारी उपिब्ध कराना।
(vii) गसंचाई गनदेगशत क्षेि का सिेक्षर् तथा बाढ़ िोगखम क्षेि मानगचिर् एिं बाढ़ क्षगत मल्ू यांकन संबंधी कायण ।
सदु ू ि सिं ेदी उपग्रह का वसर्द्ांत
• सदु रू सिं ेदीउपग्रहअिरक्तगकरर्ोंके गसद्धातं परआधाररतहोतेहैं, क्योंगकइनगकरर्ोंकीभेदनिसिं ेदनक्षमताअगधकहोतीहै, अतः
इनगकरर्ोंके माध्यमसेपृथ्िीके ससं ाधनोंकापयणिेक्षर्एिं मानगचिर्गकयािाताहै ।
• यहकायणउपग्रहमेंस्थागपतपॅनक्रोमॅगटककै मरों, गिसमेंअिरक्तगकरर्ेंहोतीहैं, के द्वारागकयािाताहै ।ितणमानमेंइनउपग्रहोंमेंसक्ष्ू म
तरंिोंकाभीप्रयोिगकयािाताहै ।
सदु ू ि सिं ेदी उपग्रह की अिवस्थवत
• सदु रू संिेदी उपग्रह हमेशा पृथ्िी से 1000 गकमी. की ऊंचाई पर ध्रिु ीय कक्षा में स्थागपत गकये िाते हैं क्योंगक इस ऊाँचाई पर अक्षांश
एिं देशांतर रे खाओ ं की गस्थगत इन उपग्रहों के अनक ु ू ि होती है । इन उपग्रहों को सयू -ण समकागिक भी कहा िाता है क्योंगक ऐसे उपग्रह
पृथ्िी को कक्षा में घर्ू नण के समय हमेशा सयू ण के समकक्ष होते हैं और इनका घर्ू नण काि 2 घंटे होता है ।
• पृथ्िी के ध्रिु ों पर िरुु त्िाकर्णर् बि के प्रभाि से बचने के गिए इन उपग्रहों का घर्ू नण काि तीव्र रखा िाता है, गकन्तु इससे इनकी ऊिाण
की खपत अगधक हो िाती है और उपग्रह का िीिनकाि कम हो िाता है । इसगिए ध्रिु ीय कक्षा में बार-बार सदु रू सिं ेदी उपग्रहों का
प्रक्षेपर् करने की आिश्यकता होती है।
64 विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
भाित के प्रमुख सदु ू ि सिं ेदन उपग्रह
ितणमान में 19 सदु रू संिेदी उपग्रह कायणरत है- भारत में इन उपग्रहों का अध्ययन पीगढयों के रूप में गकया िाता है। यथा-
• प्रथम पीढी के सदु ू ि सिं ेदन उपग्रह • वितीय पीढी के सदु ू ि सिं ेदन उपग्रह
▪ IRS-1A - 1988 में प्रक्षेगपत गकया िया। ▪ IRS-1E - 1993 में प्रक्षेगपत गकया िया।
▪ IRS-1B - 1991 को प्रक्षेगपत गकया िया। ▪ IRS-1C - 1995 में प्रक्षेगपत गकया िया।
• तृतीय पीढी के सदु ू ि सिं ेदन उपग्रह ▪ IRS-1D - 1997 में प्रक्षेगपत गकया िया।
▪ इस पीढ़ी का प्रारम्भ 1997 से माना िाता है।
▪ तीसरी पीढी के महत्िपर्ू ण उपग्रह गनम्न प्रकार से है:-
(i) काटोसैट श्रृंखला के उपग्रह- इन उपग्रहों को 'आई इन द स्काई' की संज्ञा दी िाती है। ये रक्षा सेिाओ ं और तटीय गनिरानी हेतु
अत्यंत महत्त्िपर्ू ण हैं। इसके अन्तिणत गनम्नगिगखत उपग्रह सगम्मगित हैं:-
काटोसेट-1 यह काटोसेट श्रृख
ं िा की पहिी पीढी का उपग्रह था। यह मानगचिर् हेतु गनगमणत गकया िया, गिसे PSLV-C6 की
सहायता से 2005 में प्रक्षेगपत गकया िया था।
काटोसेट-2 यह इस श्रृंखिा का दसू री पीढी का पहिा उपग्रह है, गिसे PSLV-C7 से 2007 में प्रक्षेगपत गकया िया था। उरी हमिे
के बाद 2016 में भारतीय सेना द्वारा POJK में की िई सगिणकि स्राइक में इसका महत्त्िपर्ू ण योिदान माना िाता है।
काटोसेट-2A इसे PSLV-C9 की सहायता से 2008 में प्रक्षेगपत गकया िया था।
काटोसेट-2B इसे PSLV-C15 की सहायता से 2010 में अतं ररक्ष में भेिा िया था। इसमें अत्याधगु नक पैन क्रोमेगटक कै मरे ििाये
िये है।
काटोसेट-2D इसे PSLV-C37 द्वारा 2017 में प्रक्षेगपत गकया िया था। यह िही PSLV-C37 है गिसकी सहायता से भारत ने एक
साथ 104 उपग्रहों का प्रक्षेपर् करके गिि कीगतणमान स्थागपत गकया था।
काटोसेट-2E इसे PSLV-C38 के माध्यम से 2017 में प्रक्षेगपत गकया िया था। यह यातायत प्रबधं न हेतु काफी महत्त्िपर्ू ण है।
काटोसेट-2F इसे PSLV-C40 से िनिरी, 2018 में प्रक्षेगपत गकया िया था।
काटोसेट-3 काटोसेट श्रृख
ं िा की तीसरी पीढ़ी का पहिा उपग्रह है। यह काटोसेट श्रृख
ं िा का सिाणगधक उन्नत उपग्रह है। यह एक
पृथ्िी अििोकन उपग्रह है। इसे PSLV-C47 की सहायता से निम्बर, 2019 में प्रक्षेगपत गकया था। इसका उपयोि
भारत की ििभि सभी सरु क्षा, िोपनीय ि सैन्य एिेगन्सयों द्वारा गकया िाता है।
65 विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
(ii) रिसोसयसैट श्रख ृं ला के उपग्रह – यह भौिोगिक ि राष्ट्रीय ससं ाधनों का मानगचिर् ि खोिबीन करता है। इस श्रृख
ं िा में ितणमान में
तीन सदु रू संिेदी उपग्रह कायणरत हैं-
उपग्रह प्रक्षेपण यान िषय कायय
रिसोसयसैट - 1 PSLV-C5 अक्टूबर, 2023 आपदा प्रबंधन, िि संसाधन प्रबंधन हेतु
रिसोसयसैट - 2 PSLV-C16 अप्रैि, 2011 भगू म प्रबंधन िि प्रबंधन हेतु
रिसोसयसैट - 2A PSLV-C36 गदसम्बर, 2016 फसि प्रर्ािी गिश्िेर्र् मृदा मानगचिर् हेतु
(iii) ओानसैट श्रृंखला के उपग्रह- ितणमान में दो हैं-
उपग्रह प्रक्षेपण यान िषय कायय
ओानसैट-1 PSLV-C2 मई, 1999 • यह संसार का पहिा उपग्रह था गिसे सािर/समरु के मानगचिर् ि
सिेक्षर् हेतु भेिा िया था।
• तटीय क्षेिों का अध्ययन भी इसका एक महत्त्िपर्ू ण पहिू है।
ओानसैट-2 PSLV-C14 गसतम्बर, 2009 • यह ओशनसैट के कायों को ही आिे बढ़ा रहा है।
• मौसम भगिष्ट्यिार्ी, मछुिारों महासािर, िाष्ट्पीकरर्, ज्िार-भाटा
आगद के आाँकडों का संग्रहर् करे िा।
• मेघा रॉवपक्स (PSLV-C18, अक्टूबि, 2011) • सिल (SARAL)-(PSLV-C20, फिििी, 2013)
✓ इसे INSAT-VRR कर संज्ञा दी िाती है। ✓ यह भी भारत-फ्ांस का संयक्त ु उपग्रह है।
✓ यह भारत ि फ्ांस का एक संयक्त ु उपग्रह गमशन है। ✓ सरि (SARAL-Satellite with ARGOS and
✓ इसे उष्ट्र् कगटबंधीय क्षेिों में िि चक्र तथा ऊिाण ALTIKA)
गिगनयम के अध्ययन हेतु िॉन्च गकया िया है। ✓ एक सामगु रक अध्ययन को समगपणत गमशन है। यह िििायु
• स्कै टसैट-1- (PSLV-C35, वसतम्पबि, 2016) पररितणन, सामगु रक पाररगस्थगतकी के आाँकडे इकट्ठे करे िा।
✓ यह भी महासािरीय अध्ययन एिं मौसम का पिू ाणनमु ान ✓ इसमें ka बैण्ड अल्टीमीटर "ALTIKA" ि आाँकडे संग्रहर्
ििाने हेतु कायण करता है। प्रर्ािी "ARGOS" फ्ांस द्वारा गनगमणत है िबगक C-बैण्ड
रांसपोडर इसरो द्वारा गनगमणत गकया िया।
िीसैट (RISAT-िाडाि तमेवजंि सैटेलातट) श्रृंखला के उपग्रह
रिसैट-1 (Radar PSLV-C19 • यह अत्याधगु नक सक्ष्ू म तरंि सदु रू सिेदी उपग्रह गसंथेगटक एपचणर रडार (एसएआर) पेिोड
Imagine Satellite- (अप्रैि, 2012) है । इसका प्रमोचन, 2012 को पीएसएििी-सी 19 प्रमोचन यान से ध्रिु ीय सयू ण
1, RISAT-1) तल्ु यकागिक कक्षा में गकया िया ।
• उपयोि :- कृ गर्, िागनकी, गमट्टी की नमी, भ-ू गिज्ञान, समरु ी बफण , तट गनिरानी, िस्तु की
पहचान और बाढ़ िैसे अनप्रु योिों में सभी मौसमों के साथ-साथ गदन एिं रात की
अििोकन क्षमता का उपयोि करना ।
रिसैट-2 (Radar PSLV-C12 • यह भारत का िाससू ी उपग्रह है । 2009 को पीएसएििी-सी 12 के माध्यम से
Imagine Satellite- (अप्रैि, 2009) श्रीहररकोटा गस्थत सतीश धिन अतं ररक्ष कें र से प्रक्षेगपत गकया िया ।
2, RISAT-2) • यह उपग्रह एक रडार इमेगिंि उपग्रह है, िो सभी मौसमों में पृथ्िी के गचि िेने में सक्षम है।
• इस उपग्रह ने आपदा प्रबधं न अनप्रु योिों के सदं भण में इसरो की क्षमता में अगभिृगद्ध की । यह
भारत की सरु क्षा सबं धं ी आशक
ं ाओ ं का उन्मि ू न करे िा । इसके अिािा भक ू म्प, बाढ़ आगद
प्राकृ गतक आपदाओ ं के प्रबंधन में भी इसका उपयोि गकया िा सकता है ।
रिसेंट-2B (Radar PSLV-C46 • इसे 2019 को पीएसएििी-सी 46 के माध्यम से प्रक्षेगपत गकया िया ।
Imagine Satellite- (अप्रैि, 2019) • उपयोि :- कृ गर् पिू ाणनमु ान तथा आपदा प्रबंधन में सेिाएाँ प्रदान करना ।
2B, RISAT-2B)
66 विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
रिसैट-2BRI (Radar PSLV-C48 • ररसेंट श्रृख
ं िा के चौथे उपग्रह को 2019 को पीएसएििी-सी 48 द्वारा सतीश धिन
Imagine Satellite- (अप्रैि, 2019) अतं ररक्ष कें र से प्रक्षेगपत गकया िया ।
2BRI, RISAT- • यह ररसैट-2B श्रृंखिा का दसू रा उपग्रह है तथा काटोसॅट-3. के साथ िाससू उपग्रहों का
2BRI) गहस्सा है ।
• उपयोि :- यह कृ गर्, िागनकी तथा आपदा प्रबधं न तथा सीमा गनिरानी के क्षेि में सेिाएाँ
प्रदान करे िा । इस गमशन का िीिन 5 िर्ण है ।
रिसैट-1B (EOS-09) 18 मई, 2025 • यह ररसैट श्रृख
ं िा का निीनतम ि सिाणगधक उन्नत उपग्रह है िो भारत की रक्षा तैयाररयों
को मिबतू ी प्रदान करे िा। इस उपग्रह में SAR (गसंथैगटक अपचणर राडार) राडार ििा
हुआ है।
सदु ू ि सिं ेदन से सबं ंवधत सस्ं थान
• हैदराबाद में गस्थत राष्ट्रीम सदु रू संिेदन के न्र को । गसतम्बर, 2008 को इसरो के पर्ू ण गिकगसत कें र के स्प में पररिगतणत कर गदया िया ।
इससे पहिे एनआरएससी एक स्िायत्त गनकाय था, िो अतं ररक्ष गिभाि के अतं िणत राष्ट्रीय सदु रू सिं ेदन एिेंसी (NRSA) कहिाता था ।
• उद्देश्य :- उपग्रह से प्राप्त आंकडों का उपयोि करके पृथ्िी के संसाधनों की पहचान, ििीकरर् और गनिरानी करना । देश के प्राकृ गतक
संसाधनों की योिना बनाने और प्रबंधन के गिए आधगु नक दरू संिेदी तकनीकों का उपयोि करने के गिए कायण संचािन में सहयोि करना ।
• कायय :- यह कें र सदु रू सिं ेदन उपग्रह आाँकडों की प्रागप्त, आाँकडों के गितरर्, हिाई सदु रू सिं ेदन और आपदा प्रबधं न हेतु गनर्णय सहायता
को गिय गिम्मेदार है ।
भाितीय सदु ू ि सिं ेदन सस्ं थान (Indian Institute of Remote Sensing, IIRS)
• देहरादनू मेंगस्थतभारतीयसदु रू सिं ेदनसस्ं थान, अतं ररक्षगिभाि, भारतसरकारकीएक इकाईहै ।
• यहसदु रू संिेदन, भ-ू सचू ना, अिगस्थगतिनौिहनप्रौद्योगिकीतथातत्संबंगधतअनप्रु योिोंके क्षेिमेंक्षमतागनमाणर्के गिये गशक्षर्,
प्रगशक्षर्औरअनसु ंधानकाएकमहत्त्िपर्ू ण संस्थानहै ।
• यहसयं क्तु राष्ट्रके तत्िाधानमेंएगशयाएिं प्रशातं क्षेिके गियेअतं ररक्षगिज्ञानएिं तकनीकीगशक्षाकें रके रूपमेंमेिबान सस्ं थानहै ।
• भारतीयसदु रू संिेदनसंस्थानकोपहिेभारतीयफोटोगनिणचनसंस्थानके
नामसेिानािाताथा ।इसकीस्थापनािर्ण1966 मेंभारतीयसिेक्षर्के (i) िाष्ट्रीय सदु ू ि सिं ेदन के न्द्र (NRSC)
तत्त्िाधानमेंहुईथी, िहााँनिीनतमप्रौद्योगिगकयोंपरव्यािहाररकअनभु िके • मख्ु यािय : हैदराबाद
साथगिस्तृतप्रगशक्षर्कीव्यिस्थाथी । • इसरो से संबंध : 1 गसतम्बर, 2008 (पिू ण
• इससंस्थानकोिि नाम : राष्ट्रीय सदु रू संिेदन एिेंसी
ु ाई1976 मेंराष्ट्रीयसदु रू संिेदनएिेंसीके साथगमिा
गदयािया ।िर्ण1980 मेंराष्ट्रीयसदु रू सिं ेदनएिेंसीकोअतं ररक्षगिभाि (NRSA))
(भारतसरकार) औरगसतम्बर, 2008 सेभारतीयसदु रू संिेदनसंस्थानको (ii) भाितीय सदु ू ि सिं ेदन सस्ं थान (IIRS)
राष्ट्रीयसदु रू सिं ेदनएिेंसीके एकभािके रूपमेंइसयेके अतं िणतिायािया • मख्ु यािय : देहरादनू
।िर्ण2011 सेआईआईआरएसकोइसरोके एकअििगनकायके रूपमें • इसे 2011 में इसरो की एक अिि इकाई
मान्यतादीिईहै । के रूप में मान्यता गमिी।
(iii) क्षेत्रीय सदु ू ि सिं ेदन के न्द्र-पााँच हैं-
• उद्देश्य :- प्राकृ गतकसंसाधनप्रबंधनहेतु सदु रू संिेदनतथाभ-ू प्राकृ गतकमें
िोधपरु , नािपरु , नई गदल्िी, बैंििरुू एिं
स्नातकोत्तरकागशक्षर् । सदु रू संिेदनतथाभ-ू प्राकृ गतकमेंगकयेिए
कोिकाता ।
अनसु ंधानकाप्रचार-प्रसार । अगधमल्ू यताएिंसेिाएाँ । प्रयोक्तासमदु ायके
बीचप्रौद्योगिकीअतं रर् ।
• कायय :- आईआईआरएस का कायण 'प्रौद्योविकी अंतिण' और प्रयोक्ता िािरूकता के समग्र िक्ष्य को ध्यान में रखकर शैगक्षक
संस्थाओ ं और प्रयोक्ता समदु ाय के गिर्य गिशेर्ज्ञों का सदु रू संिेदन और िीआईएस प्रौद्योगिकी/अनप्रु योि पर स्नातकोत्तर स्तर का
प्रगशक्षर् देना है ।
• इससस्ं थानद्वारागिगभन्निक्ष्यसमहू कीगिगिधआिश्यकताओं के अनरू ु पअनेककायणक्रमतैयारगकयेहैं ।
67 विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
प्रादेवाक सदु ू ि सिं ेदन सेिा के न्द्र (Regional Remote Sensing Service Centre, RRSSC)
• दगक्षर्, क्षेिप्रादेगशकसदु रू सिं ेदनके न्र(RRSSC) :- बैंिलौि
• पगिम, क्षेिप्रादेगशकसदु रू संिेदनके न्र(RRSSC) :- जोधपुि
• पिू ण, क्षेिप्रादेगशकसदु रू संिेदनके न्र(RRSSC) :- कोलकाता
• उत्तरक्षेिप्रादेगशकसदु रू संिेदनके न्र(RRSSC) :- वदल्ली
• मध्यक्षेिप्रादेगशकसदु रू सिं ेदनके न्र(RRSSC) :- नािपिु
• उद्देश्य :- उपयोिकताणओं कोगडगिटिप्रगतगबंबगिश्लेर्र्एिंभौिोगिकसचू नाप्रर्ािी(िीआईएस) के गिएसगु िधाएाँप्रदानकरना ।
• कायय :- उपयोिोंके नएक्षेिोंमेंतकनीकोंकागिकासएिंप्रदशणनकरना । उपयोिकताणएिेंगसयोंके िैज्ञागनकोंकोसदु रू संिेदनउपयोि,
गडगिटितकनीक, िीआईएसएिं गिर्यआधाररतउपयोिोंमेंप्रगशगक्षतकरना । राष्ट्रीययोिनाओं कोकायाणगन्ितकरनेएिं सदु रू सिं ेदी
उपयोिक्षेिकीिगतगिगधयोंकोबढ़ािादेनेमेंसहायकसेिाप्रदानकरना । प्राकृ गतकसंसाधनप्रबंधनसेसंबंगधतराष्ट्रीयगमशन ।
▪ प्रयोक्ताउपयोिपररयोिना ।
▪ सदु रू सिं ेदीउपयोिगमशनों(आरएसएएम) के अतं िणतपररयोिनाएाँएिं प्रौद्योगिकीगिकासपररयोिनाएाँ ।
▪ सॉफ्टिेयरगिकासएिंअनक ु ू िन।
▪ प्रगशक्षर्एिंगशक्षा ।
▪ देशमेंप्रौद्योगिकीके गिकासकीगदशामेंगिशेर्ज्ञसिाहसिाहकारीसंस्था ।
हातवसस उपग्रह (Hysis)
• हाइगसस से तात्पयण Hyper Spectral Imaging Satellite है।
• इसे PSLV-C43 से निम्बर, 2018 में प्रक्षेगपत गकया िया था।
• यह एक गिगशि उपग्रह है, यह पृथ्िी की सतह का गिद्यतु चम्ु बकीय स्पैक्रम के माध्यम से अध्ययन करे िा।
NISAR (NASA-ISRO SAR)
स्टािवलंक : उपग्रह आधारित तटं िनेट सेिा • NASA और ISRO के बीच एक संयक्त ु पृथ्िी-अििोकन
• स्टारगिक ं , एिन मस्क की स्पेसएक्स कंपनी द्वारा गिकगसत गमशन है, गिसे हर 12 गदन में परू ी दगु नया का नक्शा बनाने
एक सैटेिाइट इटं रनेट नेटिकण है। इसका उद्देश्य दगु नया के हर के गिए गडज़ाइन गकया िया है। यह िगतशीि सतहों,
कोने में, खासकर उन ििहों पर िहााँ पारंपररक इटं रनेट तक बदिते पाररगस्थगतकी तिं और बफण के गपडं ों का अध्ययन
पहुचाँ मगु श्कि है, हाई-स्पीड इटं रनेट पहुचाँ ाना है। यह िो अथण करने के गिए उन्नत रडार इमेगिंि का उपयोि करता है, िो
ऑगबणट (LEO) में सैटेिाइट का उपयोि करता है, िो बायोमास, प्राकृ गतक खतरों, समरु के स्तर में िृगद्ध और
पारंपररक गियोस्टेशनरी सैटेिाइट से कम दरू ी पर होते हैं, भिू ि के बारे में महत्िपर्ू ण िानकारी प्रदान करता है।
गिससे कम िेटेंसी (latency) और तेज़ इटं रनेट स्पीड गमिती NISAR के L और S बैंड SAR पेिोड एकीकृ त रडार
है। उपकरर् संरचना (IRIS) और अतं ररक्ष यान बस पर ििे
हैं, िो एक साथ गमिकर एक िेधशािा बनाते हैं।
भाित के प्रमुख सैन्य उपग्रह :-
(i) टे स (TES) इसे22 अक्टूबि 2001 कोPSLV C3 सेप्रक्षेगपतगकयाियाथा।यहLOC िLAC परगनिरानीकरताहै।
(ii) काटोसैट श्रृंखला
(iii) िीसैट श्रृख
ं ला (िाडाि तमेवजिं ) तथामातक्रोसैट-R
(iv) GSAT-7 – इसे30 अिस्त, 2013 कोप्रक्षेगपतगकयाियाथा।यहभारतीयनौसेनाकोसमगपणतभारतकापहिाआगधकाररक
उपग्रहहै।इसे‘रुवक्मणी’ कीसज्ञं ादीिईहै।
(v) GSAT-7A- यहभारतीयिायु सेनाकोसमगपणतहैतथाइसें‘एंग्रीबडण’कीसंज्ञादीिातीहै।
(vi) GSAT-7B- यहभारतीयििसेनाकोसमगपणतउपग्रहहै।
(vii) GSAT-7C- यहभीभारतीयथिसेनाकोसमगपणतहोिा।
68 विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
भाितीय िाष्ट्रीय उपग्रह प्रणाली (INSAT) Indian National Satellite System)
• यह भारत की संचार उपग्रह प्रर्ािी है। यह बहुउद्देश्यीय कायों हेतु समगपणत है; िैसे-दरू संचार, सामदु ागयक दरू दशणन के राष्ट्रव्यापी
प्रसारर्, आकाशिार्ी प्रसारर्, DTH, मौसम संबंधी िानकाररयााँ आगद। ितणमान में 15 उपग्रह कायणरत है।
• इस प्रर्ािी में 'अतं ररक्ष गिभाि + इसरो + दरू संचार गिभाि + भारतीय मौसम गिभाि + दरू दशणन + आकाशिार्ी' का सगम्मगित
प्रयास है।
तनसैट प्रणाली के प्रमखु उपग्रह
(i) प्रथम पीढी के तनसैट • इसमें चार उपग्रह थे यथा इनसैट-1A, 1B, IC ि ID आगद इन्हें अमेररकी कम्पनी 'फोडण एरोस्पेस'
उपग्रह - (तनसैट-1) ने गनगमणत गकया था। ितणमान में के िि इनसैट ID उपग्रह ही सेिारत है।
(ii) दूसिी पीढी के तनसैट • इनका गनमाणर् इसरो िैज्ञागनकों द्वारा ही गकया िया। इसमें 5 उपग्रह छोडे िए यथा इनसैट 2A, 2B,
उपग्रह (तनसैट-2) - 2C, 2D तथा 2E आगद ।
(iii) तीसिी पीढी के तनसैट • 2D के खराब होने के कारर् इनसैट 3B छोडा िया। 2D के कारर् भारत को कुछ समय तक
उपग्रह (तनसैट-3) अरबसैट की सहायता िेनी पडी थी।
(iv) चौथी पीढी के तनसैट • इस पीढ़ी के पहिे उपग्रह इनसैट-4A को एररयन 5-v169 प्रक्षेपर् यान से DTH हेतु प्रक्षेगपत
उपग्रह (तनसैट-4) गकया िया था। (2005)
• इसी कडी में मौसम गिज्ञान हेतु तीसरी पीढ़ी का एक उपग्रह इनसैट-3D को भी प्रक्षेगपत गकया
िया।
(v) GSAT-31 - • फरिरी, 2019 में प्रक्षेगपत गकया िया। यह DTH सेिाओ ं को बढ़ाने के गिए प्रक्षेगपत गकया िया।
(vi) GSAT-30 • यह िनिरी, 2020 को िॉन्च गकया िया। यह उपग्रह KU बैण्ड के माध्यम से भारतीय
उपमहाद्वीप एिं द्वीपों तक प्रसारर् सेिा हेतु तथा इसका C-बैण्ड खाडी देशों, एगशयाई देशों ि
आस्रेगिया तक प्रसारर् सेिाएाँ प्रदान करे िा।
(vii) GSAT-19 • इसे िनू , 2017 में प्रक्षेगपत गकया िया।
(viii) SAS (South Asia • यह भारतीय सैटेिाइट कूटनीगत का एक बहुत महत्त्िपूर्ण आयाम है। पहिे इसे साकण सैटेिाइट
Satellite) GSAT-9 नाम गदया िया था िेगकन गफर पागकस्तान की आपगत्त के बाद इसका नाम दगक्षर् एगशया संचार
उपग्रह कर गदया िया। इसका फै सिा 2014 की साकण बैठक (नेपाि) में गकया िया था। इसे
GSLV-F09 से मई, 2017 में भेिा िया था।
• इसका िाभ पागकस्तान को छोडकर शेर् सभी साकण सदस्य देशों को गमि रहा है।
• इसकी गित्तीय िाित पर्ू ण रुप से भारत सरकार ने िहन की थी।
(ix) GSAT-18 • इसे फ्ांस के एररयन-5 से िॉन्च गकया िया था।
(x) INSAT - 4B • मोबाईि इन्टरनेट सेिा प्रारम्भ
• इसका उपयोि Sun Direct तथा D.D. Direct द्वारा गकया िाता है।
(xi) G-SAT-1 • इसे 2001 में GSLV-D1 प्रक्षेपर् यान से प्रक्षेगपत गकया।
• यह एक प्रायोगिक उपग्रह या िो संचार से सम्बगन्धत था।
(xii) Edusat • िास्तगिक नाम GSAT-3 इसे 2004 में GSLV-F1 प्रक्षेपर् यान से प्रक्षेगपत गकया िया।
• यह भारत का प्रथम गशक्षा को समगपणत उपग्रह। यह उपग्रह दरू स्थ गशक्षा से सबं गधत है।
69 विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
(xiii) Kalpna-1 • प्रक्षेपर् - 2002 में
• इसका िास्तगिक नाम METSAT था, तथा इसका उपयोि मौसम गिभाि से सम्बगन्धत कायों में
होता है। 2003 में कल्पना चाििा की मौत के बाद इसका नाम कल्पना - 1 रखा िया।
GSAT-7 • प्रक्षेपर् - 2013
• यह देश का पहिा उपग्रह है, िो पर्ू तण ः सैन्य उपयोिों के गिए समगपणत है।
• यह भारत की मख्ु य भगू म तथा गहन्द महासािर क्षेि के बारे में सचू नाएं उपिब्ध करिाता है।
• ितणमान में इसका उपयोि भारतीय नौसेना द्वारा गकया िा रहा है।
• भारतीय नौ सेना इसका नाम 'रुकमर्ी' रखा।
GSAT-10 • प्रक्षेपर् - 2012
• यह ISRO द्वारा गिकगसत गकया िया प्रथम भारी उपग्रह था। इसका ििन 3.4 टन है।
• इसमें कुि 30 रांसपोडर ििे है। प्रक्षेपर्यान - एररयन - 5
• प्रक्षेपर् स्थान - कोरु प्रक्षेपर् के न्र
GSAT-14 • िनिरी 2014 में इसका प्रक्षेपर् गकया िया। GSLV-D5 प्रक्षेपर् यान द्वारा।
• यह भारत का प्रथम सफि क्रायोिेगनक गमशन है।
• यह एक प्रायोगिक उपग्रह है गिसमें ISRO गनम्नगिगखत प्रयोि कर रहा है -
1. Active Pixel Sun Sensor (APSS)- इस उपकरर् के माध्यम से सयू ण की गडिीटि तस्िीरें
प्राप्त की िायेिी।
2. Ka-Band Beam Propogation Studies इसके माध्यम से Ka-Band का परीक्षर् गकया
िा रहा है।
3. इस उपग्रह पर ISRO द्वारा गिकगसत की िई गिशेर् तापमान गनयंिक परतों की भी िांच की
िई है।
4. ISRO द्वारा गिकगसत गकये िये प्रकाश तंतु आधाररत Gyroscopes का परीक्षर् भी इसी
उपग्रह पर गकया िा रहा है।
G-SAT-19 • इस उपग्रह को भारत द्वारा गनगमणत सबसे भारी रॉके ट GSLV-MK- III D1 द्वारा 5 िनू 2017 को
श्री हररकोटा से प्रक्षेगपत गकया िया।
G-SAT-29 • इस उपग्रह को 14 निम्बर 2018 को GSLV-MK-D2 प्रक्षेपर् यान से श्री हररकोटा से प्रक्षेगपत
गकया िया। यह भारत की धरती से छोडा िया सबसे भारी ििन 3423 गकग्रा उपग्रह ।
• यह उपग्रह गडिीटि भारत कायणक्रम के तहत िम्मू कश्मीर ओर पिू ोत्तर क्षेिों को संचार सेिाएं
प्रदान करे िा।
G-SAT-11 • इसरो द्वारा गनगमणत भारत का सबसे भारी उपग्रह (5855 गकग्रा.)।
• प्रक्षेपर् गतगथ 5 गदसम्बर 2018, प्रक्षेपर् स्थान - फ्ें च िआ
ु ना
• प्रक्षेपर् यान - एररयन -5
• यह इसरो के उच्च डाटा प्रिाह क्षमता िािे संचार उपग्रह (HTS - High Throwput
Communication Satellite) समहू का एक उपग्रह है गिसके माध्यम से देश के दरू स्थ क्षेिों में
इन्टरनेट ब्रॉडबैण्ड कनेगक्टगिटी प्रदान की िाएिी। इसे 16 GBPS की डाटा प्रिाह दर प्रदान करने
के गिए गिकगसत गकया िया है। इसमें Ku (32) & Ka (8) बैण्ड के 40 रांसपोंडर सगम्मगित है।
• G-SAT-11 के माध्यम से भारत में पहिी बार Ka बैंड के उपयोि की शरुु आत हुई है।
• इसे 36000 गकमी की ऊाँचाई पर एक िृत्ताकार भ-ू गस्थर कक्षा में स्थागपत गकया िाएिा।
• इसकी कुि िीिन अिगध 11 िर्ण की है।
70 विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
G-SAT-30 • प्रक्षेपर् गतगथ 17 िनिरी 2020, प्रक्षेपर् स्थान - फ्ें च िआ
ु ना
• प्रक्षेपर् यान - एररयन – 5, यह उपग्रह िर्ण 2005 में भेिे िए इनसेट 4A उपग्रह का स्थान िेिा।
• इस उपग्रह का उपयोि DTH, V SAT कनेगक्टगिटी (िो बैंको के काम काि में सहयोि करती
है।) प्रदान करने, ATM, स्टॉक एक्सचेंि के गिए गकया िाएिा।
• इस उपग्रह में 12 C-Band और 12 Ku-Band रांसपोंडर ििे है।
G-SAT-7A • इसे 19 गदसम्बर 2018 में GSLV-F11 से श्री हररकोटा से प्रक्षेगपत गकया िया।
• इसके द्वारा िायसु ेना की यद्ध
ु आधाररत प्रर्ािी मिबतू होिी।
• इसके द्वारा ड्रोन ऑपरे शन में भी मदद गमिेिी िो अगधक ऊाँचाई पर सेटेिाइट कंरोि के िररए
काफी दरू ी से दश्ु मन पर हमिा करने की क्षमता रखते है।
G-SAT-31 • इसे 6 फरिरी, 2019 को फ्ें च िआ
ु ना के कोरू प्रक्षेपर् के न्र से एररयन-5 रॉके ट से प्रक्षेगपत गकया
िया।
• इस उपग्रह से टी.िी., DTH और ATM की सगु िधाएं सधु रे िी।
• इस उपग्रह से मोबाइि नेटिकण में सधु ार होिा ि कॉि ड्रॉप की समस्या कम होिी। इसका सबसे
ज्यादा फायदा अरब सािर, बंिाि की खाडी और गहन्द महासािर के इिाकों को होिा।
CMS-01 • प्रक्षेपर् गतगथ 17 गदसम्बर 2020
• प्रक्षेपर् स्थान - श्री हररकोटा
• प्रक्षेपर् यान PSLV - C 50
• उपयोि - संचार हेतु
EOS - 03 (अथय ऑि • प्रक्षेपर् गतगथ 12 अिस्त 2021 -
जििेान सैटेलातट) • प्रक्षेपर् स्थान - श्री हररकोटा
• प्रक्षेपर् यान GSLV - F 10
• गस्थगत - असफि
• अतं ररक्ष में भारत का सीसीटीिी।
• यह उपग्रह प्राकृ गतक आपदाओ ं और मौसम सम्बगन्ध ररयि टाइम िानकारी देता।
• इसकी तस्िीरें ररयि टाइम में इसरो को प्राप्त होती है। गिनका उपयोि ििीय स्त्रोतों, फसिों
ििं िों, सडको - बाधं ों - रे ििे के गनमाणर् में भी गकया िा सकता था।
• इतना ही नही इस उपग्रह की ताकतर आाँखे हमारे िमीनी और ििीय सीमाओ ं की गनिरानी भी
करती है।
G-SAT-20 • इसे GSAT-N2 या CMS – 03 भी कहा िाता है। इसे स्पेस-X के फाल्कन-9 प्रक्षेपर् यान से
निम्बर 2024 अतं ररक्ष में भेिा िया। यह एक उच्च थ्रपु टु सचं ार उपग्रह है गिसका ििन 4700
गकिोग्राम है। इसका िीिनकाि 14 िर्ण है तथा इसमें Ka-बैण्ड ििाया िया है। िो गक ब्रॉडबैंड
सेिाओ ं का मिबतू ी प्रदान करे िा।
Frequency उपयोि सच
ं ाि उपग्रह के उपयोि
Ku-Band-12-18 GHz DTH तथा HD सेिाओ ं में Use 1. मोबाइि ि टेिीगििन सेिाओ ं में
2. दरू स्थ गशक्षा में
K-Band 18-26.5 GHz 3. खोि ि बचाि कायों में
Ka-Band - 26.5-40 GHz भारत में प्रायोगिक स्तर पर 4. मौसम के पिू ाणनमु ान में
5. दरू स्थ गचगकत्सा में
71 विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
सदु ू ि सिं ेदी उपग्रहों पि आधारित अनुप्रयोि
Note
1. कृवष क्षेत्र में • योजना आयोि ने तन्हीं उपग्रहों िािा
1. कृ गर् क्षेि में शद्ध
ु बोये िये क्षेि का अनमु ान ििाया िाता है। भेजी िई सचू नाओ ं का प्रयोि किते हुए
कुल 15 कृवष जलिायु प्रदेाों में बांटा
2. कृ गर् उत्पादन का अनमु ान।
िया है वजनके आधाि पि वफि कृवष से
3. कीटों से प्रभागित क्षेिों का पहचान। जुडी परियोजनाओ ं का विकास वकया
4. गसंचाई स्त्रोतों में िि की उपिब्धता का अनमु ान। जाता है।
5. बाढ़ तथा सख ू े से प्रभागित कृ गर् क्षेिों की पहचान।
2. िावनकी क्षेत्र में
• इन उपग्रहों की सहायता से भारत में हर दो िर्ों के पिात् Forest Survey Report तैयार की िाती है गिसके अन्तिणत भारत में िनो
से ढके क्षेि तथा गिगभन्न क्षेिों से गमिने िािे िनों के प्रकार से िडु ी सचू नाएं होती है।
• इन्हीं उपग्रहों की सहायता से िन्य िीिों से िडु ी सचू नाएं प्राप्त होती है तथा यह िन्य िीिों के प्रिास से िडु ी सचू नाएं भी प्रदान करते है।
3. समुद्रीय अध्ययन के क्षेत्र में Ocean SAT
• समरु ों के ऊपर गमिने िािी मौसमीय पररगस्थगतयों का अध्ययन।
• समरु के िि स्तर में हो रहे पररितणन।
• समरु ी क्षेिों में पादप ्ििक (Phytoplankton) ि प्रिाि गभगत्तयों का अध्ययन ।
• समरु ों में िि के अपििन (मत्स्य क्षेिों की पहचान के गिए) का अध्ययन करने में।
• समरु ी प्रदर्ु र् का पता ििाने में।
4. आपदा प्रबंधन क्षेत्र में
• इन उपग्रहों की सहायता से अल्पकागिक मौसम पिू ाणनमु ान गिकगसत गकये िा सकते है िो गक आने िािी आपदा के प्रभािी प्रबंधन में
सहायक होते है। िैसे मौसम गिभाि - द्वारा इनके आाँकडों का उपयोि करके आने िािी मौसम पररितणन में और घटनाओ ं के बारे में
िानकारी देता है। िैसे पृथ्िी के गकसी कोने में चिने िािी गकसी खतरनाक हिा या चक्रिात आगद के बारे में शरू
ु होते ही आिामी
गहस्सों को सतकण कर देता है।
Note
5. सैन्य क्षेत्र में RI SAT - 2 • RI SAT-2B इस उपग्रह को 22 मई 2019
• सैन्य िाससू ी में को PSLV-C-46 - द्वारा प्रक्षेगपत गकया
• घसु पैठ को रोकने के गिए। िया है।
• उद्देश्य - कृ गर् क्षेि, िन गिज्ञान और आपदा
• शिु सेना की िगतगिगधयों पर निर रखने के गिए। प्रबंधन में।
• गकसी यद्ध
ु क्षेि में दश्ु मनों की गस्थगत का पता ििाने में।
6. प्राकृवतक सस
ं ाधनों का अनुमान लिाने में। Note
7. वकसी जिह पि या समुद्र में पानी का स्ति या बफय की मात्रा • इन उपग्रहों से प्राप्त सचू नाओ ं को एकगित
करके भौिोगिक सचू ना प्रर्ािी
आवद का पता भी तन सिं ेदी उपग्रह िािा ही लिाया जाता है।
(Geographical Information Centre)
8. भाित में ाहि प्रबन्धन, निि वनयोजन ग्रामीण वनयोजन तथा का गिकास गकया िया है गिसे BHUVAN
प्रदूवषत जल वनयोजन में भी तन उपग्रहों का उपयोि वकया जाता We Portal पर प्राप्त गकया िा सकता है।
है।
72 विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
ISRO के वपछले 2 िषय के चवचयत अवभयान
LVM-3/One Web India • िर्ण 2023 का दसू रा गमशन, 26 माचण 2023 को
– 2 वमान • LVM-3 प्रक्षेपर् यान से – श्री हररकोटा से प्रक्षेगपत गकया।
• इसमें 36 उपग्रहों को एक साथ प्रक्षेगपत गकया िया।
RLV-LEX वमान • 2 अप्रैि 2023 को, ऐरोनोगटकि रें ि, गचिदिु ण, कनाणटक से प्रक्षेगपत
• ISRO के साथ IAF, CEMILAC, ADE, ADRDE ने इस पररक्षर् में गहस्सा गिया।
• MSL से 4.5 गक.मी. तक उपर की ऊाँचाई से उडान भर कर पृथ्िी पर पनु : सफितापिू णक िैंगडंि
की।
PSLV-CSS का • 19 अप्रैि 2023 को, PSLV-CSS की सहायता से श्रीहररकोटा से प्रक्षेगपत
TeLEOS-2 वमान - • 2 उपग्रह TeLEOS-2 प्राथगमक
दोनों गसंिापरु के है।
Lumelite-4 सहायोिी उपग्रह
GSLV-F12 का NVS-01 • 29 मई 2023 को
वमान :- • 2232 Kg के NVS-01 (नेिीिेशन सैटेिाइट) को Geosynchronous Transfer Orbit में
स्थागपत गकया िया।
• यह नागिक प्रर्ािी का उन्नत करने में सहायक होिा।
PSLV C-52
• िर्ण 2022 का पहिा Launch : 14 फरिरी 2022
• 3 उपग्रह छोडे िए। PSLV-C-52
• EOS-04 + INSPIRE-SAT1 + INS - 2TD
EOS-04 INSPIRE-SAT1 INS - 2TD
• Earth Observatory Satellite. • यह एक छाि उपग्रह है • ISRO द्वारा प्रौद्योगिकी प्रदशणक
• एक रडार इमेगिंि उपग्रह • IIST तथा कोिोराडो उपग्रह है। थमणि इमेगिंि उपग्रह है।
• कृ गर्, िागनकी, िृक्षारोपर्, मृदा नमी, गिश्िगिद्यािय के छािों ने बनाया है। िो भगू म के सतह के तापमान,
िि गिज्ञान। • आयनमण्डि के िगत गिज्ञान और आरणभगू म, झीिों के पानी के सतही
सयू ण की कोरोनि उष्ट्मीय प्रगक्रया को तापमान, िनस्पगत के तापमान का
समझने के गिए। आक ं िन प्रदान करे िा।
PSLV C-53
• 30 िनू , 2022 को प्रक्षेपर्
• New Space India Ltd का दसू रा गमशन है।
• गसंिापरु के तीन उपग्रह – DS-EO, न्यसू र, PSLV-C-53
स्कूब-1, छोडे।
DS-EO न्यसू र स्कूब-1
• भगू म ििीकरर् के गिए पर्ू ण रंिीन • गसिं ापरु का पहिा िागर्गज्यक • गसिं ापरु के छाि उपग्रह श्रृख
ं िा का
तस्िीर भेिेिा। उपग्रह िो गदन-रात तथा सभी मौसम पहिा उपग्रह है।
• मानिीय सहायता और आपदा राहत में तस्िीर भेिने में सक्षम है।
आिश्यकताओ ं की पगू तण।
73 विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
PSLV-C-54 • प्रक्षेपर् – 28 निम्बर 2022 को
• ISRO का 2022 का 5िां तथा आगखरी गमशन
• EOS-06 + 8 नैनो उपग्रह (INS-2B + आनन्द + थायबोल्ट (1) + एस्रोकास्ट (4))
• EOS-06 (Ocean SAT-3):
✓ यह Ocean SAT श्रृख ं िा का तीसरा उपग्रह है।
✓ समरु गिज्ञान, िििाय,ु मौसम सबं धं ी, अनप्रु योिों में प्रयोि करने के गिए समरु के रंि,
समरु के सतह के तापमान का गनरीक्षर् करने के गिए।
• INS-2B:
✓ भारत ि भटू ान के बीच सहयोिी गमशन।
✓ भटू ान के गिए उच्च ररिॉल्यश ू न िािी छगियााँ प्रदान करे िा।
✓ Nano MX + APRS – गडिीपीटर (भटू ान द्वारा गिकगसत)
• आनन्द:
✓ बैंििोर गस्थत स्टाटणअप “Pixxel” द्वारा गनगमणत उपग्रह।
✓ पृथ्िी की गनचिी कक्षा में संस्थागपत।
✓ व्यिसागयक अनप्रु योिों के बेहतर गिकास में योिदान।
G-SAT-24 • प्रक्षेपर् - 23 िनू 2022
• भारतीय संचार उपग्रह
• दगक्षर् अमेररका के फ्ें च ियु ाना के कै रो से िॉन्च गकया।
• फ्ांगससी कम्पनी “एररयन स्पेस” के रॉके ट “एररयन 5” से िॉन्च गकया िया।
• यह उपग्रह 24-KU Band संचार उपग्रह है िो DTH आिेदन की िरुरत को परू ा करने के गिए
किरे ि प्रदान करे िा।
• चंगू क इसका ििन 4180 Kg है तथा भारत के पास 4 टन से अगधक िािे उपग्रह को भ-ू गस्थर
कक्षा में स्थागपत करने िािा प्रक्षेपर् यान नहीं है, इसगिए फ्ें च कम्पनी की सहायता िी िई।
• भारत का सबसे शगक्तशािी रॉके ट – “GSLV-MK-3” अगधकतम 4 टन ििन भ-ू गस्थर कक्षा में
उडने में सक्षम है।
LVM-M2/One Web • प्रक्षेपर् - 23 अक्टूबर 2022
India 1: • भारत के सबसे भारी रॉके ट LVM-3 ने गब्रगटश स्टाटण अप “One Web” के 36 उपग्रहों को पृथ्िी
की गनचिी कक्षा में स्थागपत गकया।
SSLV (Small Satellite • प्रक्षेपर् - 7 अिस्त 2022
Launch Vehicle • छोटे उपग्रहों के प्रक्षेपर् के गिए इसरो का यह पहिा प्रक्षेपर् मान है। (500 Kg से कम ििन)
• 2 उपग्रहों को छोडा िया EOS-02+ आिादी सैट
• असफि रहा बाद में 10 फरिरी 2023 की उडान सफि रही।
HS – 200 • प्रक्षेपर् – 13 मई 2022 को
• ििनयान गमशन के गिए “ह्यमू न रे टेड सॉगिड रॉके ट बस्ू टर” (HS200) का सफि परीक्षर् गकया
िया।
• HS-200 एक प्रकार का बस्ू टर है िो GSLV MK-III रॉके ट में ििाया िाएिा।
अवननकुल लॉन्चपैड • यह एक गनिी िॉन्चपैड है। (भारत का पहिा गनिी िॉन्चपैड)
• स्पेस स्टाटणअप “अगननकुि कॉसमॉस” द्वारा गनगमणत ि संचागित गकया िाएिा।
• IIT मरास में।
विक्रम S-िॉके ट • 18 निम्बर 2022 प्रक्षेपर्, भारत का गनिी तौर पर गिकगसत पहिा रॉके ट
• “स्काई रूट एयरोस्पेस” कम्पनी द्वारा
• यह अतं ररक्ष में रॉके ट िॉन्च करने िािी भारत की पहिी गनिी कम्पनी है।
74 विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
विकास तज
ं न • तगमिनाडू के महेन्रगिरी में गिकास इिं न का सफि परीक्षर् गकया िया।
• यह इिं न भारत के पहिे मानि िाहक गमशन (ििनयान) को शगक्त प्रदान करे िा।
स्पाकय • इसरो द्वारा गनगमणत िचणअ
ु ि स्पेस टेक पाकण
• यह 3D िचणअ ु ि कंटेट उपिब्ध करिाता है गिसमें 1520 के इगतहास और सफिता को गदखाया िया है।
• उत्तर भारत में पहिा अतं ररक्ष क्षेि के न्र – िम्मु के न्रीय गिश्िगिद्यािय
– सतीश धिन अतं ररक्ष के न्र
• कल्पना चाििा सेटर फॉर ररसचण इन – चण्डीिढ गिश्िगिद्यािय में।
स्पेस साइसं एंड टेक्नॉिॉिी
• भारत की पहिी व्यिसागयक सौर िैद्यशािा – िढिाि (उत्तराखण्ड)
तसिो औि DRDO एक नजि में
मानक डीआिडीओ तसिो
संस्थाकाप्रकार रक्षाअनसु ंधानएिंगिकासगिंि अंतररक्षएिेंसी
परू ानाम रक्षाअनसु ंधानएिंगिकाससंिठन भारतीयअंतररक्षअनसु ंधानसंिठन
गिभाि/मंिािय रक्षामंिािय अंतररक्षगिभाि(PMO के अंतिणत)
स्थापना 1958 (तकनीकीगिकास प्रगतष्ठान(TDE - भारतीयसेना) और 15 अिस्त, 1969 कोINCOSPAR (गिसे
तकनीकीगिकासएिं उत्पादनगनदेशािय(DTDP - रक्षागिज्ञान 1962 में स्थागपतगकयािया था) के स्थानपर
संिठन) कागििय
आदशणिाक्य बिस्यमि
ू ंगिज्ञानम् मानििागतकीसेिामेंअतं ररक्षप्रौद्योगिकी
मख्ु यािय नईगदल्िी बैंििोर
अध्यक्ष समीर- िी. कामत िी. नारायर्न
प्रथमअध्यक्ष िी. एस. अरुर्ाचिम गिक्रमसाराभाई
अवननबाण सॉटे ड - 1 वमान
• चेन्नईगस्थतस्टाटण-अप‘’अगननकुिकॉसमॉस’’प्राइिेटगिगमटेडनेप्रक्षेगपतगकया । इसगमशनकोश्रीहररकोटामेंगनगमणतभारतके पहिे
गनिीिॉन्चपैड‘धनर्ु ’सेिॉन्चगकयािया।
• यहगसंिि-पीस3-D गप्रंटेडइिं नके साथस्िदेशीरूपसेगडिाइनऔरगिकगसतदगु नयाके पहिेरॉके टकापरीक्षर्था।
• अगननकुिने3-D मगु रतरॉके टबनानेके गिए‘इक ं ोनेि’धातु काउपयोिगकया।
• ‘अगननबार्’सबऑगबणटिटेक्न ोिॉगिकिडेमोस्रेटर(Agnibaan – Sorted [Sub-Orbital Technology Demonstrator])
अगननकुिके पेटेंटेड‘अगननिेडइिं न’द्वारासंचागितएकएकिचरर्िॉन्चिाहनहै।
विक्रम - 1 िॉके ट
• गिक्रमभारतीयस्टाटणअपएयरोस्पेसकंपनीस्काईरूटद्वारागिकगसतअंतररक्षप्रक्षेपर्यानहै। हािहीमेंगिक्रम- 1 के दसू रे चरर्कापरीक्षर्
सफितापिू णकगकयाियाहै। गिक्रम1 - काचरर्- 2 उच्चशगक्तिािाकाबणनगमगश्रतमोटरहैिो रॉके टकोिायमु ंडिीयचरर्सेबाहरी
अंतररक्षमेंिेिाएिा। गिक्रम-1 अंतररक्षप्रक्षेपर्कोकिाम-250 नामसेभीिानािाताहै।
• स्काईरूटद्वारा'गिक्रम-एस' कापरीक्षर्निम्बर2022 मेंगकयाथा। स्काईरूट'सब- आगबणटि' रॉके टप्रक्षेगपतकरनेिािीभारतकीपहिीगनिी
कम्पनीबनियीथी।
भाितीय अंतरिक्ष के न्द्र (BAS - 1)
• मंजूिी :- 18 गसतम्बर, 2024, BAS-1 भारत के प्रस्तागित अंतररक्ष स्टेशन का पहिा मॉड्यि
ू है ।
• उद्देश्य :- BAS-1 िीिन रक्षक प्रर्ागियों और चािक दि के आिास िैसी प्रौद्योगिगकयों के गिए परीक्षर् के न्र के रूप में काम करे िा । इसे भगिष्ट्य
के मानियक्ु त गमशनों के गिए भी गडिाइन गकया िाएिा ।
• गदसम्बर, 2028 ‘BAS-1’ की पहिी इकाई को शरू ु करके परू ा गकए िाने का िक्ष्य रखा िया है ।के न्र सरकार ने अमृत काि में अतं ररक्ष के गिए
दृगिकोर् की रूपरे खा के तहत िर्ण 2035 तक एक भारतीय अंतररक्ष स्टेशन और िर्ण 2040 तक भारतीय क्रू चांद गमशन की पररकल्पना की है ।
75 विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
अन्य अंतररक्ष स् े शन
इं रनेशनल स्पेस स् े शन
अतं राणष्ट्रीय अतं ररक्ष स्टेशन (ISS) 20 निबं र, 1998 को िॉन्च गकया िया अतं ररक्ष में सबसे बडा मानि गनगमणत ऑब्िेक्ट है । यह अतं ररक्ष में अतं ररक्ष
यागियों के गिए आिास के रूप में कायण करता है। 2011 से, ISS पर ििातार िोि रह रहे हैं।
भाि लेने िाले िाज्य: ISS संयक्त ु राज्य अमेररका (नासा), रूस (िोस्कोस्मोस), यरू ोप (ESA), िापान (JXA) और कनाडा (CSA) अतं ररक्ष
एिेंगसयों की एक सहयोिी पररयोिना है।
अन्य महत्िपूणय PSLV वमान
• यह PSLV की 57िीं उडान है और PSLV कोर अिोन कॉगन्फिरे शन (PSLV-CA) का उपयोि करने िािा 16िााँ
PSLV-C55 गमशन है । यह न्यू स्पेस इगं डया गिगमटेड (NSIL) के माध्यम से समगपणत िागर्गज्यक गमशन है, गिसमें प्राथगमक उपग्रह के
22 अप्रैि, 2023 रूप में TeLEOS-2 और सह-यािी उपग्रह के रूप में Lumelite-4, दोनों गसिं ापरु से सबं गं धत हैं ।
• िैज्ञागनकों ने PSLV ऑगबणटि एक्सपेररमेंटि मॉड्यि ू -2 (POEM-2) का उपयोि इसके द्वारा गकये िए िैर-पृथक पेिोड
के माध्यम से िैज्ञागनक प्रयोिों को करने हेतु एक कक्षीय मंच के रूप में गकया ।
• इसरो ( भारतीय अंतररक्ष अनसु ंधान संिठन ) ने 30 िि ु ाई, 2023 को श्रीहररकोटा के सतीश धिन अंतररक्ष कें र से
PSLV-C56
गसिं ापरु के डीएस-एसएआर उपग्रह और अन्य 6 उपग्रहों को िे िाने िािे पीएसएििी-सी56 को िॉन्च गकया है ।
30 िि
ु ाई, 2023 • सात उपग्रहों को ध्रिु ीय उपग्रह प्रक्षेपर् यान पीएसएििी-सी56 के माध्यम से भमू ध्यरे खीय कक्षा में प्रक्षेगपत गकया िाएिा
• गसंिापरु और इज़राइि द्वारा गनगमणत गसंथेगटक अपचणर रडार (SAR) अंतररक्ष यान, DS-SAR उपग्रह मख्ु य पेिोड है ।
PSLV-C57 • इसको आगदत्य L-1 गमशन भी कहते है ।
2 गसतम्बर, • इसरो के इगतहास में यह पहिी बार था िब PSLV के चौथे चरर् को दो बार प्रक्षेगपत गकया िया, तागक अतं ररक्ष यान को
2023 उसकी अडं ाकार कक्षा में सटीक रूप से स्थागपत गकया िा सके ।
• XPOSAT (एक्स-िे पोलीमीटि सैटेलातट)
PSLV-C-58
• यह एक खिोगिय िेधशािा है । िो आकागशय स्िोतों से प्रा्त एक्स-रे के उत्सिणन करता है ।
1 िनिरी, 2024
• ऐसा उपग्रह िॉन्च करने िािा भारत दगु नया का दसू रा देश बन िया है । (प्रथम - अमेररका)
• इस गमशन के अतं िणत दो पेिोड क्रमश: पोगिक्स एिं XSPECT है ।
PSLV-C-59 • इसरो द्वारा श्रीहररकोटा अंतररक्ष के न्र से यरू ोपीय अंतररक्ष एिेंसी का प्रोबा-3 गमशन िॉन्च गकया ।
5 गदसम्बर, • करीब 550 Kg के दो उपग्रह PSLV C-59 रॉके ट से अंतररक्ष भेिे िए ।
2024 • उद्देश्य :- सयू ण के पररमंडि का अध्ययन करना है ।
PSLV-C-60 • इस गमशन में पेिोड के रूप में XPoSAT (X-ray Polarimeter Satellite) एक्स-रे पोिाररमीटर सैटेिाइट पीएसएििी द्वारा
30 गदसम्बर, प्रक्षेपर् गकया िाएिा। यह चमकीिे खिोिीय एक्स-रे स्रोतों का अध्ययन करने िािा भारत का पहिा पोिाररमेरी गमशन है।
2024 • स्पैडेक्स गमशन – स्पेस डॉगकि तकनीक के तहत गमशन में पहिी बार अंतररक्ष में दो उपग्रहों की डॉगकंि एिं अन डॉगकि
करना शागमि है ।
िषय 2024 में प्रक्षेवपत वमान
• प्रक्षेपर्-16 अिस्त2024 कोआंध्रप्रदेशगस्थतश्रीहररकोटागस्थतसतीशधिनअंतररक्षके न्रसे।
EOS - 08 (Earth
• इससैटेिाइटकाप्रक्षेपर्देशके सबसेछोटेरॉके टSSLV-D3 सेगकयािया।
Observation
• उद्देश्य - पयाणिरर्औरआपदाकोिेकरसटीकिानकारीदेना।
Satellite - 08)
• EOS-08 पहिागमशनहैगिसमेंतीनपेिोडशागमिहैं- 1. EOIR 2. GNSS-R 3. SIC-UV पेिोड
• भारतकासबसेएंडिासमौसमसेटेिाइट
• 17 फरिरी, 2024 कोसतीशधिनअंतररक्षके न्रसेGSLV-14 प्रक्षेपर्यानद्वाराप्रक्षेगपत
1. भस्ू थैगतककक्षामेंस्थागपतगकएिानेिािेतीसरीपीढीके मौसमउपग्रहकागमशनहै
तनसैट-3 डी एस
2. ििन:- 2,275 Kg 3. यहदेशकीमौसमसबं धं ीसेिाओं मेंिृगद्धकरे िा।
4. इसेमौसमअििोकन, भगिष्ट्यिार्ीऔरआपदाचेतािनीतथामहासािरीयसतहोंकी गनिरानीकरनेके गिये
गडिाइनगकयाियाहै।
• TASL - टाटा एडं िास वसस्टम वलवमटे ड
TASL
• यहगनिीक्षेिकापहिािाससू ीउपग्रहहै।
76 विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
तसिो के अन्य वमान
(PS-4) 3-D वप्रंटेड िॉके ट तज
ं न काटोसैट - 2
• इसरो द्वारा तगमिनाडु के महेंरगिरी से सफिता पिू णक परीक्षर् । • इसरो ने काटोसेट - 2 (Cartosat - 2) को उसके िीिनकाि
• इसमें एगडगटि मैन्यफ ू ै क्चररंि और 3-D गप्रगटंि तकनीक का समा्त होने के बाद गहदं महासािर में सफितापिू णक
इस्तेमाि गकया िया है । ििसमागध दे दी है ।
• PS-4 नामक इस इिं न का उपयोि PSLV में गकया िाता है । • ‘’काटोसैट-2’’ सैटेिाइट हाई-रे िोल्यश
ू न इमेगििं सैटेिाइट
• लाभ :- यह इिं न कच्चे माि की खपत में 97% की बचत सीरीि की दसू री पीढ़ी का पहिा सैटेिाइट था, गिसे 10
करता है । तथा प्रोडक्शन टाइम को 60% कम कर देता है । िनिरी, 2007 को िॉन्च गकया िया था ।
भाित का पहला एनालॉि अंतरिक्ष वमान फ्यूल सेल तकनीक
• इसरोद्वारादेशकापहिाएनािॉिअतं ररक्षगमशनिद्दाखके िेह • इसरोद्वारापरीक्षर्, PSLV-C58 द्वारा गकयािया।
मेंशरूु गकयाियाहै। • उद्देश्य:- पॉिीमरइिेक्रोिाइटमेम्ब्रेनईधनसे
ं िके
• उद्देश्य :- अतं रग्रहीय(Inter Planetary) आिासमेंिीिनका प्रचािनकोअतं ररक्षमेंगनधाणररत करनाऔरभगिष्ट्यमेंहोने
अनक ु रर्करनाऔरपृथ्िीसेपरे एकिेसस्टेशनस्थागपतकरने िािेगमशनोंके गिएडाटाएकगितकरप्रर्ािीके गडिाइन
कीचनु ौगतयोंकापताििाना। बनानेमेंसगु िधाप्रदानकरना।
• गिकास:- इसकोमानिअतं ररक्षउडानके न्रके साथAAKA • यएू िीदृगि(रक्षाम) :- 10 - स्िदेशीतकनीकपरआधाररत
Space Studio, िद्दाखगिश्िगिद्यािय, IIT बॉम्बेके साथ एडिांसड्रोनहािहीमेंनौसेनाको सौंपाियाहै।36
साझेदारीमेंगिकगसतगकयाियाहै। घण्टेतकउडनेमेंसक्षमहै।
• नेतृत्ि :- इसरोके मानिअतं ररक्षउडानके न्रनेगकयाहै। • 450 गकिोग्रामकाभारउठासकताहै।
तसिो का दूसिा स्पेसपोटय भाित का पहला वनजी स्िदेाी जासस
ू ी उपग्रह
• तगमिनाडुके थथु क ु ु डीगििेके कुिसेकरपरट्टनममेंइसरो • भारतकापहिागनिीक्षेिकािाससू ीउपग्रहप्रक्षेपर्के
कादसू रास्पेसपोटणबनरहाहै। गिएबनकरतैयारहोियाहै, गिसेटाटाकम्पनीके टाटा
• इसरोकापहिाऔरएकमािसतीशधिनअतं ररक्षके न्र एडिांसगसस्टमगिगमटेड(TASL) द्वारा तैयारगकयािया
आंध्रप्रदेशके श्रीहररकोटामेंगस्थतहै। हैं।
सबु ाबुल • भारतके इसपहिेगनिीिाससू ीउपग्रहको स्पेसएक्स
(Space-X)
प्रिवत ्लेटफामयद्वारािॉन्चगकयािाएिा।
• CBL - I, इगस्टटयटू ऑफएडिांस्डस्टडीइन साईन्सएण्ड
टैक्नोिॉिी, ििु ाहाटीके शोधकाताणओं नेआईप2 मधमु ेहमें • ऑक्सफोडणयगू निगसणटीके सईदगबिनेसस्कूि(SBS) के
इन्सगु िनप्रगतरोधकोव्यिगस्थतकरने के गिएसबु ाबि ु हागियाअध्ययननेप्रिगत्िेटफामणकीसराहनाकी।
सीडपॉडके गचगकत्सकीयिर्ु ोंकापताििाया। • PRAGATI ( प्रो- एगक्टिििनेंसएण्डटाइमिी
• सबु ाबि ु ( ल्यक
ू े िाल्यक
ू ोसेफिा) एकतेिीसेबढनेिािा इम््िीमेटेशन)
फिीदारपौधाहै, िोमैगक्सकोकीमि ू प्रिागतहै। • िॉच- प्रधानमिं ीमोदीद्वारा2015 में
ाुक्रयान • उद्देश्य - पररयोिनाकायाणन्ियनमेंतीव्रतािानाशासन
• इसरो(भारतीयअतं ररक्षअनसु ंधानसंिठन) कोभारतसरकारने औरपररयोिनागनष्ट्पादनमेंििाबदेही सगु नगितकरना
''शक्र
ु यान'' के गिएमंिरू ीप्रदानकीहै । स्पैडेक्स
• इसउपग्रहकोिर्ण2028 मेंिॉन्चगकयािानाप्रस्तागितहै।
• SPADEX :- Space Docking Experiment
धारिणी • यह इसरो का एक गमशन है गिसका उद्देश्य दो अतं ररक्ष यानों
• धाररर्ी117 - मरासद्वारागिकगसतएकभ्रर्ू मगस्तष्ट्कएटिसहै। की स्िायत्त डॉगकंि का प्रदशणन करना है ।
• IIT मरासनेहािहीमेंभ्रर्ू के मगस्तष्ट्ककीसािाणगधकगिस्ततृ 3D • ‘चेिर’ और ‘टारिेट’ नामक दो 400 kg ििनी उपग्रहों को
तस्िीरे िारीकीहै। अिि-अिि कक्षाओ ं में प्रक्षेगपत गकया िाएिा ।
77 विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
अन्य देशों के महत्वपूर्ण ममशन
नासा (NASA) के महत्िपूणय वमान
• लॉन्च :- NASA (14 अक्टूबर, 2024) ग्रह :- ब्रहस्पगत
यूिोपा वक्लपि
• उद्देश्य :- सबसेबडेग्रहबृहस्तपगतके चांदयरू ोपापरिीिनकीसम्भािनाकीतिाशकरनेके गिए
वमान
• लॉन्चि िॉके ट :- फाल्कनहैिीरॉके ट(स्पेसएक्सकम्पनी)
(Europa
• लॉन्च सेंटि :- फ्िोररडाके कै नेडीस्पेससेंटरसे।
Clipper)
• इसगमशनकोयरू ोपातकपहुचाँ नेमेंिर्ण2030 तककासमयििेिा।
• यहपरीक्षर्स्टारिाइनरकाअतं राणष्ट्रीयअतं ररक्षस्टेशनके गिएप्रथममानियक्त
ु प्रक्षेपर्है।
• इस गमशन के तहत नासा के अंतररक्ष यािी बचु एिं भारतीय मि ू की अमेररकन नािररक सनु ीता गिगियम्स को अंतराणष्ट्रीय
स्टािलातनि क्रू स्टेशन तक भेिा िया ।
वमान • सनु ीता विवलयम्पस औि बुच विल्मोि- 5 िनू 2024 कोNASA के बोईिस् ं टारिाइनरस्पेसक्राफ्टसेइटं रनेशनि
स्पेसस्टेशन(ISS) के गिएउडानभरीगिन्हें 13 िनू कोिापसिौटनाथािेगकनतकनीकीखराबीके कारर्NASA ने
िापसीटािदी, िबगकस्पेसक्राफ्ट7 गसतंबरकोिापसिौटआया।
• ारू ु :- स्पेसएक्सकंपनी(अमेररका)
• गिश्िकापहिाकॉमगशणयिस्पेसिॉकगमशनहै।
• पोिाररस डॉनगमशननेफाल्कन-9 रॉके टसेफ्िोररडा(अमेररका) से10 गसतंबर2024 कोउडानभरी।
पोलारिस डॉन • इसगमशनमेंअमेररकीअरबपगतिेरेडइसाकमैन, स्कॉटपोटेट, सारागिगिसऔरऐना मेननकोिेिायाियाथा।
• इसके साथहीइसाकमैनऔरगिगिसस्पेसिॉककरनेिािे264 िेंऔर265 िेंव्यगक्तबनिएहैं।
• दगु नयाके पहिेप्राइिेटस्पेसिॉकगमशन‘पोिाररसडॉन’के क्रूड्रैिनकै ्सि
ू नेफ्िोररडाके तटसेदरू मैगक्सकोकी
खाडीमें15 गसतंबर2024 कोसरु गक्षतिैंगडंिकी।
• यहगिश्िकापहिािकडीके पैनििािाउपग्रहहै।
• लॉन्च - नासाके कै नेडीस्पेससेंटर, फ्िोररडा(अमेररका) सेस्पेसएक्सरॉके टद्वारा।
• वनमायण - इसेिापानकीक्योटोयगू निगसणटीऔरहोमगबल्डरसगु मतोमोफॉरे स्रीद्वाराबनायािया।
वलननोसैट
• उद्देश्य- अंतररक्षके िातािरर्मेंिकडीके स्थागयत्िकापरीक्षर्करनाएिंअंतररक्षमेंमििेकोकमकरनाहै।
(Lignosat)
• इसकागनमाणर्मैिनोगिया(िापानीहोनोकी) कीिकडीसेगकयाियाहै।
• इसमेंपारंपररकएल्यगु मगनयमसंरचनाएंऔरइिेक्रॉगनक्सशागमिहैतथाआिरर्सामग्रीके रूपमेंिकडीकाउपयोि
गकयाियाहै।
• डेल्ट ाIV हेिीअमेररकाकाएकहेिी-गिफ्टिाहनहै।
डेल्टा IV हेिी • इसकीअंगतमउडानके गिएइसेफ्िोररडाके के पकै नािेरिस्पेसफोसणस्टेशनके स्पेसिॉन्चकॉम्पिेक्ससेिॉन्चगकया
िॉके ट िया।
• NROL-70 गमशनके गिएडेल्ट ाIV हेिीरॉके टकाअगं तमप्रक्षेपर्गकयािया।
• अमेररकाकीएकगनिीकम्पनीनेचरं मापरपहिािागर्गज्यकअतं ररक्षयानउतारकरइगतहासरचगदयाहै।
• यहऐगतहागसकसफिताह्यस्ू टन(अमेररका) कीकम्पनी‘’इटं ु एगटिमशीन्स’’(Intuitive) द्वारागनगमणत''नोिा-सीिैंडर''
IM-1 वमान
(Nova-C Lander) कोगमिीहै, गिसके अंतररक्षयानकानाम‘ओडीगसयस’(Odysseus) है।
• ''इटं ु एगटिमशीन्स'' चन्रमापरिैंगडंिकरनेिािीपहिीगनिीिागर्गज्यककम्पनीबनिईहै।
एवक्सओम • अंतराणष्ट्रीयअंतररक्षस्टेशन(ISS) के गिएपहिापर्ू तण : यरू ोपीयिागर्गज्यकगमशन(Axiom) कोिॉन्चगकयािया।
वमान-3 • इसगमशनकोस्पेसएक्सके फाल्कन-9 रॉके टसेकै नेडीस्पेससेंटर, के पकै निेरि(फ्िोररडा, अमेररका) सेिॉन्चगकयािया
(Axiom • एगक्सओमगमशन-3 के तहतक्रूड्रैिनकै ्सि ू , गिसकानाम'फ्ीडम' हैद्वारायरू ोपके चारअतं ररक्षयागियोंकोISS परभेिािया ।
Mission-3) • इसगमशनमेंचारएिेंगसयााँ- NASA, ESA, Space X औरएगक्सओमस्पेस(Axiom Space) शागमिथी।
TOI - 715 b • यहNASA द्वारा137 प्रकाशिर्णदरू खोिाियाग्रह‘सपु रअथण’है।
78 विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
चीन के महत्िपण
ू य वमान
• चीनीअतं ररक्षएिेंसीने‘चांिई-6 रोबोगटकिनू रएक्स्िोरे शनगमशन’को िेनचांिअतं ररक्षप्रक्षेपर्के न्रसे
चांि ई-6 मून वमान ‘Long March-5 Y8’ रॉके टद्वारासफितापिू णकिॉन्चगकया
• ‘चांिई-6’चंरमाके दरू गस्थतदगक्षर्ीध्रिु - एटके नबेगसनसेनमनू ेप्रा्तकरे िा।
• चीननेगशयान-23 उपग्रहकोLong March - 4C रॉके टद्वाराअंतररक्षमेंिॉन्च गकया
वायान-23 उपग्रह
• यहएकगनिरानीउपग्रहहै, गिसकाउपयोिअंतररक्षपयाणिरर्ीयगनिरानीमेंगकयािाएिा।
क्यूवकयाओ - 2 • चीननेअपनेचंरअन्िेर्र्कायणक्रमके तहतसंचारररिेऔररे गडयोखिोिगिज्ञानउपग्रहमाचण-8 रॉके टद्वारा
रिले उपग्रह िेनचांिसैटेिाइटिॉन्चसेंटरसेिॉन्चगकया।
ाेनझोउ - 18 • शेनझोउ-18 कीिॉगन्चिं उत्तर- पगिमचीनके िोबीरे गिस्तानमेंगस्थतगिउक्िानसैटेिाइटिॉन्चसेंटरसेकीिई।
प्रोग्राम • इसके माध्यमसेचीननेतीनएस्रोनॉट्सकोगतंयािोंिस्पेसस्टेशनपरभेिाियाहै।
• इसगमशनमेंगिएिोंि- 3 (स्माटणड्रैिन-3) रॉके टकाइस्तेमािगकयाियागिसकायेदसू रासफिप्रक्षेपर्था।
चीन ने समुद्र से
• प्रक्षेगपतउपग्रह:- इसप्रक्षेपर्मेंगतयानी-41 (Tianyi-41) XSD-15, XSD-21, XSD-22, YUXing-2-05
लॉन्च वकए 8 उपग्रह
औरफुदान(Fudan-1) सगहत8 उपग्रहोंकोउनकीयथेष्ट्ट कक्षामेंस्थागपतगकयािया
चीन िािा तािामंडल • चीनने“थाउिेंडसेि”पररयोिनागिसेG-60 नक्षिके रूपमेंभीिानािाताहै, कोपृथ्िीकीगनचिीकक्षामें
का प्रथम उपग्रह प्रक्षेगपतगकयािया।प्रक्षेपण :- माचण6 A िाहकरॉके टद्वारा।
अन्य देा
वजमसैट - 2 • गिम्बाब्िे(अफ्ीका) नेअपनादसू राउपग्रहZIMSAT - 2 िॉन्चगकयाहै।
• उद्देश्य :- यहकृ गर्औरससं ाधनप्रबधं न, खगनिससं ाधनअन्िेर्र्, शहरीगनयोिनऔरबगु नयादीढााँचेके गिकासहेतु
शहरीमानगचिर्औरआपदाप्रबधं नमेंमददकरे िा।
• यरू ोपीयअतं ररक्षएिेंसी(ESA) नेपहिीबारफ्ें चियु ानासेएररयन- 6 रॉके टकोसफितापिू णकिॉन्चगकया।
एरियन - 6 िॉके ट • यहयरू ोपकीएररयनरॉके टश्रृंखिा(एररयन5 सेआिे) मेंनिीनतमरॉके टहै, िो Low Earth Orbit सेऔरदरू िहन
अंतररक्ष(Deep Space) मेंगमशनिॉन्चकरसकताहै।
PAKSAT MM1 • पागकस्ताननेएकसंचारउपग्रहचीनके गिचांिउपग्रहप्रक्षेपर्के न्रसेप्रक्षेगपतगकयाहै
उपग्रह • इससेपहिेमई2024 मेंपागकस्तानने‘आईक्यबू – कमर’उपग्रहकोभीचीनकीमददसेप्रक्षेगपतगकयाथा।
अंिािा - A5 • रूसनेअंिारा- A5 अंतररक्षरॉके टकासफिपरीक्षर्गकयाहै।
अंतरिक्ष िॉके ट • यहिॉन्चपरीक्षर्रूसके ‘िोस्टोचनीकोस्मोड्रोम’(Vostochny Cosmodrome) सेगकयािया।
• िापाननेअपनेगमशन‘मनू स्नाइपर’के तहतचरं माकीसतहपरसॉफ्टिैंगडंिकरनेिािागिश्िका5िांदेशबनिया
मनू स्नातपि (Moon
है।इससेपहिेभारत, चीन, रूसऔरअमेररकायहसफिताहागसिकरचक ु े हैं।
Sniper)
• गमशनके तहतिैंडर‘गस्िम’(SLIM) नेचंरमाके गशयोिीक्रेटर(Shioli Crater) मेंसटीकिैगडंिकी
• यहगमशनइसरोएिंनेशनिसेंटरफॉरस्पेसस्टडीि(CNES) (फ्ांस) के मध्यएकसहयोिात्मकप्रयासहै।
TRISHNA वमान • TRISHNA -Thermal Infrared Imaging Satellite for High Resolution Natural Resource Assessment
• कायण:- ििससं ाधनों, भगू मसतहके तापमानऔरिनस्पगतस्िास्थ्यकीगनिरानीके गिए।
• यक
ू े स्पेसकमांडनेअपनापहिासैन्यउपग्रहटायचेसफितापिू णकिॉन्चगकया।
टायचे (Tyche)
• यहउपग्रहखगु फयागनिरानीके साथहीसैन्यअगभयानोंऔरप्राकृ गतकआपदाओं मेंमददिारहोिा।
RSM - 56 Bulava • यहरूसकीन्यगू क्ियरबैिेगस्टकगमसाइिहै, िोपनडुब्बीसेप्रक्षेगपतकीिासकतीहै।
ह्वासल - 1 िा-3 • उत्तरकोररयानेइससपु र- िॉिणक्रूिगमसाइििारहेडऔरएकनईएटं ीएयरक्राफ्टगमसाइिकापरीक्षर्अपनेपगिमी
(Hwasal-1 Ra-3) तटितीक्षेिसेगकया।
79 विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
अन्य तथ्य
यहयाननासा(NASA) द्वारान्यिू ीिैण्ड सेिॉन्च यकएकमानियक्ु तपनडुब्बीिाहनहै गिसेभारतके
सौि ऊजाय से
गकयािया। चेन्नईमेंराष्ट्र ीयमहासािरप्रौद्योगिकीसंस्थान
सचं ावलत इसस्पेसक्राफ्टकोरॉके टिैबके इिेक्रॉनरॉके ट (NIOT) द्वारागिकगसतगकयाियाहै।
अंतरिक्ष यान
द्वाराप्रक्षेगपतगकयािया। मत्स्य - 6000 यह‘समरु यानगमशन’कागहस्साहै, गिसकाउद्देश्य
ससं ाधनोंके गिएिहरे समरु कीखोिकरनाऔर
येUAE कीमैकेगनकिइिं ीगनयरहै िोNASA
भारतकीिैज्ञागनकऔरतकनीकीक्षमताओं को
अलमात्रोाी द्वाराअंतररक्षयािीके रूप मेंप्रगशगक्षतहोने िािी
बढ़ानाहै।
पहिीअरबमगहिाहै।
तेिऔरिैसउद्योिसेिैगिकमीथेनउत्सिणनकी
मानिअंतररक्षउडानकायणक्रमके तहतएंिेंसी“ब्िू
मीथेनसैट िाससू ीकरनेमेंमददहेतुअमेररकाका‘’मीथेनसैट’’
ओररगिन”द्वारा“न्यू शेपडण”नामकपनु : प्रयोज्य
उपग्रहस्पेसएक्सफाल्कन-9 रॉके टद्वारािॉन्च।
उप-कक्षीयप्रक्षेपर्यानहै, गिसे अंतररक्षपयणटनके
मानि गियेगिकगसतगकयाियाहै। रूसनेपहिीबारअपनेअिं ाराए-5 अतं ररक्षरॉके ट
अंतरिक्ष इसके तहतचयगनतअंतररक्षयागियोंकोअंतररक्ष प्रोटोन (Angara A5 Space Rocket) कासफिपरीक्षर्
उडान कीअंतराणष्ट्रीयस्तरपरमान्यताप्रा्तसीमा, कामणन (Proton) गकयाहै।यहरूसके प्रोटोनहैिी-गिफ्टरॉके टको
काययक्रम रे खासेआिे11 गमनटकीयािापरिेिाएिा। प्रगतस्थगपतकरे िा।
नोट: िोपी थोटाकुिा भारतके पहिेअंतररक्ष
ओलेि रूसके अतं ररक्षयािीगिन्होंनेअतं ररक्षमेंसिाणगधक
पयणटकबनेहैिोगकन्यश ू ेपडणगमशनके तहत
कोनोनेंको गदनों(1110 गदन) तकरहनेकाररकॉडणबनायाहै।
अंतररक्षमेंिएहै।
स्पेक्यूलोस - यहखिोिशागस्त्रयोंद्वाराखोिाियापृथ्िीके
यहतारोंके समहू कानामहै। 3 आकारकाग्रहहै।गिसपरसयू णसेकईिनु ाअगधक
ावि एिं
खिोिगिदोंनेब्रह्ांडकीपहिीमदं ागकनीके बनने गिगकरर्होनेके कारर्िातािरर्समा्तहोचक ु ाहै
वाि
कीआरगम्भकसमयके शरू ु आतीतारोंके इससमहू
कापताििायाहै। शभु ारंभ- दबु ईमें
विि की इसके गियेदबु ईमेंआयोगित‘‘िल्डणििनणमेंट
यह260 हिारकरोडसयू णिािीआकाशििं ासमहू प्रथम हिाई सगमट-2024’’में13 फरिरी, 2024 कोसमझौता
एनास्टो
है, गिसेपारकरनेमेंप्रकाशको भी36 करोडिर्ण टै क्सी हुआ ।
क्लस्टि
िििाएंिे। एयरटैक्सीकापररचािनिर्ण2026 से प्रारम्भहोिा।
तजडेवलये - यहरूसद्वारागिकगसतहेिीकॉ्टरसेप्रक्षेगपतकी रूसकापहिाहाइड्रोिनसचं ागितपोतिोसमरु ी
305 िानेिािीहिासेसतहपरमारकरने िािी तकोबाल्ट
परीक्षर्के गिएतैयारगकयाियाहै।
गमसाइिहै।
एिोिाना मझिांिडॉकगशपगबल्डसणगिगमटेडके 250िें
अमेरिका वस्थत अंतरिक्ष एजेंवसयों के मानि अंतरिक्ष उडान (Arowana) स्थापनागदिसपरएरोिानानामकस्िदेशीपनडुब्बी
काययक्रम में भाित साझेदाि के प्रोटोटाइपकाउद्घाटनगकया िया।
अमेररका की अतं ररक्ष अन्िेर्र् एिं अनसु ंधान एंिेसी (SERA) एिं िैया बीएच - आकाशिंिागमल्कीिे(Milky Way) मेंसबसेबडे
ब्िू ओररगिन ने “मानि अंतररक्ष उडान कायणक्रम मे साझेदार राष्ट्र के 3 (Gaia तारकीयब्िैकहोिकीखोिकीहै ।
रूप में भारत को शागमि गकया ।” BH3) इसब्िैकहॉिकोिैयाबीएच-3 नाम गदयाियाहै।
मंिल ग्रह पि खोजे 3 क्रेटसय
• अहमदाबादगस्थतगफगिकिररसचणिैबोरे टरी (PRL) के िैज्ञागनकों • वहलसा (गबहारके नािदं ागििेमें)
नेमंििग्रहपर3 नएक्रेटसणकीखोिकी। • मुिसान (उत्तरप्रदेशके हाथरसगििेमें)
• येक्रेटसणमंििके “थाररस”ज्िािामखु ी क्षेिमेंगस्थतहै। • इनमेंसेएकक्रेटरकानाम“PRL” मेंपिू णगनदेशक
• शेर्दो क्रेटसय का नाम उत्तरप्रदेशिगबहारके कस्बोंके नामरखेहै। प्रोफे सरदेिेन्रिािके नामपर “िाि”रखािया ।
80 विज्ञान एिं प्रौद्योविकी
• यहााँरक्षामंिीरािनाथगसंहनेभारतीयनौसेना • गनमाणर्:- िोिागशपयाडणगिगमटेडद्वारा
दामािुंडम GSL याडय
के िेरीिोगफ्क्िेंसी(Very Low • यहएकप्रदर्ू र्गनयंिकिहािहै गिसेहािही
िन क्षेत्र 1267
Frequency) रडारस्टेशनकीआधारगशिा मेंभारतीयतटरक्षकबिकोसौंपाियाहै।
(तेलिांना)
15 अक्टूबर, 2024 कोरखीहै।
• हािहीमेंकांिोिोकतांगिकिर्राज्यमें
• DNA गफंिरगप्रगटंिएिंडायननोगस्टकके न्र वडजीज एक्स गडिीिएक्सनामकबीमारीसे400 सेअगधक
(CDFD) नेहािहीमेंDNA नमनू े के
िोिोंकीमौतहोिई।
माध्यमसेएकपररिारमेंिेगिरे टकीप्रथाका
लेवििे ट पताििाया। • इन्रपथइगं स्टटयटू ऑफइनफॉरमेशन
वििाह • प्रथा- िेगिरे टएकसास्ं कृगतकप्रथाहैगिसमें टेक्नोिॉिीगदल्िी(IIIT-गदल्िी) के
एकगिधिाअपनेमृतकयामानगसकया शोधकताणओं नेऐिएक्सटेंडगिकगसतगकयाहै।
शारीररकरूपसेअक्षमपगतके भाईसेगििाह • यहिीरोप्रोटेगक्टि(एंटी-ऐगिंि) िर्ु ोंिािे
करतीहै। अर्ओ ु ं कीपहचानकरनेिािाएक AI
• भारतीयगचगकत्साअनसु ंधान पररर्दऔर ऐजएक्सटें ड आधाररतउपकरर्है।
मरासमधु मेहअनसु ंधाननेसंयक्ु तरूपसे • यहपारम्पररकतरीकोंकीति ु ना मेंव्यिहायण
भारतकापहिामधमु ेह- गिगशष्ट्ट बाचोबैंक अर्ओ ु ं कीपहचानकरनेमेंििने िािेसमय
भाित का
चेन्नईमेंस्थागपतगकयाहै । कोकमकरदेताहै।
पहला
• बाचोबैंक- ऐसीसगु िधाहे, िोगचगकत्सा
मुधमेह बैंक
अनसु धं ानमेंउपयोिके गिएआमतौरपर
मनष्ट्ु योंसेप्रा्तिैगिकनमनू ोंकोसंग्रगहत • IIT रोपडके 1 Hub Awadh (कृ गर्एिं िि
करतीहै। प्रौद्यौगिकीगिकासके न्र) नेगिगभन्नक्षेिोंमें
इन्टरनेटऑफगथनसअनप्रु योिमेंक्रागन्तिाने
• उद्देश्य- िाइसेंसिारीकरने, सत्यापनकरने धलूटूथ लो
िाष्ट्रीय के गिएउन्नतडेटासरु क्षाके साथिाित
एिंप्रितणनतथाअनपु ािनके प्रबंधनके गिए एनजी िेटिे
विवधक माप प्रभािीब्िटू ू थिोएनिीिेटिेऔरनोड
प्रगकयाओं कोसव्ु यिगस्थत करना। गसस्टमकाअनािरर्गकयाहै।
विज्ञान
• E MAAP कामतिबहै- इिेक्रागनक
पोटय ल
मेरोिॉिीए्िीके शनपोटणि
• Open AI (ओपनएआई) नेसोराटबो िॉन्च
• चीननेअपनापहिासपु रकै ररयरसमरु में गकयाहैिोसोराकानयाऔरतेिसंस्करर्है।
उताराहै। सोिा टबो • सोराएक''टेक्स्ट-टू-िीगडयो'' आगटणगफगशयि
सपु ि कै रियि
• यहअमेररकासेबाहरबनासबसेएडिासं इटं ेगििेंस'' AI मॉडिहै, गिसकापिू ाणििोकन
फुवजयान
एयरक्राफ्टकै ररयरहै। फरिरी2014 मेंगकयाियाथा।
• यहचीनकातीसरागिमानिाहकयद्ध ु पोतहै।
उपग्रह जीसैट-20 (GSAT N-2)
RHUMI - 1
• िीसैट-20 उपग्रहके प्रक्षेपर्के गिएन्यू स्पेस इगं डयागिगमटेड(NSIL)
• यह भारत द्वारा गनगमणत रीयिू ेबि हाइगब्रड रॉके ट है गिसका नेस्पेसएक्सके साथिनिरी2024 मेंसमझौतागकयाथा।
सफि परीक्षर् गकया िया है । लॉन्च :- चैन्नई में • यहभारतकाप्रथमसंचारउपग्रहहैगिसेस्पेसएक्सके 'फाल्कन9' रॉके ट
• विकवसत :- तगमिनाडु गस्थत स्टाटण अप कम्पनी स्पेस िोन द्वारा19 निम्बर, 2024 कोअंतररक्षमेंसफितापिू णकिॉन्चगकयािया।
इगं डया ने मागटणन ग्रपु के साथ गमिकर गिकगसत गकया । • िीसैट-20 कोगियोगसक्र ं ोनसरांसफरऑगबणट(35786 गकमी. कीऊंचाई
• नोट :- रॉके ट को मोबाइि िांचर का उपयोि करके उप पर) मेंस्थागपतगकयाियाहै, गिसकािीिनकाि 14 िर्णकाहोिा।
कक्षीय प्रक्षेप पथ में िांच गकया िया । • GSAT N-2 - यहसैटेिाइटहाईस्पीडब्रॉडबैंडइटं रनेटकनेगक्टगिटी
• RHUMI-1 द्वारा 3 क्यबू सैटेिाइट और 50 पीको सैटैिाइट औरगडगिटििीगडयो-ऑगडयोरांसगमशनउपिब्ध कराएिा।इससे
को उप-कक्षीय प्रक्षेप पथ में प्रक्षेगपत गकया िया । हिाईिहािमेंउडानके दौरानमोबाइिइटं रनेटकीसगु िधागमिसके िी।
• यह रॉके ट समन्ु र में सरु गक्षत िैण्ड कर सकता है। इसकाििनििभि4700 Kg है।
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